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24 फ्रेम : संयोजन के मूल सिद्धान्त

आकांक्षा शर्मा।

वीडियो और फिल्म मेकिंग नई उंचाईयों तक पहुँच चुका है। तकनीक में प्रतिदिन इज़ाफ़ा हो रहा है और हर रोज़ बेहतर कैमरे ईजाद किए जा रहे हैं। परन्तु यह समझना बहुत जरुरी है कि इसकी शुरुआत कहां से और कैसे हुई। फोटोग्राफी के ईजाद होने के तक़रीबन सात दशक बाद थॉमस अल्वा एडिसन ने काइनेटोस्कोप का अविष्कार किया। खींची गई तस्वीरों को एक के बाद एक जल्दी से घुमाना इस उपकरण की खासियत थी।

मनुष्यों की आंखें एक चित्र को देखने के बाद उसकी छवि को 1/16 क्षण के लिए दिमाग में चिन्हित कर लेती हैं। यदि इस समय के बीच उन्हें तुरंत अगला चित्र दिखा दिया जाए तो वह पिछली तस्वीर से जुड़ जाता है और ये अलग-अलग चित्र जुड़कर एक चलती हुई वीडियो की तरह प्रतीत होते हैं। इसे पर्सिस्टेंस ऑफ़ विज़न कहते है। एक वीडियो कैमरा दरअसल इन छवियों को निरंतर कैद करने का काम करता है। सामान्य तौर पर एक कैमरा 24 फ्रेम प्रति क्षण बिंबित करता है। तेज़ गति से प्रतिबिंबित होती तसवीरें हमें वीडियो जैसा आभास देती हैं। हर क्षण में लगभग 24 फ्रेम या छवियां कैद की जा सकती हैं।

प्रत्येक फ्रेम या तस्वीर के विभिन्न तत्वों के सही स्थापन को composition (संयोजन) कहते हैं। किसी भी फ्रेम या छवि को लेते समय हमें ध्यान देना होता है कि उसका संयोजन ठीक से किया गया हो। इसमें कैमरे की क्षमता, अपर्चर, लेंस, फोकल लेंथ, डेप्थ ऑफ़ फील्ड, कलर, कंट्रास्ट, ब्राइटनेस, लाइट आदि की बड़ी अहम भूमिका होती है। (कैमरे की कार्यप्रणाली के बारे में और जानने के लिए ये क्लिक करें

संयोजन के सिद्धांत
संयोजन के प्रमुख सिद्धांत हैं

  • रूल ऑफ़ थर्ड
  • लीडरूम एंड हेडरूम
  • शॉट साइज एवं एंगल

लीडरूम एंड हेडरूम
रूल ऑफ़ थर्ड्स का सिद्धांत कहता है कि किसी भी चित्र को 9 बराबर हिस्सों में बांटा जा सकता है।

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photography-images.अच्छा चित्र के लिए हमें अपने पात्र को इन खड़ी या लेटी हुई धारियों या फिर उनके बीच बने कोण पर केंद्रित करना चाहिए। हेडरूम यानि किसी भी चित्र में दर्शायी गयी चीज़ के ऊपर इतनी ही जगह जितनी उपयुक्त है। हेड स्पेस ज्यादा होने से देखने वाले का ध्यान भटकता है। शॉट साइज एवं एंगल हर तरीके से चित्र के संयोजन में मदद करते हैं। एक अच्छा फोटोग्राफर विभिन्न angles (high angle, low angle, top angle, bird’s eye view etc.) और शॉट के आकार (close up, mid close up, long shot, mid long shot etc) की अहमियत को अच्छी तरह समझता है।

हेडरूम यानि किसी भी चित्र में दर्शायी गयी चीज़ के ऊपर इतनी ही जगह जितनी उपयुक्त है। हेड स्पेस ज्यादा होने से देखने वाले का ध्यान भटकता है। शॉट साइज एवं एंगल हर तरीके से चित्र के संयोजन में मदद करते हैं। एक अच्छा फोटोग्राफर विभिन्न angles और शॉट के आकार की अहमियत को अच्छी तरह समझता है। शॉट साइज बदलकर और angle के फर्क से बहुत अलग-अलग तरीके के चित्र खींचे जा सकते हैं।

ये संयोजन के मूल सिद्धान्त हैं।

आकांक्षा शर्मा इग्नू में रिसर्च स्कॉलर हैं।

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