Home / पत्रकारिता / न्‍यूज और उसके आवश्‍यक तत्‍व

न्‍यूज और उसके आवश्‍यक तत्‍व

शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन।

इंसान आज चांद से होता हुआ मंगल पर कदम रखने की तैयारी कर रहा है और उसकी खोजी आंखे बिग बैंग (महाविस्‍फोट) में धरती के जन्‍म का रहस्‍य तलाश रही है। दरअसल इंसान को समय के पार पहुंचाया है, उसकी जिज्ञासा ने। सब कुछ जानने की इच्‍छा ही जिज्ञासा है। जिज्ञासा से मन में पैदा होते विचार और विचार जब कुछ करने को प्रेरित करता है, तो जन्‍म होता है घटनाओं का। घटनाएं प्रस्‍याशित, हों या अप्रत्‍याशित, आम लोगों की उसमें रूचि हो, तो वे बन जाती हैं, खबर। खबरें अलग-अलग माध्‍यमों से भले ही लोगों तक पहुंचती हैं, लेकिन इसे इकट्ठा करने का काम करते हैं संवाददाता यानी रिपोर्टर।

आधुनिक युग में प्रिंट मीडिया शुरू होने के बाद रिपोर्टिंग, संचार का सबसे सशक्‍त माध्‍यम बन गया है और टेलीविजन ने तो इसे परकाष्‍ठा पर पहुंचा दिया है। लेकिन वक्‍त के साथ-साथ रिपोर्टिंग के मायने भी बदले हैं। कम से कम टेलीविजन नयूज में तो ये साफ दिख रहा है। आज जो खबर टारगेट ऑडिएंस को दिमाग में रखकर प्रश की जाती है, वही बढि़या रिपोर्टिंग कहलाती है। साथ ही अब ये भी जरूरी हो गया है कि रिपोर्ट में जो कुछ कहा जाए, वो संक्षेप में, लेकिन पूरी तरह स्‍पष्‍ट हो। न्‍यूज (खबर) पेश करने से पहले एक रिपोर्टर के लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि उसे क्‍या करना है और अपने मिशन को कैसे पूरा करना है। इस लिए सबसे पहले जानते हैं कि खबर या न्‍यूज क्‍या है?

न्‍यूज अंग्रेजी के चार अक्षरों NEWS से बना और साधारण भाषा में हम ये कह सकते हैं कि जो सूचनाएं NORTH, EAST, WEST और SOUTH या पूरब, पश्चिम, उत्‍तर और दक्षिण यानी सभी दिशाओं से आती हैं, वो न्‍यूज है। लेकिन इसकी भी कुछ शर्तें हैं। सबसे अच्‍छी खबर वहीं है, जिसके बारे में काफी लोगों की गहरी दिलचस्‍पी हो।

न्‍यूज की ये सबसे लोकप्रिय परिभाषा है। हालांकि अंग्रेजी भाषा के जानकर इस परिभाषा से सहमत नहीं है। उनका कहना है कि बीसवीं सदी से पहले Acronym (कई शब्‍दों के पहले अक्षर को मिला कर नया शब्‍द बनाना) का चलन नहीं था। उनके मुताबिक न्‍यूज दरअसल अंग्रेजी के New शब्‍द से बना है, क्‍योंकि समाचार में हमेशा नई बातों की जानकारी रहती है।

इस तरह हम कह सकते हैं कि न्‍यूज फैक्‍ट्स पर आधारित वो ताजा सूचना है, जो इंसान की जिज्ञासा को उभारता है और उसे शान्‍त भी करता है। वरिष्‍ठ पत्रकार परवेज अहमद कहते है कि सामान्‍य से अलग हटकर जो होता है, वह न्‍यूज है। असामान्‍य भी जब सामान्‍य हो जाए, तो वह भी खबर है। यानी नीयत समय पर बारिश होती है, तो वह खबर है, क्‍योंकि लोग गर्मी से तंग आकर और किसान खेतों के लिए बारिश का इंतजार कर रहे होते हैं। बारिश समय पर नहीं होती, तो वह भी खबर है।

वरिष्‍ठ पत्रकार आशुतोष का कहना है कि न्‍यूज का मतलब वो सूचना है, जिसे लोग जानना चाहते हैं, चाहे वो अंतरराष्‍ट्रीय हो या पास-पड़ोस की। उनका ये भी कहना है कि पिछले दस सालों में खबरों का स्‍वरूप बदला है। पहले ज्‍यादातर खबरें राजनीति या फिर राजनेताओं से ही बनती थीं। लेकिन अब बिजनेस हो या फिर मनोरंजन, खेल हो या लाइफ स्‍टाइल, इनकास्‍वरूप भी सार्वजनिक हो गया है और इससे जुड़ी खबरें भी जानने के लिए इंतजार करते हैं।

वरिष्‍ठ पत्रकार प्रबल प्रताप सिंह कहते हैं कि हर वो चीज न्‍यूज है, जिसके बारेमें आम आदमी जानना चाहता है या उसे किसी न किसी तरह प्रभावित करती है। जिन नई बातों में लोगों की दिलचस्‍पी हो, उसे हम न्‍यूज या समाचार कह सकते हैं। सत्‍य घटना या विचार, जिसमें बहुत सारे लोगों की दिलचस्‍पी हो, उसे भी न्‍यूज कह सकते हैं।

पत्रकारिता के विद्यार्थियों को न्‍यूज की परिभाषा के संबंध में अकसर एक उदाहरण पेश किया जाता है कि इंसान, कुत्‍ता को काट ले, तो ये खबर है, लेकिन कुत्‍ता किसी इंसान को काट ले, तो खबर नहीं है, क्‍योंकि इसमें कुछ खास या नई बात नहीं है, इस लिए लोगों की इसमें दिलचस्‍पी भी नहीं होती। लेकिन कुत्‍ते का काटना भी न्‍यूज हो सकता है। काटने वाला कुत्‍ता हो सकता है, पागल हो और उससे रेबिज बीमारी फैलने की आशंका हो। एक अच्‍छे रिपोर्टर को ये भी पता होना चाहिए कि कुत्‍ता किसका है और उसने किसको काटा है। कुत्‍ता किसी भी महत्‍वपूर्ण व्‍यक्ति का है, तो संभव है वो खबर बन जाए। कुत्‍ता किसी महत्‍वपूर्ण व्‍यक्ति को काट ले, तो वो भी खबर बन सकती है। कहीं अवारा कुत्‍तों का आतंक हो, तो वह भी खबर है।

वरिष्‍ठ पत्रकार संदीप चौधरी का कहना है कि रिपोर्टर को खबर और सामान्‍य ज्ञान के बीच फर्क की समझ होनी चाहिए। एक शेरनी पांच बच्‍चों को जन्‍म देती है तो ये खबर नहीं, सामान्‍य ज्ञान है। लेकिन एक महिला पांच बच्‍चों को जन्‍म देती है, तो ये निश्चित तौर पर खबर है। उनका कहना है कि रिपोर्टर को खबर और सनसनी में फर्क समझना चाहिए।

न्‍यूज के आवश्‍यक तत्‍व- कोई घटना या सूचना न्‍यूज है या नहीं, इसका निर्धारण कुछ बातों पर गौर कर किया जा सकता है। आइए देखते है कि न्‍यूज के आवश्‍यक तत्‍व क्‍या हैं?

दिलचस्‍पी (Human Interest)- जिन बातों में इंसान की रूचि हो, वो खबर है। किसी बड़ी बात से खुशी होती है, गुस्‍सा आता है, मन दुखी या उदास होता है, तो ये ऐसी बातें न्‍यूज का हिस्‍सा हैं।

बड़े नाम (Prominence)- तमाम बड़े नाम खबर बनाते हैं। टीवी रिपोर्टर को हमेशा ऐसे लोगों पर नजर रखनी चाहिए। बड़ा नेता हो या कोई सेलिब्रिटी, उसकी हर गतिविधि में आम आदमी की दिलचस्‍पी होती है। हर कोई उसकी निजी और बाहरी जिन्‍दगी के बारे में जानना चाहता है, इसलिए ऐसे लोगों का हर काम खबर के दायरे में आता है।

रहस्‍य-रोमांच (Mystery, Suspense, Adventure)- काई भी ऐसा काम, जो लोगों को रोमांचित करे या उनका ध्‍यान अपनी तरफ खींचे, खबर के दायरे में आता है।

अशांति-हिंसा (Conflict)- लड़ाई-झगड़े, दंगा-फसाद जैसी घटनाओं में हर किसी की दिलचस्‍पी होती है। भले ही ऐसी घटनाओं से उन पर काई असर नहीं पड़ता हो, फिर भी लोग ऐसी बातों को विस्‍तार से जानना चाहते हैं।

नजदीकी रिश्‍ता, निकटता (proximity)- इंसान के इर्द-गिर्द होने वाली घटनाएं, उसे ज्‍यादा प्रभावित करती हैं। अपने गांव-शहर की घटनाओं को कोई भी ज्‍यादा गहराई से जानना चाहता है, वहीं ऐसी घटनाओं में उसकी दिलचस्‍पी कम होती है, जिन जगहों के बारे में उसे जानकारी नहीं होती या जहां के लोगों को वो नहींजानता। उदाहरण के लिए अपने शहर में छोटी से छोटी वारदात वहां के लोगों के लिए चर्चा का विषय हो सकती है, जबकि दूरदराज के अनजान इलाके की बड़ी वारदात भी शायद उन्‍हें नहीं चौंकाए।

असामान्‍य, अनोखी बातें (Odd and Unusual)- अनोखी, विचित्र, बाते भी खबर बनती हैं, क्‍योंकि हर कोई ऐसी खबरों को खूब मजे के साथ देखना चाहता है। हास्‍य-व्‍यंग्‍य, मनोरंजन से जुड़ी बातों में भी लोगों की दिलचस्‍पी होती है।

हादसा (Accidents)- कोई भी बड़ा हादसा टीवी न्‍यूज का अहम हिस्‍सा है। किसी हादसे के बाद लोगों के दिमाग में सवाल उठता है कि दुर्घटना कैसे हुई, जानमाल का कितना नुकसान हुआ, हादसे में कितनेलोगों की मौत हुई, क्‍या किसी की जान बची, हादसे के शिकार कौन लोग थे, कहां के रहने वाले थे। हादसे की वजह क्‍या थी। ये सब कुछ ऐसी बातें हैं, जिसके बारे में हर इंसान जानना चाहता है और ऐसी घटनाओं के विजुअल लोगों को टीवी से बांधकर रख सकते हैं।

सामयिकता (Timeliness)- किसी भी न्‍यूज में समय काफी अहमियत रखता है। काई भी घटना जो तुरन्‍त घटी हो, उसमें लोगों की ज्‍यादा दिलचस्‍पी होती है, पुरानी खबरें, दर्शकों पर अपना पूरा प्रभाव नहीं छोड़ पातीं। यानी न्‍यूज भी पुरानी या दूसरे शब्‍दों में कहें तो बासी हो सकती है। टीवी रिपोर्टर को इस बात का ख्‍याल रखना चाहिए कि हर खबर की एक उम्र होती है और इसके खत्‍म होने के साथ ही उस खबर की अहमियत भी खत्‍म हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि खबर जल्‍द से जल्‍द दर्शकों तक पहुंचा दी जाए।

नवीनता (Novelty)- लोग हमेशा नई बातों को जानना चाहते हैं, इसलिए हर नई बात उनके लिए खबर है। रिपोर्टर के लिए न्‍यूज के सार्वजनिक महत्‍व को भी समझना जरूरी है। कई बार एक खबर लगातार कई दिनों तक सुर्खियों में रहती है और रोज उसमें नए तथ्‍य जुड़ते जाते हैं। ऐसी घटनाओं का फॉलोअप भी न्‍यूज का अहम तत्‍व है।

शैलेश: बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय में पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान दैनिक जागरण के लिए रिपोर्टिंग। अमृत प्रभात (लखनऊ, दिल्ली) में करीब 14 साल तक काम। रविवार पत्रिका में प्रधान संवाददाता के तौर पर दो साल रिपोर्टिंग। 1994 से इलेक्ट्रॉनिक मिडिया में। टीवीआई (बीआईटीवी) आजतक में विशेष संवाददाता। जी न्यूज में एडिटर और डिस्कवरी चैनल में क्रिएटिव कंसलटेंट। आजतक न्यूज चैनल में एक्जिक्यूटिव एडिटर रहे। प्रिंट और इलेक्ट्रिॉनिक मीडिया में 35 साल का अनुभव।

डॉ. ब्रजमोहन: नवभारत टाइम्स से पत्रकारिता की शुरुआत। दिल्ली में दैनिक जागरण से जुड़े। 1995 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में। टीवीआई (बीआईटीवी), सहारा न्यूज, आजतक, स्टार न्यूज, IBN7 जैसे टीवी न्यूज चैनलों और ए.एन.आई, आकृति, कबीर कम्युनिकेशन जैसे प्रोडक्शन हाउस में काम करने का अनुभव। IBN7 न्यूज चैनल में एसोसिएट एक्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर रहे। प्रिंट और इलेक्ट्रॉंनिक मीडिया में 19 साल का अनुभव।

Check Also

economic-financial-journalism

आर्थिक-पत्रकारिता क्या है?

आलोक पुराणिक | 1-आर्थिक पत्रकारिता है क्या 2- ये हैं प्रमुख आर्थिक पत्र-पत्रिकाएं  और टीवी ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *