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Monthly Archives: July 2015

आदिवासी क्षेत्र की समस्याएं और मीडिया

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स्वर्णताभ कुमार। हजारों वर्षों से जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले आदिवासियों को हमेशा से दबाया और कुचला जाता रहा है जिससे उनकी जिन्दगी अभावग्रस्त ही रही है। इनका खुले मैदान के निवासियों और तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले लोगों से न के बराबर ही संपर्क रहा है। केंद्र ...

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साख बनाए रखनी है तो समाचार की पुष्टि अवश्य करें

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डॉ. महर उद्दीन खां। पत्रकारिता का एक नियम यह भी है कि सुनी सुनाई बात पर पूरा विश्वास न करें। जो भी सूचना आप को मिलती है उसे क्रास चैक अवश्‍य करना चाहिए । ऐसा न होने पर आप धोखा भी खा सकते हैं क्योंकि कई लोग पत्रकार को पटा ...

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सम्पादन : खबर अखबारी कारखाने का कच्चा माल होती है

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डॉ. महर उद्दीन खां। रिपोर्टर समाचार लिखते समय उन सब बातों पर ध्यान नहीं दे पाता जो अखबार के और पाठक के लिए आवश्‍यक होती हैं। खबर को विस्तार देने के लिए कई बार अनावश्‍यक बातें भी लिख देता है। कई रिपोर्टर किसी नेता के भाषण को जैसा वह देता ...

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कैसे होगी पत्रकारों की सुरक्षा?

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आनंद प्रधान। इस समय एक सजग, सतर्क और सक्रिय स्थानीय समाचार मीडिया की बड़ी जरूरत है जो न सिर्फ भ्रष्टाचार-अनियमितताओं और विकास योजनाओं और सार्वजनिक सम्पदा की लूट का पर्दाफाश करे बल्कि जन-प्रतिनिधियों और अफसरों की जवाबदेही सुनिश्चित करे क्या भारत पत्रकारों के लिए असुरक्षित देश बनता जा रहा है ...

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टीवी मीडिया के न्यूज फॉर्मेट (पार्ट-2)

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संदीप कुमार। ब्रेकिंग ब्रेकिंग न्यूज टीवी मीडिया की धड़कन है। अक्सर टीवी स्क्रीन पर ब्रेकिंग न्यूज फ्लैश होती रहती है। शायद ही कोई बुलेटिन हो, जिसमें कोई न कोई ब्रेकिंग न्यूज न हो। ब्रेकिंग न्यूज सिर्फ कोई नई खबर या अप्रत्याशित खबर नहीं होती है। किसी खबर का अपडेट भी ...

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प्रतिबिम्ब बनने की प्रक्रिया और पिन होल सिद्धांत

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नितिन कुमार। फोटोग्राफी के लिए किसी भी वस्तु का वास्तविक प्रतिबिम्ब कैमरे में बनना आवश्यक होता है | उस प्रतिबिम्ब को इमेज प्रोसेसर के द्वारा डिजिटल डाटा में परिवर्तित कर उसको संरक्षित रखा जाता है | जबकि इससे पहले के कैमरों में यह इमेज रासायनिक पदार्थों (सिल्वर के हैलाइड) में ...

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जन संपर्क और प्रबंधन अध्याय 3

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जयश्री एन. जेठवानी और नरेन्द्र नाथ सरकार। कार्य निर्बाध गति से चलता रहे, इसके लिए किसी भी संस्थान के अंदर अलग विशेष विभागों की आवश्‍यकता होती है। विभिन्‍न विभागों की भूमिका और कार्यों के आधार पर उनके काम को लाइन या स्टाफ के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। अभियांत्रिकी, ...

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मीडिया लेखन (टीवी-रेडियो) की चुनौतियां और तकनीक

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उमेश चतुर्वेदी। मीडिया के लिए लेखन साहित्यिक लेखन से अलग है। साहित्यिक लेखन में जहां शब्दजाल रचे जाने की लेखक के सामने स्वतंत्रता होती है। वह अपने शब्दों के विन्यास में अपनी भावनाओं को बांधकर एक कसी हुई कथा लिख सकता है। लेकिन निश्चित तौर पर उसका अपना निश्चित पाठक ...

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टीवी रिपोर्टिंग: सबसे तेज, लेकिन कठिन और चुनौती भरा काम

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शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन। पत्रकारिता में टीवी रिपोर्टिंग आज सबसे तेज, लेकिन कठिन और चुनौती भरा काम है। अखबार या संचार के दूसरे माध्‍यमों की तरह टीवी रिपोर्टिंग आसान नहीं। टेलीविजन के रिपोर्टर को अपनी एक रिपोर्ट फाइल करने के लिए लम्‍बी मशक्‍कत करनी पड़ती है। रिपोर्टिंग के लिए निकलते ...

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अख़बारों से ग़ायब होता साहित्य

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फ़िरदौस ख़ान। साहित्य समाज का आईना होता है। जिस समाज में जो घटता है, वही उस समाज के साहित्य में दिखलाई देता है। साहित्य के ज़रिये ही लोगों को समाज की उस सच्चाई का पता चलता है, जिसका अनुभव उसे ख़ुद द नहीं हुआ है। साथ ही उस समाज की ...

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प्राकृतिक आपदा की रिपोर्टिंग : संवेदनशीलता और समझदारी नहीं, सनसनी और शोर ज्यादा

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आनंद प्रधान। भारतीय न्यूज मीडिया खासकर न्यूज चैनल एक बार फिर गलत कारणों से अंतर्राष्ट्रीय सुर्ख़ियों में हैं। 25 अप्रैल को नेपाल में आए जबरदस्त भूकंप के बाद वहां कवरेज करने पहुंचे भारतीय न्यूज मीडिया खासकर न्यूज चैनलों के एक बड़े हिस्से के असंवेदनशील और कई मामलों में गैर जिम्मेदाराना ...

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हैल्थ रिपोर्टिंगः एक चुनौतीपूर्ण कार्य

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रोशन मस्ताना। नित नए बदलते परिवेश व तकनीक के साथ ही पत्रकारिता का स्वरूप भी बदला है । आज के परिवेश में समाचार बिजली की गति के साथ एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच रहा है। जहां आज विश्व में मुद्रित समाचार पत्रों का चलन कम हुआ है । ...

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