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Monthly Archives: November 2015

मैगी की वापसी, लेकिन अब ग्राहकों के पास विकल्प हैं

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आशीष कुंमार ‘अंशु’। मैगी की वापसी में बड़ी भूमिका अमेरिका की जनसंपर्क कंपनी एपको की मानी जा रही है। एपको से पहले जनसंपर्क का काम नेसले के लिए एपिक देखता था जब आप यह लेख पढ़ रहे हैं, मैगी के रास्ते की सारी बाधाएं एक एक कर दूर हो चुकी ...

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मानवाधिकार उल्लंघन और पत्रकारिता

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महेंद्र नारायण सिंह यादव। मीडिया का काम सत्ता पर नजर रखना, उसकी मनमानी पर अंकुश लगाने की कोशिश करना, उसके गलत कार्यों को जनता के सामने लाना भी है। मानवाधिकार संरक्षण का वह महत्वपूर्ण कारक है। हालाँकि यह भी सही है कि मानवाधिकार खुद मीडिया के लिए भी जरूरी है। ...

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समकालीन वैश्विक मीडिया: राजनीतिक, सामाजिक और संस्कृतिक जीवन का मनोरंजनीकरण

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सुभाष धूलिया मीडिया उद्योग एक तरह के सांस्कृतिक और वैचारिक उद्योग हैं। इन उद्योगों पर नियंत्रण का अर्थ होता है किसी देश की राजनीति और संस्कृति पर नियंत्रण. दुनिया के अनेक देशों में अमेरिकी सांस्कृतिक आक्रमण को लेकर असंतोष पनप रहा है जिनमें केवल विकासशील देश ही नहीं  बल्कि यूरोप के अनेक विकसित  ...

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समकालीन वैश्विक मीडिया: मीडिया का निगमीकरण

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सुभाष धूलिया समकालीन मीडिया के निगमीकरण , केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण की प्रक्रियाएं एक साथ चल रही हैं। मीडिया संघटन एक तो खुद  व्यापारिक निगम बन गए हैं और दूसरी और पूरी तरह विज्ञापन उद्योग पर निर्भर हैं । एक ओर तो नई प्रौद्योगिकी और इंटरनेट ने किसी भी व्यक्ति विशेष ...

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समकालीन वैश्विक मीडिया: सूचना का अंत और मनोरंजन आगमन

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सुभाष धूलिया तानाशाहियों की तुलना में मुक्त समाजों में  सेंसरशिप    असीमित रूप से कही अधिक परिष्कृत और गहन होती है क्योंकि  इस से असहमति को चुप कराया जा सकता है और प्रतिकूल तथ्यों को छिपाया जा सकता है- जोर्ज ऑरवेल आज की दुनिया औपचारिक रूप से अधिक लोकतान्त्रिक है लेकिन फिर ...

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सोशल मीडिया एवं हिन्दी विमर्श

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–डॉ॰रामप्रवेश राय जिस प्रकार हमारी फिल्मों/सिनेमा मे स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार ‘एंटेरटेनमेंट’ का तड़का लगता है कुछ उसी प्रकार हिन्दी के बारे मे बात–चीत करते समय हिन्दी–अंग्रेज़ी की प्रतिस्पर्धा का भाव आ जाता है। ऐसा शायद इसलिए भी होता है कि अंग्रेज़ी और यूरोपीय भाषाएँ आधुनिकता के द्योतक के ...

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कार्पोरेट पत्रकारिता के युग में कार्पोरेट जासूसी

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– आनंद प्रधान (एसोशिएट प्रोफ़ेसर, भारतीय जनसंचार संस्थान ), लगता है कि भारतीय पत्रकारिता और पत्रकारों का समय कुछ अच्छा नहीं चल रहा है. जैसे ‘अच्छे दिन’ के बजाय उनके ‘बुरे दिन’ आ गए हों. पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिससे न सिर्फ पत्रकारिता की साख ...

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पब्लिक रिलेशन और मीडिया: कल, आज और कल

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दिलीप मंडल 
 पब्लिक रिलेशन वैसे तो पुरानी विधा है लेकिन आधुनिक कॉरपोरेट पब्लिक रिलेशन की शुरुआत 20वीं सदी के पहले दशक से हुई। पब्लिक रिलेशन का इतिहास लिखने वाले कई लोग आईवी ली को पब्लिक रिलेशन का जनक मानते हैं। कुछ इतिहास लेखक यह श्रेय एडवर्ड बर्नेस को देते ...

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समाचार: सिद्धांत और अवधारणा समाचार लेखन

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सुभाष धूलिया परंपरागत रूप से बताया जाता है कि समाचार उस समय ही पूर्ण कहा जा सकता है जब वह कौन, क्‍या, कब, कहां, क्‍यों, और कैसे सभी प्रश्‍नों या इनके उत्‍तर को लेकर लोगों की जिज्ञासा को संतुष्ट करता हो। हिंदी में इन्‍हें छह ककार के नाम से जाना ...

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टीवी मीडिया के न्यूज फॉर्मेट (पार्ट-3)

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संदीप कुमार। एंकर विजुअल/शॉट (Anchor VO, Anchor Shot, STD/VO) टीवी न्यूज मीडिया का लोकप्रिय और सबसे ज्यादा चलने वाला फॉर्मेट एंकर विजुअल (या एंकर शॉट, एंकर वीओ) होता है। इसे अलग-अलग न्यूज चैनलों में अलग-अलग नाम से भी जाना जाता है। कई चैनलों में एंकर विजुअल को STD/VO भी कहा ...

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भूमण्‍डलीकरण और सम्‍प्रेषण का संकट

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सच्चिदानन्‍द सिन्‍हा। त्रासदी के विवरणों के टीवी पर प्रसारण के तुरन्‍त बाद किसी सौन्‍दर्य प्रसाधन का विज्ञापन या ऐसी ही दूसरी प्रस्‍तुतियाँ मनुष्‍य के लिए त्रासद और आकर्षक जैसी अनुभूतियों का फर्क मिटा देती हैं। मनुष्‍य संवदेनहीन बन जाता है। लेखक कलाकार आदि की जवाबदेही ऐसे समय में कुछ बुनियादी ...

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खबर केवल नेपाल से रिश्ते का बिगड़ना है

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आशीष कुमार ‘अंशु’। भारतीय मीडिया का अर्थ नेपाल की नजर में वे सभी भारतीय खबरिया चैनल है, जो चौबीस घंटे सात दिन खबर देने का दावा करते हैं। इसमें अखबार और वेवसाइट शामिल नहीं है। इसलिए जब नेपाल में मीडिया के प्रति गुस्सा प्रकट करने की बात सामने आती है ...

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