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समकालीन वैश्विक मीडिया: मीडिया का निगमीकरण

सुभाष धूलिया

समकालीन मीडिया के निगमीकरण , केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण की प्रक्रियाएं एक साथ चल रही हैं।
मीडिया संघटन एक तो खुद  व्यापारिक निगम बन गए हैं और दूसरी और पूरी तरह विज्ञापन
उद्योग पर निर्भर हैं । एक ओर तो नई प्रौद्योगिकी और इंटरनेट ने किसी भी व्यक्ति विशेष को अपनी
बात पूरे अंतर्राद्गट्रीय समुदाय तक पहुंचाने का मंच प्रदान किया है, तो दूसरी ओर मुखयधारा मीडिया में
केंद्रीकरण की प्रक्रिया भी तेज हुई है। पूरे विश्व और लगभग हर देश के भीतर मीडिया का केंद्रीकरण हो रहा
है। एक ओर तो मीडिया का आकार विशालकाय  होता जा रहा है और दूसरी ओर इस पर स्वामित्व रखने
वाले निगमों की संखया कम होती जा रही है। पिछले कुछ दशकों से यह प्रक्रिया चल रही है और अनेक बड़ी
मीडिया कंपनियों ने छोटी मीडिया कंपनियों का अधिग्रहण कर लिया है। इसके अलावा कई मौकों पर बड़ी
– बड़ी कंपनियों के बीच विलय से भी मीडिया के केंद्रीकरण को ताकत मिली है।

आज वैश्विक संचार और सूचनातंत्र पर चंद विशालकाय बहुराष्ट्रीय मीडिया निगमों का प्रभुत्त्व है जिनमें
से अधिकांच्च अमेरिका में स्थित हैं। बहुराष्ट्रीय मीडिया निगम स्वयं अपने आप में व्यापारिक संगठन
तो हैं ही लेकिन इसके साथ ही ये सूचना-समाचार और मीडिया उत्पाद के लिए एक वैश्विक बाजार तैयार
करने और एक खास तरह के व्यापारिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए ही काम करते हैं। इन बहुराष्ट्रीय
निगमों के इस व्यापारिक अभियान में स्वायत पत्रकारिता और सांस्कृतिक मूल्यों की कोई अहमियत नहीं
होती। इस रुझान को आज राद्गट्रीय और अंतर्राष्टीय स्तर पर स्पष्ट रूप में देखा जा सकता है। मोटे तौर
पर यह कह सकते हैं कि वैश्विक मीडिया वैश्विक व्यापार के अधीन ही काम करता है और दोनों के
उद्देश्य एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

पूरी वैश्विक मीडिया व्यवस्था पर इस वक्त मुश्किल से नौ-दस मीडिया निगमों का प्रभुत्त्व है और इनमें से
अनेक निगमों का एक-तिहाई से भी अधिक कारोबार अपने मूल देशों से बाहर दूसरे देशों में होता है।
उदाहरण के लिए रूपर्ट मर्डोक की न्यूज कॉर्पोरेच्चन का अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, एशिया
और लैटिन अमेरिका में मीडिया के एक अच्छे-खासे हिस्से पर स्वामित्व है। जर्मनी के बर्टैल्समन्न निगम
का विश्व के 53 देशों की 600 कंपनियों में हिस्सेदारी है। विच्च्व की सबसे बड़ी मीडिया कंपनी एओएल
टाइम वार्नर भी अमेरिका की है और विश्व की दूसरी सबसे बडी कंपनी वियाकॉम कंपनी भी अमेरिका की
है जिनका विश्व के मीडिया बाजार के एक बडे हिस्से पर नियंत्रण है। सोनी निगम इलेक्ट्रॉनिक्स के
उत्पादों में नाम कमा चुका था लेकिन आज एक मीडिया कंपनी के रूप में दुनिया भर में इसकी एक हजार
सहयोगी कंपनियां काम कर रही हैं। इनके अलावा डिज नी वियाकॉम, एमटीवी, टेली-कम्युनिकेच्चन इंक,
यूनिवर्सल (सीग्राम), माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और याहू का भी एक बडे बाजार पर कब्जा है जो लगभग
दुनिया के हर देश में फैला हुआ है। अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक जैसी हथियार बनाने वाले निगम ने भी
मीडिया जगत में अपनी उपस्थिति दर्ज कर दी है और अमेरिका के एक प्रमुख समाचार चैनल एनबीसी पर
इसका नियंत्रण है।

इन विशालकाय  निगमों के बाद दूसरे स्तर के भी मीडिया संगठन हैं जिनका व्यापार दुनिया भर में बढ
रहा है। इस वक्त विश्व में मीडिया और मनोरंजन उद्योग सबसे तेजी से उभरते सैक्टरों में से एक है और
रोज नयी-नयी कंपनियां अपना नया और अलग मीडिया उत्पाद लेकर बाजार में कूद रही हैं। अधिकांच्च
बहुराष्ट्रीय मीडिया निगम संचार के क्षेत्र से जुडे कई क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जिनमें समाचारपत्र और
रेडियो और टेलीविजन चैनल के अलावा पुस्तक प्रकाशन , संगीत, मनोरंजन पार्क और अन्य तरह के
मीडिया और मनोरंजन उत्पाद शामिल हैं। प्रौद्योगिक क्रांति ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी
गतिविधियों के विस्तार के लिए अपार संभावनाओं को जन्म दिया है। आज अधिकांच्च बडे मीडिया
निगम दुनिया भर में अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।

अनेक निगमों ने या तो किसी देच्च में अपनी कोई सहयोगी कंपनी खोल ली है या किसी देश कंपनी के
साथ साझेदारी कर ली है। हमारे देश देश में ही अनेक बहुराष्ट्रीय मीडिया निगम के भारतीय संस्करण
बाजार में उपलब्ध हैं। ये निगम अपनी गतिविधियों के विस्तार के लिए स्थानीयकरण की ओर उन्मुख हैं
और स्थानीय जरूरतों और रुचियों के अनुसार अपने उत्पादों को ढाल रहे हैं। इस तरह भूमंडलीकरण
स्थानीयता का रूप ग्रहण कर रहा है और बहुराद्गट्रीय निगमों की यह स्थानीयता दरअसल उपभोक्त
मूल्यों और व्यापार संस्कृति को प्रोत्साहित करते हैं। मीडिया के इस तरह के केन्द्रीयकरण    से  के ऐसा
बाज़ार पैदा हुआ है जिसमें विविधता ख़त्म हो रही है और हर मीडिया में एक ही तरह के
समाचार (उत्पाद)  छाए रहतें हैं। आज विषयवस्तु का  बाज़ार मूल्य  अहम् नहीं  रह गया है बल्कि
इसे  बेचने  वाला तंत्र अधिक  भूमिका निभा रहा  है। आज का मीडिया एक ओर तो वैश्विक
व्यापार-वित्त के फैलाव के रास्तों का निर्माण कर रहा है और दूसरी और खुद भी एक व्यापार बन
गया है

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