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Monthly Archives: December 2015

टेलीविज़न जर्नलिज्म: रिपोर्टिंग के प्रकार

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शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन | टेलीविजन पर दर्शकों को सभी खबरें एक समान ही दिखती हैं, लेकिन रिपोर्टर के लिए ये अलग मायने रखती है। एक रिपोर्टर हर खबर को कवर नहीं करता। न्‍यूज कवर करने के लिए रिपोर्टर के क्षेत्र (विभाग) जिसे तकनीकी भाषा में ‘बीट’ कहा जाता है, ...

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पूर्वोत्तर भारत :​ आठ स्टेट एक ब्यूरो

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आशीष कुमार ‘अंशु’। चरखा डेवलपमेंट कम्यूनिकेशन नेटवर्क की ओर से 07 दिसम्बर को चरखा के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर मे एकसंगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत किरण अग्रवाल, विजया घोष, तस्नीम अहमदी ने दीप प्रजवलित कर की। इस अवसर पर विकास के ...

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अपने गिरेबान में भी झांकें टेलीविजन चैनल

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डॉ. देवव्रत सिंह। कई चैनलों में पत्रकारों को महीनों तक नाइट डयूटी पर रखा जाता है। इसी फार्मूले के मुताबिक कुछ लोगों को अच्छा वेतन दिया जाता है और बाकी अधिकांश स्टाफ को न्यूनतम वेतन पर रखा जाता है। वेतन 5000 रूपये से दो लाख तक हो सकता है। युवा ...

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क्या है समाचार, क्या नहीं?

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डॉ. सचिन बत्रा। अक्सर विद्यार्थियों को यह तो पढ़ाया जाता है कि समाचार क्या है लेकिन उन्हें यह समझने में खासी असुविधा होती है कि आखिर वह क्या है जो समाचार के चुनाव पैमाने के अनुरूप नहीं पाया जाता। यानि समाचार, क्या नहीं है उसे समझना बहुत ज़रूरी है। सच ...

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टेलीविज़न जर्नलिज्म: रिपोर्टिंग के प्रकार

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शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन। टेलीविजन पर दर्शकों को सभी खबरें एक समान ही दिखती हैं, लेकिन रिपोर्टर के लिए ये अलग मायने रखती है। एक रिपोर्टर हर खबर को कवर नहीं करता। न्‍यूज कवर करने के लिए रिपोर्टर के क्षेत्र (विभाग) जिसे तकनीकी भाषा में ‘बीट’ कहा जाता है, बंटे ...

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आपदा रिपोर्टिंगःचुनौती और सावधानी का क्षेत्र

disaster

प्रभात ओझा …. प्रिन्ट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में काम करने वाले सामान्य रिपोर्टर्स ही आम तौर पर आपदा के समय भी ड्यूटी पर लगा दिये जाते हैं। हाल के वर्षों में इससे अजीबोगरीब स्थिति बनी है। बाढ़ के पानी में भुक्तभोगी के कंधे पर बैठकर टीवी रिपोर्टर का पीटूसी (पीज ...

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इंटरनेट संचार, पब्लिक स्फ़ीयर और आभासी लोकतंत्र

शिवप्रसाद जोशी … अमेरिकी शिक्षाविद् और समाजशास्त्री जॉन फ़िस्के ने 1989 में प्रकाशित अपनी किताब “अंडरस्टैंडिंग पॉप्यूलर कल्चर” में मार्केट ताक़तों और उत्पादों की टकराहटों के जो नज़ारे खींचे थे वे कमोबेश बने हुए हैं और फ़िस्के ने उत्पादों के प्रति “मास” के रवैये के बारे में जो दृष्टिकोण बनाया ...

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खेल की अवधारणा‚ सिद्धान्त‚ खेल संस्थाएं‚ भारत में खेल पत्रकारिता के विविध चरण एवं भूमण्डलीकरण का प्रभाव

sports

डॉ0 सुमीत द्विवेदी… पी0एच0डी0‚ पत्रकारिता एवं जनसंचार सम्पादक‚ द जर्नलिस्ट – ए मीडिया रिसर्च जर्नल… खेल पत्रकारिता के लिए आवश्यक है कि एक खेल पत्रकार को खेल की अवधारणा‚ उसके सिद्धान्तों‚ सम्बन्धित खेल जिसकी वह रिपोर्टिंग या समीक्षा कर रहा है‚ उसके तकनीकी एवं अन्य विविध पक्षों की पूरी जानकारी हो। ...

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सोशल मीडिया की बढ़ती पैठ और स्त्री विमर्श

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पारुल जैन। सोशल मीडिया जैसे की नाम से ही ज़ाहिर है, एक ऐसा चैनल जो सोशल होने में मदद करे। मनुष्य जन्म से ही सामाजिक प्राणी है। वो समाज में रहता है और लोगों से संपर्क बनाना चाहता है। अगर हम एक परिवार की बात करें तो घर के पुरुष ...

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जयपुर साहित्य उत्सव: मीडिया में बिकता है, एंटरटेनमेन्ट, एंटरटेनमेन्ट, एंटरटेनमेन्ट

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आशीष कुमार ‘अंशु’ | जयपुर साहित्य उत्सव अपने ग्लैमर और विवादों की वजह से कई सालों से मीडिया में चर्चित रहा है। कभी सलमान रश्दी के आने की खबर की वजह से और कभी आशीष नंदी के बयान की वजह से। इस बार शोभा डे के एक सवाल पर करण ...

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