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Monthly Archives: January 2016

इंटरनेट : जीवन शैली में तेजी से बदलाव का दौर

internet

मुकुल श्रीवास्तव। इंटरनेट नित नयी तरक्की कर रहा है, इंटरनेट ने जबसे अपने पाँव भारत में पसारे हैं तबसे हर जगत में तरक्की के सिक्के गाड़ रहा है। इंटरनेट न सिर्फ संचार जगत में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सफल हुआ है बल्कि हमारे जीवन जीने के सलीके और जीवन शैली ...

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सोशल मीडिया: लिखिए अवश्य पर जोखिम समझते हुए, न्यायालय से तो मिली आजादी

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अटल तिवारी। उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बरकरार रखने वाला एक ऐतिहासिक फैसला दिया है। अपने इस फैसले के जरिए न्यायालय ने साइबर कानून की धारा 66 (ए) निरस्त कर दी है, जो सोशल मीडिया पर कथित अपमानजनक सामग्री डालने पर पुलिस को किसी भी शख्स ...

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परंपराओं से टकराती वेब मीडिया

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ओमप्रकाश दास। “यह कहा जा सकता है कि भारत में वेब पत्रकारिता ने एक नई मीडिया संस्कृति को जन्म दिया है। अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी पत्रकारिता को भी एक नई गति मिली है। अधिक से अधिक लोगों तक इंटरनेट की पहुंच हो जाने से यह स्पष्ट है कि वेब पत्रकारिता ...

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फोटोग्राफी : प्रोफेशनल कैमरों की कार्यप्रणाली

photojournalist

अमित कुमार।  फोटोग्राफ (छायाचित्र) वर्षों से पत्रकारिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहे हैं। समाचार पत्रों से लेकर ऑनलाइन न्यूज़ वेबसाइटों तक में छायाचित्रों (फोटोग्राफों) का प्रयोग न केवल प्रमुखता से किया जाता है बल्कि फोटोग्राफों के बिना इन माध्यमों की कल्पना भी मुश्किल है। हम सभी इस बात से अवगत हैं ...

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समाचार : अवधारणा और मूल्य

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सुभाष धूलिया | आधुनिक समाज में सूचना और संचार का महत्व बहुत बढ़ गया है। देश-दुनिया में जो कुछ हो रहा है उसकी अधिकांश जानकारियां हमें समाचार माध्यमों से मिलती हैं। यह भी कह सकते हैं कि हमारे प्रत्यक्ष अनुभव से बाहर की दुनिया के बारे में हमे अधिकांश जानकारियां ...

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जिंदगी के कुछ सबक को पहले ही पढ़ाए जाएं

classroom

उमेश चतुर्वेदी… वो किताबों में दर्ज था ही नहीं, सिखाया जो सबक जिंदगी ने…. मिशनरी भाव लेकर तमाम इतर प्रोफेशनल को छोड़ कर समाज बदलने की चाहत लेकर जिन्होंने पत्रकारीय कर्म को अख्तियार किया है, उन्हें पत्रकारीय जिंदगी में पग–पग पर जिस तरह के अनुभवों से दो–चार होना पड़ता है, ...

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आर्थिक पत्रकारिता: राजनीति पर अर्थव्यवस्था का बोलबाला

Photo Courtesy - fraserinstitute.org

शिखा शालिनी | एक दौर था जब देश में राजनीति और राजनीतिक व्यवस्था सबको नियंत्रित करती थी। लेकिन अब हालात कुछ और हैं अब राजनीति से ज्यादा अर्थव्यवस्था का बोलबाला है क्योंकि इससे सभी प्रभावित हो रहे हैं। यह बात दमदार तरीके से स्थापित हो रही है कि दुनिया के ...

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समाचार: सिद्धांत और अवधारणा – समाचार लेखन के सिद्धांत

worth-writing

सुभाष धूलिया पहले हमने पांच ‘डब्‍ल्‍यू’ और एक ‘एच’ यानी छह ककारों की चर्चा की है। दरअसल, समाचार लेखन में घटनाओं और इनसे संबंधित तथ्‍यों के चयन की प्रक्रिया का महत्‍वपूर्ण स्‍थान होता है। देश-दुनिया में रोज हजरों-लाखों घटनाएं घटती हैं लेकिन इनमें से कुछ ही समाचार बन पाती हैं। ...

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कैसे चलता है सिनेमा का कारोबार?

cinema

सुशील यति बंबई फिल्म उद्योग को लेकर बहुत सी छवियां हमारे मन-मष्तिष्क में बनी हुई है. मुंबई (बंबई) शहर और फिल्म उद्योग को लेकर एक धारणा यह भी है कि यह आपकी इच्छाओं और सपनों को पूरा करने वाला शहर है. ये शहर अपनी चमक-दमक के साथ ऐसे बहुत से ...

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स्टिंग ऑपरेशन के लिए खुफिया कैमरे का चुनाव

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डॉ. सचिन बत्रा | आज के दौर में किसी भी अनियमितता, गैरकानूनी काम, भ्रष्टाचार या षड़यंत्र को उजागर करने के लिए सुबूतों की ज़रूरत होती है। हमारे देश में मीडिया इसी प्रकार सुबूतों को जुटाने के लिए स्टिंग ऑपरेशन करता है और स्पाय यानी खुफिया कैमरों का इस्तेमाल कर गलत ...

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