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Monthly Archives: August 2016

कूप-जल नहीं, भाखा बहता नीर

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अकबर रिज़वी | भाषा सिर्फ हिन्दी, अँग्रेज़ी, उर्दू आदि ही नहीं होती, बल्कि हाव-भाव भी एक भाषा ही है। भाषा का कोई स्थाई मानक नहीं होता। ख़ास-तौर से जनभाषा न तो विशुद्ध साहित्यिक हो सकती है और न ही व्याकरण के कठोर नियमों से बांधी जा सकती है। जन-साधारण में ...

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एफ.एम. क्रांति से हुआ रेडियो का पुनर्जन्म

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डॉ. देवव्रत सिंह। रेडियो शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द रेडियस से हुई है। रेडियस का अर्थ है एक संकीर्ण किरण या प्रकाश स्तंभ जो आकाश में इलैक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगों द्वारा फैलती है। ये विद्युत चुंबकीय तरंगे संकेतों के रूप में सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ...

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नया मीडिया : नुकसान और निहितार्थ

New-Media

शिवप्रसाद जोशी। न्यू यॉर्कर में 1993 में एक कार्टून प्रकाशित हुआ था जिसमें एक कुत्ता कम्प्यूटर के सामने बैठा है और साथ बैठे अपने सहयोगी को समझाते हुए कह रहा है, “इंटरनेट में, कोई नहीं जानता कि तुम कुत्ते हो।” (जेन बी सिंगर, ऑनलाइन जर्नलिज़्म ऐंड एथिक्स, अध्याय एथिक्स एंड ...

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