Home / 2017 / March

Monthly Archives: March 2017

पेड न्यूज़ और निर्भीक पत्रकारिता का दौर

Paid-news

डॉ॰ राम प्रवेश राय। हर वर्ष 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। इस संदर्भ मे आयोजित अनेक गोष्ठियों और विचार विमर्श में पत्रकारिता के गिरते मूल्यों पर घोर चिंता भी व्यक्त की जाती है। पिछले वर्ष भी अनेक स्थानो पर गोष्ठियाँ आयोजित की गई ...

Read More »

डेडलाइन को ध्यान में रखकर लिखना

deadline

आलोक वर्मा | काम के साथ-साथ ही लिखते जाइए जब डेडलाइन सर पर हो तो टुकड़ो में लिखना सीखिए। जैसे-जैसे काम होता जाए आप स्टोरी लिखते जाएं। मान लीजिए कि आपने किसी से फोन पर अपनी स्टोरी के सिलसिले में कुछ पूछा है और दूसरी तरफ से थोड़ा समय लिया ...

Read More »

ग्रामीण पत्रकारिता: हर गांव एक खबर होता है

rural-journalism

डॉ. महर उद्दीन खां | भारत गांवों का देश है। शिक्षा के प्रसार के साथ अब गांवों में भी अखबारों और अन्य संचार माध्यमों की पहुंच हो गई है। अब गांव के लोग भी समाचारों में रुचि लेने लगे हैं। यही कारण है कि अब अखबारों में गांव की खबरों ...

Read More »

संचार के दायरे को तोड़ता सोशल मीडिया

social-media

विनीत उत्पल | सोशल मीडिया एक तरह से दुनिया के विभिन्न कोनों में बैठे उन लोगों से संवाद है जिनके पास इंटरनेट की सुविधा है। इसके जरिए ऐसा औजार पूरी दुनिया के लोगों के हाथ लगा है, जिसके जरिए वे न सिर्फ अपनी बातों को दुनिया के सामने रखते हैं, ...

Read More »

टीवी न्यूज ऐंकरिंग के लिए जरूरी हैं यह बातें

tv-studio

शालिनी जोशी,असिस्टेंट प्रोफेसर,मीडिया स्टडीज हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विवि,जयपुर न्यूज ऐंकर टीवी पर समाचारों को प्रस्तुत करता है और स्टुडियो डिस्कशंस संचालित करता है. टेलीविजन समाचार तैयार करने और उसके प्रसारण के लिये भले ही एक बड़ी टीम होती है लेकिन बड़ा श्रेय न्यूज ऐंकर को ही मिलता है. ...

Read More »

पीत पत्रकारिता : दाव पर पत्रकारीय सिद्धांतों की साख

yellow-journalism

राजेश कुमार पत्रकारिता अभिव्यक्ति का एक माध्यम है। जिसके जरिए समाज को सूचित, शिक्षित और मनोरंजित किया जाता है। पत्रकारिता के माध्यम से आने वाले किसी भी संदेश का समाज पर व्यापक असर पड़ता है, जिसके जरिए मानवीय व्यवहार को निर्देशित और नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में एक ...

Read More »

संसद में ख़बरें कैसे घूमती हैं?

Parliament-of-India-21

ओम प्रकाश दास… साठवें दशक में टाईम्स आफ इंडिया समूह के हिन्दी अखबार नवभारत टाईम्स के लिए एक अलग ब्यूरो का गठन किया गया। ब्यूरो बनाने के पीछे टाईम्स ग्रुप के अध्यॿ शाहू शांतिलाल जैन का तर्क था कि संसद और विभिन्न मंत्रालयों की अलग से और विशिष्ट रिपोर्टिंग के लिए ब्यूरो ...

Read More »

समाचार लेखन : कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे?

news_writing

सुभाष धूलिया। परंपरागत रूप से बताया जाता है कि समाचार उस समय ही पूर्ण कहा जा सकता है जब वह कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे सभी प्रश्नों या इनके उत्तर को लेकर लोगों की जिज्ञासा को संतुष्ट करता हो। हिंदी में इन्हें छह ककार ( Five W and ...

Read More »

साक्षात्कार लेना भी एक कला है…

interview

महेंद्र नारायण सिंह यादव। पत्रकारिता में साक्षात्कार लेना सबसे महत्वपूर्ण और सर्वाधिक इस्तेमाल में आने वाला कार्य है। साक्षात्कार औपचारिक हो सकता है, जो साक्षात्कार के रूप में सीधे ही प्रकाशित या प्रसारित किया जाता है, और अनौपचारिक भी हो सकता है, जिसके जरिए मिलने वाली जानकारी को पत्रकार अपनी ...

Read More »

समाचार, सिद्धांत और अवधारणा: समाचार क्‍या है?

thumbnail

सुभाष धूलिया समाचार क्‍या है? पत्रकारिता के उदभव और विकास के पूरे दौर में इस प्रश्‍न का सर्वमान्‍य उत्‍तर कभी किसी के पास नहीं रहा। आज प‍त्रकारिता और संपूर्ण और संपूर्ण मीडिया जगत की तेजी से बदलती तस्‍वीर से इस प्रश्‍न का उत्‍तर और भी जटिल होता जा रहा है। ...

Read More »

चुनाव-सर्वेक्षणों की होड़ में पिचकती पत्रकारिता

opinion-poll

उर्मिलेश | राजनीतिक दलों या नेताओं के जीतने-हारने या उनकी सीटों के पूर्वानुमान लगाने वाले ओपिनियन-पोल राजनीति और राजनेताओं के लिए कितने फायदेमंद या नुकसानदेह हैं, इस पर विवाद हो सकता है। लेकिन एक पत्रकार के रूप में मैं अपने अनुभव की रोशनी में बेहिचक कह सकता हूं कि चुनाव-अधिसूचना ...

Read More »

पत्रकारों का भविष्य और भविष्य की पत्रकारिता

social-media-tree

दिलीप मंडल।… सूचनाओं और समाचार का प्राथमिक स्रोत सोशल मीडिया बनता जा रहा है। फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन जैसे माध्यम अब बड़ी संख्या में लोगों के लिए वह जरिया बन चुके हैं, जहां उन्हें देश, दुनिया या पड़ोस में होने वाली हलचल की पहली जानकारी मिलती है। ऐसे लोग कई बार ...

Read More »