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Monthly Archives: May 2017

ब्रेकिंग न्यूज के बहाने…

breaking-news

उदय चंद्र सिंह | टीवी की दुनिया में खूब अजब-गजब होता है। कभी नोएडा को बंदर खा जाता हैतो कभी तेल लगाने के मुद्दे पर हैदराबाद में  सैकड़ों किसान गिरफ्तारी देते हैं । गजब तो तब हो गया जब एक न्यूज चैनल की  ब्रेकिंग न्यूज की पट्टी पर-  “हीथ्रो हवाई अड्डे पर विमान से ...

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ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म की ओर

close up of conference meeting microphones and businessman

मनोज कुमार | ‘ठोंक दो’ पत्रकारिता का ध्येय वाक्य रहा है और आज मीडिया के दौर में ‘काम लगा दो’ ध्येय वाक्य बन चुका है। ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म का यह बदला हुआ स्वरूप हम देख रहे हैं। कदाचित पत्रकारिता से परे हटकर हम प्रोफेशन की तरफ आगे बढ़ ...

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वर्किंग जर्नलिस्टर ऐक्ट  के दायरे में  कब आयेंगे टीवी पत्रकार ?

journalist

उदय चंद्र सिंह | देश में उदारीकरण का दौर शुरु होने के साथ हीं  तमाम उद्योग धंधों की तरह खबरों का बाजार भी खूब चमका । टेलीविजन न्यूज चैनलों की तो जैसे बाढ़ सी आ गई है ।  हर कोई यही कहता फिर रहा है कि टीवी मीडिया बहुत ‘ताकतवर’ ...

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आवाज़ का ही दूसरा नाम है प्रसारण

Radio-Jockey

हर्ष रंजन। अगर हम कहें कि आवाज़ का ही दूसरा नाम प्रसारण है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। आवाज़ ही प्रसारण के लिए सब कुछ है। प्रसारण की दुनिया में काम करने की पहली और आखिरी शर्त आवाज़ ही होती है। आपकी आवाज़ प्रसारण योग्य हो तभी रेडियो जॉकी या समाचार ...

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समकालीन हिन्‍दी मीडिया की चुनौतियां

Hindi-newspapers

प्रियदर्शन। हिन्‍दी और भाषाई मीडिया के लिए यह विडंबना दोहरी है। जो शासक और नीति-नियंता भारत है, वह अंग्रेजी बोलता है। इस अंग्रेजी बोलने वाले समाज के लिए साधनों की कमी नहीं है। वह इस देश की राजनीति चलाता है, वह इस देश में संस्‍कृति और साहित्‍य के मूल्‍य तय ...

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विजुअल मीडिया: गुणवत्‍ता से समझौता कभी न करें

visual media

मनोरंजन भारती | मैनें उन गिने चुने लोगों में से जिसने अपने कैरियर की शुरूआत टीवी से की। हां, आईआईएससी में पढ़ने के दौरान कई अखबारों के लिए फ्री लांसिंग जरूर की। लेकिन संस्‍थान से निकलते ही विनोद दुआ के परख कार्यक्रम में नौकरी मिल गई। यह कार्यक्रम दूरदर्शन पर ...

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आइडिएशन : मैं न्यूज कहां तलाशूं?

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आलोक वर्मा। ऐसा माना जाता है कि बच्चों और नौजवानों पर जितना असर उनकी आसपास की घटनाओं, स्कूल कालेजों या धार्मिक बातों का होता है, इससे भी कहीं ज्यादा असर उन पर टेलीविजन का होता है। इसलिए अगर आप टेलीविजन की दुनिया में आते हैं तो यूं समझ लीजिए कि ...

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हर ख़बर सच नहीं, हर सच ख़बर नहीं

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सुभाष धूलिया| आज यह कहा जाता है कि मानव सभ्यता सूचना युग में प्रवेश कर रही है। पिछले 50 वर्षों में संचार और सूचना के क्षेत्र में एक क्रांति आई है। आज दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली किसी घटना की जानकारी हमे चंद पलों में मिल जाती ...

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नए दौर की पत्रकारिता?

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अतुल सिन्हा। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि देश में साहित्य, संस्कृति, विकास से जुड़ी खबरें या लोगों में सकारात्मक सोच भरने वाले कंटेट नहीं दिखाए जा सकते? कौन सा ऐसा दबाव है जो मीडिया को नेताओं के इर्द गिर्द घूमने या फिर रेटिंग के नाम पर जबरन ‘कुछ भी’ ...

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कहाँ होती है असली ख़बर?

news

क़मर वहीद नक़वी। एक पत्रकार में सबसे बड़ा गुण क्या होना चाहिए? बाक़ी बातें तो ठीक हैं कि विषय की समझ होनी चाहिए, ख़बर की पकड़ होनी चाहिए, भाषा का कौशल होना चाहिए आदि-आदि। लेकिन मुझे लगता है कि एक पत्रकार को निस्सन्देह एक सन्देहजीवी प्राणी होना चाहिए, उसके मन ...

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क्या यही हिंदी पत्रकारिता का ‘स्वर्णयुग’ है?

Hindi-Journalism

– आनंद प्रधान (एसोशिएट प्रोफ़ेसर, भारतीय जनसंचार संस्थान ) क्या १८८ साल की भरी–पूरी उम्र में कई उतार–चढाव देख चुकी हिंदी पत्रकारिता का यह ‘स्वर्ण युग’ है? जानेमाने संपादक सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने बहुत पहले ८०–९० के दशक में ही यह एलान कर दिया था कि यह हिंदी पत्रकारिता का ‘स्वर्ण ...

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