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Monthly Archives: July 2017

व्‍यावसायिकता के विरुद्ध

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कुमार कौस्तुभ | मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि वर्तमान भारतीय पत्रकारिता सामाजिक दायित्‍व से शून्‍य है। प्रकाशित सामग्री में चटखारे और चापलूसी की ही प्रमुखता होती है। यह बात खास तौर से उन पत्र-पत्रिकाओं पर लागू होती है जिनके पीछे बड़ी-बड़ी थैलियां हैं। छोटी पत्रिकाएं अभी ...

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खबरों का खेल बनाम एजेंडा सेटिंग

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विनीत उत्पल | मालूम हो कि एजेंडा सेटिंग तीन तरीके से होता है, मीडिया एजेंडा, जो मीडिया बहस करता है। दूसरा पब्लिक एजेंडा जिसे व्यक्तिगत तौर पर लोग बातचीत करते हैं और तीसरा पॉलिसी एजेंडा जिसे लेकर पॉलिसी बनाने वाले विचार करते हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा ...

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कैसे शुरू करें विज्ञान लेखन?

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देवेंद्र मेवाड़ी। मैंने विज्ञान लेखन कैसे शुरू किया? अपने आसपास की घटनाओं को देखा, मन में कुतूहल हुआ, उनके बारे में पढ़ा, लगा कितनी रोचक बात है- मुझे दूसरों को भी बताना चाहिए। सर्दियों की शुरूआत में हमारे गांव का सारा आकाश प्रवासी परिंदों से भर जाता था। मां ने ...

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आसान नहीं आर्थिक मुद्दों की प्रोग्रामिंग

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अजय कुमार मिश्रा। राजनीतिक मामले हो या फिर आर्थिक अथवा सामाजिक मुद्दा, किसी भी टीवी प्रोग्राम के लिए विषयवस्तु अलग अलग हो सकती है लेकिन उसका व्याकरण कमोबेश एक सा होता है… किसी भी टीवी प्रोग्रामिंग के कान्सेप्ट पर निर्भर करता है कि आप कैसे उसको अमली जामा पहनाने के ...

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बड़ी खबर : निरंतरता को तोड़कर अचानक पेश की जाती है

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कुमार कौस्तुभ। मीडिया, खासकर समाचारों की दुनिया की शब्दावली में ‘बड़ी खबर’ जाना-पहचाना टर्म है। आमतौर पर इसे ‘हेडलाइन’ भी माना जाता है। लेकिन, ‘हेडलाइन’ और ‘बड़ी खबर’ की टर्मिनोलॉजी में कुछ बुनियादी फर्क है जिसे ‘बड़ी खबर’ पर चर्चा करने से पहले साफ कर देना जरूरी है। टीवी और ...

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ख़बरों का अद्भुत संसार, छवियां और यथार्थ

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सुभाष धूलिया। व्यवस्था के भीतर भी वस्तुपरक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक है कि सत्ता और पत्रकार के बीच एक ‘सम्मानजक दूरी’ बनाए रखी जाए। लेकिन आज जो रुझान सामने आ रहे हैं उसमें यह दूरी लगातार कम होती जा रही है और मीडिया पर सत्ता के प्रभाव में ...

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Where Does News Come From?

NewsSource

An idea is an angle about a subject that you believe will interest the readers of your newspaper. Without new ideas the editorial pages would be pretty dull. But where do ideas come from? And how do you find them? When you are lucky, an idea can sometimes find you. ...

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पपराज़ी पत्रकारिता की सीमाएं

cameras

गोविन्‍द सिंह। ‘पपराज़ी’ (फ्रेंच में इसे पापारात्सो उच्चारित किया जाता है) यह एक ऐसा स्वतंत्र फोटोग्राफर जो जानी-मानी हस्तियों की तस्वीरें लेता और पत्रिकाओं को बेचता है। ‘ पपराज़ी’ शब्‍द कहां से आया? ‘ पपराज़ी’ की उत्‍पत्ति महान इतालवी फिल्‍मकार फेरेरिको फेलिनी की 1960 में बनी फिल्‍म ‘ला डोल्‍से विटा’ ...

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World at your fingertips!

digital-world

Ashok Ogra | Television and Radio have been with us for nearly a century; print for more than 500 years. Yet in just last two decades, we have connected over two billion people through internet and communication devices. And by 2016 over half the world’s population will have the option ...

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संवेदनशीलता चाहिए पत्रकारिता में !

journalism

सुरेश नौटियाल। समाचार लिखते समय ऑब्जेक्टिव होना अत्यंत कठिन होता है, चूंकि पत्रकार की निजी आस्था और प्रतिबद्धता कहीं न कहीं अपना असर दिखाती हैं। इसी सब्जेक्टिविटी के कारण एक ही समाचार को दस संवाददाता दस प्रकार से लिखते हैं। पर, उद्देश्य और नीयत खबर को सही प्रकार और सार्वजनिक ...

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10 tips for reporting conflict and abuse

citi

What to avoid when reporting conflict and abuse? Reporting conflict and abuse is complex. Often the facts are not revealed in a way that offers the level of understanding the situation demands. The journalist needs to be sensitive, have an understanding of history, be aware of cultural issues, and put ...

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