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Monthly Archives: May 2018

अख़बारों से ग़ायब होता साहित्य

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फ़िरदौस ख़ान। साहित्य समाज का आईना होता है। जिस समाज में जो घटता है, वही उस समाज के साहित्य में दिखलाई देता है। साहित्य के ज़रिये ही लोगों को समाज की उस सच्चाई का पता चलता है, जिसका अनुभव उसे ख़ुद द नहीं हुआ है। साथ ही उस समाज की ...

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इंटरनेट : जीवन शैली में तेजी से बदलाव का दौर

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मुकुल श्रीवास्तव। इंटरनेट नित नयी तरक्की कर रहा है, इंटरनेट ने जबसे अपने पाँव भारत में पसारे हैं तबसे हर जगत में तरक्की के सिक्के गाड़ रहा है। इंटरनेट न सिर्फ संचार जगत में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सफल हुआ है बल्कि हमारे जीवन जीने के सलीके और जीवन शैली ...

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प्रभावी पत्रकारिता के लिए प्रिंटेड सामग्री अभी भी काफी प्रासंगिक

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राजदीप सरदेसाई समाचार4मी‍डिया ब्यूरो इन दिनों टीवी पर परोसी जा रही न्यू्ज और असली न्यू ज के बीच बहुत बड़ा अंतर है। न्यूतज के नाम पर कई चैनल कुछ भी दिखा रहे हैं। अधिकांश चैनल आपको शोरशराबा, एंटरटेनमेंट और ब्रेकिंग न्यूयज परोस रहे हैं। क्या वे घटना का संदर्भ, उसका ...

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10 tips for reporting conflict and abuse

citi

What to avoid when reporting conflict and abuse? Reporting conflict and abuse is complex. Often the facts are not revealed in a way that offers the level of understanding the situation demands. The journalist needs to be sensitive, have an understanding of history, be aware of cultural issues, and put ...

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