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Communication

विज्ञान के किसी भी विषय पर पुस्तक लिखिए- पेड़-पौधों, कीट-पतंगों, पशु-पक्षियों, धरती और आकाश के बारे में

देवेंद्र मेवाड़ी। आप विज्ञान लेखक बनेंगे तो देखिए लिखने के लिए कितनी संभावनाएं हैं। अच्छा लिखने के लिए लगातार लिखते रहना जरूरी है। आपके भीतर अगर लिखने का ऐसा जुनून है और उसे आप बनाए रखते हैं तो आप जरूर सफल होंगे और एक दिन सफल विज्ञान लेखक बनेंगे कॉमिक्सः ...

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एफ.एम. क्रांति से हुआ रेडियो का पुनर्जन्म

डॉ. देवव्रत सिंह। रेडियो शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द रेडियस से हुई है। रेडियस का अर्थ है एक संकीर्ण किरण या प्रकाश स्तंभ जो आकाश में इलैक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगों द्वारा फैलती है। ये विद्युत चुंबकीय तरंगे संकेतों के रूप में सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ...

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सोशल मीडिया की बढ़ती पैठ और स्त्री विमर्श

पारुल जैन। सोशल मीडिया जैसे की नाम से ही ज़ाहिर है, एक ऐसा चैनल जो सोशल होने में मदद करे। मनुष्य जन्म से ही सामाजिक प्राणी है। वो समाज में रहता है और लोगों से संपर्क बनाना चाहता है। अगर हम एक परिवार की बात करें तो घर के पुरुष ...

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मैगी की वापसी, लेकिन अब ग्राहकों के पास विकल्प हैं

आशीष कुंमार ‘अंशु’। मैगी की वापसी में बड़ी भूमिका अमेरिका की जनसंपर्क कंपनी एपको की मानी जा रही है। एपको से पहले जनसंपर्क का काम नेसले के लिए एपिक देखता था जब आप यह लेख पढ़ रहे हैं, मैगी के रास्ते की सारी बाधाएं एक एक कर दूर हो चुकी ...

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भाषा की बधिया वक्‍त के सामने बैठ जाती है

कुमार मुकुल। धूमिल ने लिखा है – भाषा की बधिया वक्‍त के सामने बैठ जाती है। इधर हिन्‍दी के लेखक, कवि और पत्रकार जिस तरह भाषा को बरत रहे हैं उसे देखकर उसकी बधिया बैठती नजर आती है। अपने एक वरिष्‍ट और प्रिय कवि के यहां भी जब एक कविता ...

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सोशल नेटवर्किंग के दौर में इंटरनेट बिन सून

विकास कुमार। बंगलुरू में रहने वाले एक दंपति अपने 18 वर्षीय बेटे को लेकर थोड़ा परेशान हैं। इनका बेटा आजकल इंटरनेट और सोशल नेटवर्किंग साईट्स पर हद से ज्यादा समय बिता रहा है। इस वजह से वह पढ़ाई में लगातार पीछे होता जा रहा है। सुबह नाश्ते की टेबल से ...

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भाषा की बधिया वक्‍त के सामने बैठ जाती है

कुमार मुकुल। धूमिल ने लिखा है – भाषा की बधिया वक्‍त के सामने बैठ जाती है। इधर हिन्‍दी के लेखक, कवि और पत्रकार जिस तरह भाषा को बरत रहे हैं उसे देखकर उसकी बधिया बैठती नजर आती है। अपने एक वरिष्‍ट और प्रिय कवि के यहां भी जब एक कविता ...

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‘साहित्य में तुम मेरी पीठ खुजाओ, मैं तुम्हारी खुजाता हूं… बेहद आम बात है

हिंदी अपराध लेखन में शीर्ष लेखकों में शुमार सुरेंद्र मोहन पाठक का मानना है कि लोकप्रिय साहित्य का पाठक अपने लेखक की हैसियत बनाता है, खालिस साहित्यकार इस हैसियत से वंचित हैं। विकास कुमार की उनसे खास बातचीत विकास कुमार आपने एक साक्षात्कार में बताया था कि उर्दू और बंग्ला ...

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कार्टून पत्रकारिता: आड़ी तिरछी रेखाओं के माध्यम से संप्रेषित होने वाला व्यंग्य

डॉ. सचिन बत्रा। कई बार सिर्फ चुटीला संवाद ही पर्याप्त नहीं होता उसे कहने वाला पात्र भी मनोरंजन का माध्यम होना चाहिए। जैसे कई बार नेताओं के कार्टून में लालू के सिर और कान के बाल, मनमोहन सिंह की पगड़ी, रामविलास पासवान की दाड़ी, नरेंद्र मोदी के होट और दाड़ी, ...

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सोशल मीडिया : स्वरूप और संभावनाएं

डॉ. सुशील उपाध्याय। मीडिया को मोटे तौर पर तीन हिस्सों में बांट सकते हैं-श्रव्य, दृश्य-श्रव्य और पठ्य। लेकिन, तकनीकी तौर पर इसे दो हिस्सों में ही बांटना चाहिए। वो है- लिखित मीडिया और दृश्यमान मीडिया मनुष्य के रूप में हमारी सबसे बड़ी खूबी है-पांच इंद्रियों के माध्यम से संचार करना। ...

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आदिवासी क्षेत्र की समस्याएं और मीडिया

स्वर्णताभ कुमार। हजारों वर्षों से जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले आदिवासियों को हमेशा से दबाया और कुचला जाता रहा है जिससे उनकी जिन्दगी अभावग्रस्त ही रही है। इनका खुले मैदान के निवासियों और तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले लोगों से न के बराबर ही संपर्क रहा है। केंद्र ...

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