Home / Communication (page 3)

Communication

जन संपर्क और प्रबंधन अध्याय 3

जयश्री एन. जेठवानी और नरेन्द्र नाथ सरकार। कार्य निर्बाध गति से चलता रहे, इसके लिए किसी भी संस्थान के अंदर अलग विशेष विभागों की आवश्‍यकता होती है। विभिन्‍न विभागों की भूमिका और कार्यों के आधार पर उनके काम को लाइन या स्टाफ के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। अभियांत्रिकी, ...

Read More »

जन सरोकारों को समझने की विधा जन सम्‍पर्क की परिभाषा

जयश्री एन. जेठवानी और नरेन्‍द्र नाथ सरकार। अब जब हम एक नयी सदी में प्रवेश कर गये हैं प्रबंधन के क्षेत्र में सबसे ज्‍यादा मांग रखने वाले विषयों में से एक जन-संपर्क का भी दायरा बढ़ा है। भारत में नब्‍बे का दशक जन-संपर्क से जुड़े लोगों के लिए काफी लाभकारी ...

Read More »

जनसंपर्क का भविष्य व चुनौतियां

देवाशीष प्रसून। इंटरनेट और मोबाइल जैसे नए माध्यमों को प्रादुर्भाव और इसके इस्तेमाल में हुई बढ़ोतरी के बाद जनसंपर्क का भविष्य भी ज़्यादा से ज़्यादा तकनीकोन्नमुख हो गया है। हमेशा से ज़रूरत यह रही है कि इस माध्यम के द्वारा जनसंपर्क के लिए भेजे जाने वाले लाखों ई-मेल संदेशों में ...

Read More »

…तो, क्या आप भी विज्ञान लेखक बनना चाहते हैं?

देवेंद्र मेवाड़ी। संपादकीयः अगर आप समाचारपत्र में काम करते हैं तो संपादक आपसे विज्ञान के किसी ज्वलंत या सामाजिक मुद्दे पर तत्काल संपादकीय लिखने की अपेक्षा कर सकते हैं। संपादकीय ऐसे मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी है। इससे समाचारपत्र द्वारा उस वैज्ञानिक विषय या घटना को दिए गए महत्व का भी ...

Read More »

संचार की बुलेट थ्योरी : अतीत एवं वर्तमान का पुनरावलोकन

डॉ॰ राम प्रवेश राय। जन संचार के सिद्धांतों को लेकर अक्सर ये बहस चलती रहती है कि ये पुराने सिद्धांत व्यवहार मे महत्वहीन साबित होते है और पत्रकारिता शिक्षण मे इन सिद्धांतों पर अधिक ज़ोर नहीं देना चाहिए। ऐसा ही एक सिद्धांत है बुलेट या हाइपोडर्मिक निडल थ्योरी इसको एक ...

Read More »

सोशल मीडिया : खबरों की चौपाल

धनंजय चोपड़ा। माना जा रहा है कि वर्ष 2040 में प्रिंट न्यूज पेपर दुनिया से विदा हो जायेगा। दुनिया का कोई भी कागजी अखबार तब तक नहीं बचेगा। सब कुछ डिजिटल हो चुका होगा। बीसवीं सदी के मध्य में संचार शास्त्री मार्शल मैक्लुहान ने घोषणा की थी कि संचार माध्यम ...

Read More »

जन सम्‍पर्क के सिद्धांत, क्या ये अवैज्ञानिक है?

जयश्री एन. जेठवानी, नरेन्‍द्र नाथ सरकार | क्‍या जन-सम्‍पर्क बिना किसी वैज्ञानिक सिद्धान्‍त पर आधारित तकनीक है? इसके आलोचक निश्चित रूप से हां कहेगें, लेकिन इस क्षेत्र से जुड़े पेशेवर और शिक्षाविद् इससे कतई सहमत नहीं होगें। 1920 के दशक में जब जन-सम्‍पर्क की अवधारणा शुरूआती स्‍तर पर थी तो एडवर्ड ...

Read More »

क्या है सोशल मीडिया की सामाजिकता?

शालिनी जोशी। यहां लोगों का, मस्तिष्क, मस्तिष्क से संचार करता है काला गोरे से नहीं, यहां कोई रंगभेद नहीं आदमी औरत से नहीं, यहां कोई लिंगभेद नहीं युवा बुज़ुर्ग से नहीं, यहां कोई उम्र सीमा नहीं छोटा लंबे से नहीं, ख़ूबसूरत साधारण से नहीं, यहां कोई रूप नहीं यहां सिर्फ़ ...

Read More »

संचार मॉडल: अरस्तू का सिद्धांत

डॉ. कुमार राज्यवर्धन। संचार की प्रक्रिया का अध्ययन एक विज्ञान है। यह प्रक्रिया जटिल है। विभिन्न विद्वानों ने विभिन्न तरीके से इस प्रक्रिया का वर्णन किया है। संचार की प्रक्रिया को बताने वाला चित्र मॉडल कहलाता है। इन मॉडलों से हमें संचार की गतिशील और सक्रिय प्रक्रिया समझने में आसानी ...

Read More »

संचार की सत्ता और संस्कृति

शिवप्रसाद जोशी। अंतरराष्ट्रीय संचार की मनोवृत्तियों की स्पष्ट झलक देखने और इसे समझने के लिए हाल के वर्षों का सबसे सटीक उदाहरण है वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति उगो चावेज़ का निधन। चावेज़ की मौत से जुड़ी ख़बरों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया और समाचार एजेंसियों के रुख़ का पता चलता है। इससे उस ...

Read More »

सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव और चुनावी राजनीति

शालिनी जोशी। चुनाव 2014 नये मीडिया और जनसंचार और पत्रकारिता के छात्रों और शोधकर्ताओं और पेशेवरों के लिए एक टर्निंग प्वायंट की तरह है, एक ऐसा पड़ाव जहां मीडिया के नये पैमानों को परखने का एक बेहतर मौक़ा मिल जाता है। इस बहाने ये भी पता चलता है कि नया ...

Read More »

सोशल मीडिया परस्पर संवाद का वेब आधारित गतिशील मंच

ओम प्रकाश दास। मेरी मीकेर की एक रिपोर्ट जो इंटरनेट ट्रेंड या कहें आदतों पर आधारित है, बताती है कि भारत 117 मिलियन स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के साथ दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। भारत से आगे सिर्फ चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका है। स्मार्ट फोन और इंटरनेट उपयोग ...

Read More »