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ग्रामीण पत्रकारिता: हर गांव एक खबर होता है

डॉ. महर उद्दीन खां | भारत गांवों का देश है। शिक्षा के प्रसार के साथ अब गांवों में भी अखबारों और अन्य संचार माध्यमों की पहुंच हो गई है। अब गांव के लोग भी समाचारों में रुचि लेने लगे हैं। यही कारण है कि अब अखबारों में गांव की खबरों ...

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समाचार लेखन : कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे?

सुभाष धूलिया। परंपरागत रूप से बताया जाता है कि समाचार उस समय ही पूर्ण कहा जा सकता है जब वह कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे सभी प्रश्नों या इनके उत्तर को लेकर लोगों की जिज्ञासा को संतुष्ट करता हो। हिंदी में इन्हें छह ककार ( Five W and ...

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मीडिया के सांप्रदायिक पूर्वाग्रहों की सैद्धांतिकी

  दिलीप ख़ान | 2010 में अमेरिका में गैलप वर्ल्ड रेलिजन सर्वे में दिलचस्प नतीजे सामने आए। सर्वे में अमेरिका के अलग-अलग प्रांतों के लोगों से धर्म और उनके अनुयाइयों के बारे में सवाल पूछे गए। 63 फ़ीसदी अमेरिकियों ने माना इस्लाम के बारे में उन्हें या तो ‘ज़रा भी ...

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समाचार : अवधारणा और मूल्य

सुभाष धूलिया | आधुनिक समाज में सूचना और संचार का महत्व बहुत बढ़ गया है। देश-दुनिया में जो कुछ हो रहा है उसकी अधिकांश जानकारियां हमें समाचार माध्यमों से मिलती हैं। यह भी कह सकते हैं कि हमारे प्रत्यक्ष अनुभव से बाहर की दुनिया के बारे में हमे अधिकांश जानकारियां ...

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आर्थिक पत्रकारिता: राजनीति पर अर्थव्यवस्था का बोलबाला

शिखा शालिनी | एक दौर था जब देश में राजनीति और राजनीतिक व्यवस्था सबको नियंत्रित करती थी। लेकिन अब हालात कुछ और हैं अब राजनीति से ज्यादा अर्थव्यवस्था का बोलबाला है क्योंकि इससे सभी प्रभावित हो रहे हैं। यह बात दमदार तरीके से स्थापित हो रही है कि दुनिया के ...

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समाचार: सिद्धांत और अवधारणा – समाचार लेखन के सिद्धांत

सुभाष धूलिया पहले हमने पांच ‘डब्‍ल्‍यू’ और एक ‘एच’ यानी छह ककारों की चर्चा की है। दरअसल, समाचार लेखन में घटनाओं और इनसे संबंधित तथ्‍यों के चयन की प्रक्रिया का महत्‍वपूर्ण स्‍थान होता है। देश-दुनिया में रोज हजरों-लाखों घटनाएं घटती हैं लेकिन इनमें से कुछ ही समाचार बन पाती हैं। ...

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पूर्वोत्तर भारत :​ आठ स्टेट एक ब्यूरो

आशीष कुमार ‘अंशु’। चरखा डेवलपमेंट कम्यूनिकेशन नेटवर्क की ओर से 07 दिसम्बर को चरखा के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर मे एकसंगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत किरण अग्रवाल, विजया घोष, तस्नीम अहमदी ने दीप प्रजवलित कर की। इस अवसर पर विकास के ...

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क्या है समाचार, क्या नहीं?

डॉ. सचिन बत्रा। अक्सर विद्यार्थियों को यह तो पढ़ाया जाता है कि समाचार क्या है लेकिन उन्हें यह समझने में खासी असुविधा होती है कि आखिर वह क्या है जो समाचार के चुनाव पैमाने के अनुरूप नहीं पाया जाता। यानि समाचार, क्या नहीं है उसे समझना बहुत ज़रूरी है। सच ...

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खेल की अवधारणा‚ सिद्धान्त‚ खेल संस्थाएं‚ भारत में खेल पत्रकारिता के विविध चरण एवं भूमण्डलीकरण का प्रभाव

डॉ0 सुमीत द्विवेदी… पी0एच0डी0‚ पत्रकारिता एवं जनसंचार सम्पादक‚ द जर्नलिस्ट – ए मीडिया रिसर्च जर्नल… खेल पत्रकारिता के लिए आवश्यक है कि एक खेल पत्रकार को खेल की अवधारणा‚ उसके सिद्धान्तों‚ सम्बन्धित खेल जिसकी वह रिपोर्टिंग या समीक्षा कर रहा है‚ उसके तकनीकी एवं अन्य विविध पक्षों की पूरी जानकारी हो। ...

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मानवाधिकार उल्लंघन और पत्रकारिता

महेंद्र नारायण सिंह यादव। मीडिया का काम सत्ता पर नजर रखना, उसकी मनमानी पर अंकुश लगाने की कोशिश करना, उसके गलत कार्यों को जनता के सामने लाना भी है। मानवाधिकार संरक्षण का वह महत्वपूर्ण कारक है। हालाँकि यह भी सही है कि मानवाधिकार खुद मीडिया के लिए भी जरूरी है। ...

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पब्लिक रिलेशन और मीडिया: कल, आज और कल

दिलीप मंडल 
 पब्लिक रिलेशन वैसे तो पुरानी विधा है लेकिन आधुनिक कॉरपोरेट पब्लिक रिलेशन की शुरुआत 20वीं सदी के पहले दशक से हुई। पब्लिक रिलेशन का इतिहास लिखने वाले कई लोग आईवी ली को पब्लिक रिलेशन का जनक मानते हैं। कुछ इतिहास लेखक यह श्रेय एडवर्ड बर्नेस को देते ...

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समाचार: सिद्धांत और अवधारणा समाचार लेखन

सुभाष धूलिया परंपरागत रूप से बताया जाता है कि समाचार उस समय ही पूर्ण कहा जा सकता है जब वह कौन, क्‍या, कब, कहां, क्‍यों, और कैसे सभी प्रश्‍नों या इनके उत्‍तर को लेकर लोगों की जिज्ञासा को संतुष्ट करता हो। हिंदी में इन्‍हें छह ककार के नाम से जाना ...

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