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संपादक आपसे विज्ञान के किसी मुद्दे पर तत्काल संपादकीय लिखने को कहे तो ?

देवेंद्र मेवाड़ी | विज्ञान के क्षेत्र में बहुत कुछ ऐसा होता रहता है जिस पर वक्र दृष्टि से बात की जा सकती है ताकि वैज्ञानिकों और वैज्ञानिक नीतिकारों को जगाया जा सके। इसलिए इस विधा में लिखने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, वैज्ञानिक नीतियों और वैज्ञानिक वर्ग के आचार–व्यवहार पर सीधी ...

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अनुवाद एक अनबूझ और खतरों से भरी शैली

स्वतंत्र मिश्र।… मूल रचनाकार अपनी रौ में लिखता जाता है, उस पर कोई बंदिश नहीं होती। लेकिन अनुवादक को रेलगाड़ी की तरह पटरी पर चलना पड़ता है ‘प्रकाशक प्रति शब्द 10 या 15 पैसे देता है। इसके बाद आप उम्मीद करें कि बढ़िया अनुवाद हो जाए। क्या यह संभव है? ...

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नया पत्रकार, नई पत्रकारिता और नई हो गयी है पत्रकारिता शिक्षा : सब बदल गया

संजय कुमार। इसी देश में कभी अखबार का मकसद समाज-देश के प्रति समर्पण का था जो आज बाजार का हिस्सा बन गया है। जो खबरें समाज- देश- व्यवस्था-सत्ता को जगाने के लिए लिखी जाती थीं, जिन खबरों का सामाजिक सरोकार था, आज वही खबरें बेची जा रही हैं। सामाजिक सरोकार ...

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ताक में पत्रकारिता, तकनीकी का दौर

मनोज कुमार। साल 1826, माह मई की 30 तारीख को ‘उदंत मार्तंड’ समाचार पत्र के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता का श्रीगणेश हुआ था। पराधीन भारत को स्वराज्य दिलाने की गुरुत्तर जवाबदारी तब पत्रकारिता के कांधे पर थी। कहना न होगा कि हिन्दी पत्रकारिता ने न केवल अपनी जवाबदारी पूरी ...

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सम्पादन : खबर अखबारी कारखाने का कच्चा माल होती है

डॉ. महर उद्दीन खां। रिपोर्टर समाचार लिखते समय उन सब बातों पर ध्यान नहीं दे पाता जो अखबार के और पाठक के लिए आवश्‍यक होती हैं। खबर को विस्तार देने के लिए कई बार अनावश्‍यक बातें भी लिख देता है। कई रिपोर्टर किसी नेता के भाषण को जैसा वह देता ...

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प्राकृतिक आपदा की रिपोर्टिंग : संवेदनशीलता और समझदारी नहीं, सनसनी और शोर ज्यादा

आनंद प्रधान। भारतीय न्यूज मीडिया खासकर न्यूज चैनल एक बार फिर गलत कारणों से अंतर्राष्ट्रीय सुर्ख़ियों में हैं। 25 अप्रैल को नेपाल में आए जबरदस्त भूकंप के बाद वहां कवरेज करने पहुंचे भारतीय न्यूज मीडिया खासकर न्यूज चैनलों के एक बड़े हिस्से के असंवेदनशील और कई मामलों में गैर जिम्मेदाराना ...

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हैल्थ रिपोर्टिंगः एक चुनौतीपूर्ण कार्य

रोशन मस्ताना। नित नए बदलते परिवेश व तकनीक के साथ ही पत्रकारिता का स्वरूप भी बदला है । आज के परिवेश में समाचार बिजली की गति के साथ एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच रहा है। जहां आज विश्व में मुद्रित समाचार पत्रों का चलन कम हुआ है । ...

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क्या पत्रकारिता साहित्य की उपेक्षा कर रही है?

गोविंद सिंह। साहित्य और पत्रकारिता के बीच एक अटूट रिश्ता रहा है। एक ज़माना वह था जब इन दोनों को एक-दूसरे का पर्याय समझा जाता था। ज्यादातर पत्रकार साहित्यकार थे और ज्यादातर साहित्यकार पत्रकार। पत्रकारिता में प्रवेश की पहली शर्त ही यह हुआ करती थी कि उसकी देहरी में कदम ...

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पत्रकारीय लेखन के प्रकार : तथ्य से विचार तक

सुभाष धूलिया। तथ्य, विश्लेषण और विचार समाचार लेखन का सबसे पहला सिद्धांत और आदर्श यह है कि तथ्यों से कोई छेड़छाड़ न की जाए। एक पत्रकार का दृष्टिïकोण तथ्यों से निर्धारित हो। तथ्यात्मकता, सत्यात्मकता और वस्तुपरकता में अंतर है। तथ्य अगर पूरी सच्चाई उजागर नहीं करते तो वे सत्यनिष्ठï तथ्य ...

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कोर्ट रिपोर्टिंग : बेहद सतर्क रहने की जरूरत

अनूप भटनागर। न्‍यायपालिका और इसकी कार्यवाही से जुड़ी छोटी बड़ी सभी सभी खबरों में नेताओं, नौकरशाहों और कार्पोरेट जगत के लागों की ही नहीं बल्कि आम जनता की भी हमेशा से ही गहरी दिलचस्‍पी रही है। महांत्‍मा गांधी की हत्‍या से लेकर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय द्वारा इन्दिरा गांधी का चुनाव ...

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क्राइम रिपोर्टिंग : 24 x 7 x 365 दिन : चाक चौबंद

इंद्र वशिष्ठ। अपराध की खबर सिर्फ किसी वारदात की सूचना भर नहीं होती है अपराध की खबर लोगों को सतर्क और जागरूक करती है। अपराधी वारदात के कौन से तरीके अपना कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं इसकी जानकारी अपराध के समाचारों से मिलती है। लोग यदि अपराध ...

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उग्रवाद की रिपोर्टिंग में अटूट लगन, अनुशासन जरूरी

इरा झा। उग्रवाद प्रभावित इलाकों में रिपोर्टिंग के लिए संयम, कल्‍पनाशीलता, धैर्य, जी-तोड़ मेहनत और अटूट लगन की आवश्‍यकता होती है। इनमें सामान्‍य खबरों की तरह कुछ भी और कभी भी नहीं लिखा जा सकता। यह काम बेहद जोखिम भरा है, लिहाजा इस वास्‍ते सावधानी और तथ्‍यों तथा स्रोतों की ...

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