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Radio & TV Journalism

टेलीविज़न पत्रकारिता: ख़बर कई आंखों और हाथों से गुजरते हुए पहुंचती है टीवी स्क्रीन तक

नीरज कुमार। वरिष्ठ टीवी पत्रकार रवीश कुमार बताते हैं कि जब उन्होंने एनडीटीवी ज्वाइंन किया तो चैनल के स्टूडियो में आकर उन्हें लगा कि वो जैसे नासा में आ गए हैं… रवीश कुमार के अनुभव का जिक्र उन युवाओं के लिए हैं, जो टीवी पत्रकार बनना चाहते हैं। लेकिन, न्यूज ...

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टीवी न्यूज का पर्दा: खबर लिखना किसी बढ़ई का कुर्सी या एक मेज बनाने जैसा

आलोक वर्मा। खबर को अगर आम लोगों के बीच की आम भावनाओं में डालकर आप लिख सकें तो आपकी खबर का असर बढ़ जाएगा। देखिए खबरों में भी कहानियां ही होती हैं- घर वापसी की खबर, जीत की खबर, हार की खबर, मुश्किलों की खबर- ये सब खबरें कहीं न ...

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जानिए क्या होती हैं टीवी न्यूज़ हेडलाइंस?

संदीप कुमार टीवी न्यूज का फॉर्मेट, प्रिंट मीडिया के मुकाबले बिल्कुल अलग होता है। यहां शब्दों, कॉलम, पेज में बात नहीं होती बल्कि फ्रेम्स, सेकंड्स, मिनट्स का खेल होता है। प्रिंट में कहा जाता है कि इस खबर को दो कॉलम में ले लो, सिंगल कॉलम में रख लो, तीन ...

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ब्रेकिंग न्यूज के बहाने…

उदय चंद्र सिंह टीवी की दुनिया में खूब अजब-गजब होता है। कभी नोएडा को बंदर खा जाता हैतो कभी तेल लगाने के मुद्दे पर हैदराबाद में  सैकड़ों किसान गिरफ्तारी देते हैं । गजब तो तब हो गया जब एक न्यूज चैनल की  ब्रेकिंग न्यूज की पट्टी पर-  “हीथ्रो हवाई अड्डे पर विमान से ...

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चैनलों की शेरचाल या भेड़चाल

प्रियदर्शन एक जंगल है, एक इंसान है और कई शेर हैं। शेर इन्सान के साथ खेल रहे हैं। इतने लाड़ से कि यह शख्से उनके बाजुओं, पंजों और पांवों के बीच मुश्किल से दिखाई पड़ रहा है। शाम चार बजे के आसपास एक टीवी चैनल में टिमटिमाता है यह दृश्यर, ...

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रेडियो समाचार प्रस्तुति : संकलन से लेकर वाचन तक

महेंद्र नारायण सिंह यादव। आज के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के युग में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से सामान्य तात्पर्य टीवी चैनल ही हो गया है, लेकिन वास्तव में रेडियो भी इसका अभिन्न प्रकार है। सच तो यह है कि टीवी चैनलों का युग शुरू होने से पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का मतलब रेडियो ही ...

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आसान नहीं आर्थिक मुद्दों की प्रोग्रामिंग

अजय कुमार मिश्रा। राजनीतिक मामले हो या फिर आर्थिक अथवा सामाजिक मुद्दा, किसी भी टीवी प्रोग्राम के लिए विषयवस्तु अलग अलग हो सकती है लेकिन उसका व्याकरण कमोबेश एक सा होता है… किसी भी टीवी प्रोग्रामिंग के कान्सेप्ट पर निर्भर करता है कि आप कैसे उसको अमली जामा पहनाने के ...

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टीवी रिपोर्टिंग सबसे तेज, लेकिन कठिन और चुनौती भरा काम

शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन | पत्रकारिता में टीवी रिपोर्टिंग आज सबसे तेज, लेकिन कठिन और चुनौती भरा काम है। अखबार या संचार के दूसरे माध्‍यमों की तरह टीवी रिपोर्टिंग आसान नहीं। टेलीविजन के रिपोर्टर को अपनी एक रिपोर्ट फाइल करने के लिए लम्‍बी मशक्‍कत करनी पड़ती है। रिपोर्टिंग के लिए ...

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लोकतन्‍त्र में मीडिया के खतरे

पुण्‍य प्रसून वाजपेयी | लोकतन्‍त्र का चौथा खम्‍भा अगर बिक रहा है तो उसे खरीद कौन रहा है? और चौथे खम्‍भे को खरीदे बगैर क्‍या सत्‍ता तक नहीं पहुँचा जा सकता है? या फिर सत्‍ता तक पहुँचने के रास्‍ते में मीडिया की भूमिका इतनी महत्‍वपूर्ण हो चुकी है कि बगैर ...

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ब्रेकिंग न्यूज के बहाने…

उदय चंद्र सिंह | टीवी की दुनिया में खूब अजब-गजब होता है। कभी नोएडा को बंदर खा जाता हैतो कभी तेल लगाने के मुद्दे पर हैदराबाद में  सैकड़ों किसान गिरफ्तारी देते हैं । गजब तो तब हो गया जब एक न्यूज चैनल की  ब्रेकिंग न्यूज की पट्टी पर-  “हीथ्रो हवाई अड्डे पर विमान से ...

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टेलीविज़न प्रोडक्शन: कल्पनाओं को हक़ीकत में बदलने का रास्ता

ओमप्रकाश दास। टेलीविज़न प्रोडक्शन की पटकथा यानी स्क्रिप्ट ही वह हिस्सा है जो विचारों और किसी कहे जाने वाली कहानी को एक ठोस रूप देता है। लेकिन प्रोडक्शन के लिहाज़ से पटकथा में आधारभूत अंतर उसके विषय को लेकर होता है। उदाहरण के लिए किसी काल्पनिक कहानी की स्थिति में ...

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टेलीविज़न जर्नलिज्म: नए दौर में स्क्रिप्टिंग और पैकेजिंग की चुनौतियां

अतुल सिन्हा | टेलीविज़न में स्क्रिप्टिंग को लेकर हमेशा से ही एक असमंजस की स्थिति रही है। अच्छी स्क्रिप्टिंग कैसे हो, कौन सी ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जाए जो दर्शकों को पसंद आए और भाषा के मानकों पर कैसी स्क्रिप्ट खरी उतरे, इसे लेकर उलझन बरकरार है। हम लंबे ...

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