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Contemporary Issues

नव पत्रकारों के लिए विशेष

भगवती प्रसाद डोभाल। पत्रकारिता का पेशा अपनाने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देने की आवश्‍यकता है। कुछ वर्षों पूर्व पत्रकारिता के षिक्षण संस्थान बहुत कम थे। या कहें कि इतने बड़े देश और उसकी आवादी के हिसाब से पत्रकारिता शिक्षण संस्थान ना के बराबर थे। सहत्तर के दशक में ...

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स्टिंग ऑपरेशन: घात लगाकर सुबूत जुटाना

डॉ. सचिन बत्रा। स्टिंग ऑपरेशन को घात पत्रकारिता या डंक पत्रकारिता भी कहा गया है। दरअसल घात पत्रकारिता खोजी पत्रकारिता की कोख से ही निकली है लेकिन इसमें दस्तावेज से अधिक दृश्य या फोटो का विशेष महत्व होता है क्योंकि घात पत्रकारिता में दृश्यों को सुबूत की तरह इस्तेमाल किया ...

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सावधान रहिए साइबर हमलावरों से

मुकुल श्रीवास्तव | कैस्परस्की की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार ग्रैबिट नामके एक वाइरस अटैक ने छोटी और मझोली व्यवसायिक कंपनियों के दस हजार से ज्यादा फाइलें चुरा लीं इनमें से ज्यादातर कम्पनियाँ थाईलेंड ,भारत और अमेरिका में स्थित हैं जो केमिकल ,नैनो टेक्नोलोजी ,शिक्षा ,कृषि ,मीडिया और निर्माण के ...

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फोटोग्राफी में ऐपर्चर की भूमिका

अमित कुमार & पूनम गौड़ | ऐपर्चर लेंस में स्थित वह दरवाजा / छिद्र है जिससे होकर प्रकाश की किरणें कैमरे के अन्दर प्रवेश करती हैं. इस दरवाजे / छिद्र के आकार को फोटोग्राफर अपनी आवश्यकता के अनुसार परिवर्तित कर सकता है. ऐपर्चर फोटोग्राफी में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ...

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मीडिया, मिशन और मुनाफे की जिद

धनंजय चोपड़ा। समय बदला, समाज बदला, सोच बदली और इन सबके साथ पत्रकारिता के सरोकार भी बदले। मिशन को खूंटी पर टांग कर पत्रकारिता के अधिकांश अलम्बरदार पहले मार्केट और फिर मुनाफे की दौड़ और आगे निकल जाने की होड़ में शामिल हो गये। मार्केट, मनी, मसल्स और मुनाफे के ...

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विज्ञान का प्रसार और मीडिया की सहभागिता

रश्मि वर्मा। विज्ञान हमारे जीवन के हर पहलू से जुड़ा है। आज विज्ञान ने न केवल मानव जीवन को सरल व सुगम बनाया है अपितु भविष्य के अगत सत्य को खोजने का साहस भी दिया है। प्रकृति के रहस्यों को समझने के लिए जहां विज्ञान एक साधन बनता है वहीं ...

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मीडिया विकास से विकास तक

डॉ. राजेश कुमार। ऐसी आम धारणा है कि विकास का सीधा असर व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र के विकास पर होता है। इसे m 4 D (Media for Development) या C 4 D (Communication for Development) के रूप में कई शोध लेखों में परिभाषित किया गया है (मेलकोट एवं स्टीव, 2001)। ...

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24 फ्रेम : संयोजन के मूल सिद्धान्त

आकांक्षा शर्मा। वीडियो और फिल्म मेकिंग नई उंचाईयों तक पहुँच चुका है। तकनीक में प्रतिदिन इज़ाफ़ा हो रहा है और हर रोज़ बेहतर कैमरे ईजाद किए जा रहे हैं। परन्तु यह समझना बहुत जरुरी है कि इसकी शुरुआत कहां से और कैसे हुई। फोटोग्राफी के ईजाद होने के तक़रीबन सात ...

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…सवाल ये कि हम पत्रकार बनें ही क्यों?

महेंद्र नारायण सिंह यादव। अगर आप पत्रकारिता कर रहे हैं या पत्रकारिता के क्षेत्र में आना चाहते हैं तो एक सवाल का सामना आपको कहीं न कहीं ज़रूर करना पड़ा होगा या पड़ सकता है कि आप पत्रकार क्यों बनना चाहते हैं। आखिर आप अपने सामने मौजूद तमाम आकर्षक पेशों ...

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पीत पत्रकारिता : दांव पर पत्रकारीय सिद्धांतों की साख

राजेश कुमार। पत्रकारिता अभिव्यक्ति का एक माध्यम है। जिसके जरिए समाज को सूचित, शिक्षित और मनोरंजित किया जाता है। पत्रकारिता के माध्यम से आने वाले किसी भी संदेश का समाज पर व्यापक असर पड़ता है, जिसके जरिए मानवीय व्यवहार को निर्देशित और नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में एक ...

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हिन्दी सिनेमा की भाषा के विभिन्न आयाम

सुशील यती। हिंदी ‘पॉपुलर’ सिनेमा मुख्य तौर पर ‘नरेटीव’ सिनेमा है, जिसमे कहानी महत्वपूर्ण होती है। दूसरे शब्दों में कहे तो विभिन्न ‘प्रॉडक्शन’ तकनीक, कैरेक्टर (किरदार), और कहानी के विभिन्न तत्व मिलकर एक कथानक (नरेटीव) का निर्माण करते है, जिसे सिनेमा की भाषा मे ‘नरेटीव’ कहा जाता है। फिल्म कथानक ...

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मीडिया  का व्यापारीकरण: पाठक-दर्शक बने सिर्फ उपभोक्ता

कपिल शर्मा | बात साल 2007 में दिल्ली के दरियागंज के सर्वोदय राजकीय विधालय में सेक्स रैकेट चलाने के झूठे स्ट्रींग ऑपरेशन से प्रेसमीडिया ट्रायल की शिकार महिला शिक्षिका की हो या 2011-12 में नीरा राडिया टेप के खुलासों के बाद बड़े प्रेस मीडिया घरानों की विश्वसनीयता पर खड़े हुए ...

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