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Contemporary Issues

एक सेलिब्रिटी की मौत पर TRP की दौड़ में लगे चैनलों ने गिराया पत्रकारिता का स्तर

  सुधीर चौधरी   इस बार श्रीदेवी को लेकर इतनी आलोचना हो गई थी कि एक बारगी सबको लग रहा था कि कहीं सोशल मीडिया की आलोचना टीआरपी ना खा जाए। लेकिन बीते गुरुवार को सुबह जैसे ही टीआरपी आई, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के दिग्गज हैरान रह गए। इतना बड़ा उलटफेर पिछले ...

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INTRODUCTION TO COMMUNICATION RESEARCH

Prof. Devesh Kishore Makhanlal Chaturvedi University of journalism, Bhopal, Research Department, Emeritus “If we knew what it was we were doing, it would not be called research, would it?” – Albert Einstein LEARNING OBJECTIVES After having studied this chapter you should be able to : Define research and explain its ...

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हिन्दी पत्रकारिता में अनुवाद धर्म

प्रियदर्शन ‘फेबुलस फोर’ को हिन्दीध में क्या लिखेंगे? ‘यूजर फ्रेंडली’ के लिए क्यों शब्दफ इस्तेकमाल करना चाहिए? क्या ‘पोलिटिकली करेक्ट ‘ के लिए कोई कायदे का अनुवाद नहीं है? ऐसे कई सवालों से इन दिनों हिंदी पत्रकारिता रोज जूझ रही है। अक्सरर उसे बिल्कु ल सटीक अनुवाद नहीं मिलता और ...

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पूंजी की पत्रकारिता

प्रियदर्शन हिन्दी पत्रकारिता की दुनिया इन दिनों हलचलों से भरी है। जो कभी छोटे और मझोले अखबार कहलाते थे, उनके कई-कई संस्क रण दिखाई पड़ रहे हैं। वे अपने राज्योंख और जिलों की सीमाएं लांघ रहे हैं और दूर-दराज के इलाकों में फैल-पसर रहे हैं। कई जगहों पर वे राष्ट्री ...

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चैनलों की शेरचाल या भेड़चाल

प्रियदर्शन एक जंगल है, एक इंसान है और कई शेर हैं। शेर इन्सान के साथ खेल रहे हैं। इतने लाड़ से कि यह शख्से उनके बाजुओं, पंजों और पांवों के बीच मुश्किल से दिखाई पड़ रहा है। शाम चार बजे के आसपास एक टीवी चैनल में टिमटिमाता है यह दृश्यर, ...

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विभाजित दुनिया, विखंडित मीडिया

समकालीन मीडिया परिदृश्य विभाजित दुनिया, विखंडित मीडिया सुभाष धूलिया समकालीन मीडिया परिदृश्य अपने आप में अनोखा और बेमिसाल है। जनसंचार के क्षेत्र में जो भी परिवर्तन आए और जो आने जा रहे है उनको लेकर कोई भी पूर्व आकलन न तो किया जा सका था और ना ही किया जा ...

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अतुल माहेश्वरी: विशाल व्यक्तित्व को सातवीं पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि

आज अतुल माहेश्वरी की सातवीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन, साल 2011 को वह हम सबको अचानक छोड़कर चले गए थे। यह आलेख उनकी यादों को समर्पित करते हुए, 2011 में लिखा गया था। उनकी याद में 2011 में अनुराग बत्रा, चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ, एक्सचेंज4मीडिया समूह द्वारा लिखा गया ...

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कूप-जल नहीं, भाखा बहता नीर

अकबर रिज़वी | भाषा सिर्फ हिन्दी, अँग्रेज़ी, उर्दू आदि ही नहीं होती, बल्कि हाव-भाव भी एक भाषा ही है। भाषा का कोई स्थाई मानक नहीं होता। ख़ास-तौर से जनभाषा न तो विशुद्ध साहित्यिक हो सकती है और न ही व्याकरण के कठोर नियमों से बांधी जा सकती है। जन-साधारण में ...

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क्या आप जानते हैं ड्रोन 16वीं शताब्दी से हमारे बीच मौजूद हैं?

ड्रोन एक ऐसा यांत्रिक पक्षी है जो पॉयलट के इशारे पर आसमान में उड़ाया जाता है और उसकी मशीनी आंखों को आसमान में तैनात कर एरियल यानि ऊंचाई से वांछित दृश्यों व तसवीरों को रिकार्ड किया जा सकता है. दिलचस्प बात यह है कि बचपन के दौर में हम सेना ...

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व्‍यावसायिकता के विरुद्ध

मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि वर्तमान भारतीय पत्रकारिता सामाजिक दायित्‍व से शून्‍य है। प्रकाशित सामग्री में चटखारे और चापलूसी की ही प्रमुखता होती है। यह बात खास तौर से उन पत्र-पत्रिकाओं पर लागू होती है जिनके पीछे बड़ी-बड़ी थैलियां हैं। छोटी पत्रिकाएं अभी भी जहां-तहां कुछ ...

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मीडिया अध्ययन के यक्ष प्रश्न

डॉ. देवव्रत सिंह। दुनिया भर में अमेरिका और यूरोप में मीडिया शिक्षण की दो अलग-अलग धाराएं विद्यमान रही हैं। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की धाराएं भी बाद में इन दोनों में ही मिल गयीं। अमेरिकी परंपरा के अनुसार मीडिया शिक्षण में क्राफ्ट पर जोर रहा है। जिसमें मीडिया प्रॉडक्शन और पत्रकारिता ...

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