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कहाँ होती है असली ख़बर?

क़मर वहीद नक़वी। एक पत्रकार में सबसे बड़ा गुण क्या होना चाहिए? बाक़ी बातें तो ठीक हैं कि विषय की समझ होनी चाहिए, ख़बर की पकड़ होनी चाहिए, भाषा का कौशल होना चाहिए आदि-आदि। लेकिन मुझे लगता है कि एक पत्रकार को निस्सन्देह एक सन्देहजीवी प्राणी होना चाहिए, उसके मन ...

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ख़बरों का अद्भुत संसार, छवियां और यथार्थ

सुभाष धूलिया। व्यवस्था के भीतर भी वस्तुपरक और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए आवश्यक है कि सत्ता और पत्रकार के बीच एक ‘सम्मानजक दूरी’ बनाए रखी जाए। लेकिन आज जो रुझान सामने आ रहे हैं उसमें यह दूरी लगातार कम होती जा रही है और मीडिया पर सत्ता के प्रभाव में ...

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टेलीविज़न पत्रकारिता: ख़बर कई आंखों और हाथों से गुजरते हुए पहुंचती है टीवी स्क्रीन तक

नीरज कुमार। वरिष्ठ टीवी पत्रकार रवीश कुमार बताते हैं कि जब उन्होंने एनडीटीवी ज्वाइंन किया तो चैनल के स्टूडियो में आकर उन्हें लगा कि वो जैसे नासा में आ गए हैं… रवीश कुमार के अनुभव का जिक्र उन युवाओं के लिए हैं, जो टीवी पत्रकार बनना चाहते हैं। लेकिन, न्यूज ...

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स्टिंग ऑपरेशन के लिए खुफिया कैमरे का चुनाव

डॉ. सचिन बत्रा | आज के दौर में किसी भी अनियमितता, गैरकानूनी काम, भ्रष्टाचार या षड़यंत्र को उजागर करने के लिए सुबूतों की ज़रूरत होती है। हमारे देश में मीडिया इसी प्रकार सुबूतों को जुटाने के लिए स्टिंग ऑपरेशन करता है और स्पाय यानी खुफिया कैमरों का इस्तेमाल कर गलत ...

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खबर केवल नेपाल से रिश्ते का बिगड़ना है

आशीष कुमार ‘अंशु’। भारतीय मीडिया का अर्थ नेपाल की नजर में वे सभी भारतीय खबरिया चैनल है, जो चौबीस घंटे सात दिन खबर देने का दावा करते हैं। इसमें अखबार और वेवसाइट शामिल नहीं है। इसलिए जब नेपाल में मीडिया के प्रति गुस्सा प्रकट करने की बात सामने आती है ...

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खबर के गुलदस्ते में शब्दों के फूल

डॉ. महर उद्दीन खां। माली जिस प्रकार गुलदस्ते का आकर्षक बनाने के लिए सुंदर-सुंदर फूलों का चयन करता है उसी प्रकार पत्रकार को भी अपनी खबर के गुलदस्ते को आकर्षक बनाने के लिए सुंदर, संक्षिप्त और सरल शब्दों का चयन करना चाहिए। भारी भरकम शब्दों के प्रयोग से खबर बोझिल ...

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भारतीय अखबारों में महिलाओं से जुड़ी खबरें और उनके पीछे की सोच

डॉ. शिल्पी झा। भारतीय अखबारों के पन्नों में महिलाओं की स्थिति पर अगर बात करनी हो तो केवल वो शब्द या कॉलम गिनने से काम नहीं चलेगा जो अलग-अलग भाषाओं के अखबार महिलाओं या उनसे जुड़ी ख़बरों के लिए निर्धारित करते हैं। और इन कसौटियों पर मीडिया का देखना कई ...

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साख बनाए रखनी है तो समाचार की पुष्टि अवश्य करें

डॉ. महर उद्दीन खां। पत्रकारिता का एक नियम यह भी है कि सुनी सुनाई बात पर पूरा विश्वास न करें। जो भी सूचना आप को मिलती है उसे क्रास चैक अवश्‍य करना चाहिए । ऐसा न होने पर आप धोखा भी खा सकते हैं क्योंकि कई लोग पत्रकार को पटा ...

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सम्पादन : खबर अखबारी कारखाने का कच्चा माल होती है

डॉ. महर उद्दीन खां। रिपोर्टर समाचार लिखते समय उन सब बातों पर ध्यान नहीं दे पाता जो अखबार के और पाठक के लिए आवश्‍यक होती हैं। खबर को विस्तार देने के लिए कई बार अनावश्‍यक बातें भी लिख देता है। कई रिपोर्टर किसी नेता के भाषण को जैसा वह देता ...

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कॉरपोरेट रिपोर्टिंग : कंपनी जो बताए वह विज्ञापन, जो छुपाए वह है खबर

शशि झा। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्‍तंभ कहा जाता रहा है। पर विडंबना यह है कि प्रिंट से लेकर इलैक्‍ट्रानिक तक कमोबेश इनके सभी अहम समूहों के मालिक बड़े पूंजीपति, उद्योगपति और बड़े बिजनेसमैन रहे हैं। कोढ़ मे खाज यह है कि पिछले कुछ वर्षों में चिट फंड, रियल ...

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