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Tag Archives: फेसबुक

स्टिंग ऑपरेशन: घात लगाकर सुबूत जुटाना

डॉ. सचिन बत्रा। स्टिंग ऑपरेशन को घात पत्रकारिता या डंक पत्रकारिता भी कहा गया है। दरअसल घात पत्रकारिता खोजी पत्रकारिता की कोख से ही निकली है लेकिन इसमें दस्तावेज से अधिक दृश्य या फोटो का विशेष महत्व होता है क्योंकि घात पत्रकारिता में दृश्यों को सुबूत की तरह इस्तेमाल किया ...

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मीडिया, मिशन और मुनाफे की जिद

धनंजय चोपड़ा। समय बदला, समाज बदला, सोच बदली और इन सबके साथ पत्रकारिता के सरोकार भी बदले। मिशन को खूंटी पर टांग कर पत्रकारिता के अधिकांश अलम्बरदार पहले मार्केट और फिर मुनाफे की दौड़ और आगे निकल जाने की होड़ में शामिल हो गये। मार्केट, मनी, मसल्स और मुनाफे के ...

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जन सम्‍पर्क के सिद्धांत, क्या ये अवैज्ञानिक है?

जयश्री एन. जेठवानी, नरेन्‍द्र नाथ सरकार | क्‍या जन-सम्‍पर्क बिना किसी वैज्ञानिक सिद्धान्‍त पर आधारित तकनीक है? इसके आलोचक निश्चित रूप से हां कहेगें, लेकिन इस क्षेत्र से जुड़े पेशेवर और शिक्षाविद् इससे कतई सहमत नहीं होगें। 1920 के दशक में जब जन-सम्‍पर्क की अवधारणा शुरूआती स्‍तर पर थी तो एडवर्ड ...

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ख़बरिया चैनलों की भाषा

अतुल सिन्हा। करीब डेढ़ दशक पहले जब टेलीविज़न न्यूज़ चैनल्स की शुरुआत हुई तो इसकी भाषा को लेकर काफी बहस मुबाहिसे हुए … ज़ी न्यूज़ पहला न्यूज़ चैनल था और यहां जो बुलेटिन बनते थे उसमें हिन्दी के साथ साथ अंग्रेज़ी भी शामिल होती थी जिसे बोलचाल की भाषा में ...

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इंटरनेट ने बदला पत्रकारिता का स्वरूप

हर्षदेव। समाचार लेखन के लिए पत्रकारों को जो पांच आधारभूत तत्व बताए जाते हैं, उनमें सबसे पहला घटनास्थल से संबंधित है। घटनास्थल को इतनी प्रमुखता देने का कारण समाचार के प्रति पाठक या दर्शक का उससे निकट संबंध दर्शाना है। समाचार का संबंध जितना ही समीपी होता है, पाठक या ...

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विज्ञान का प्रसार और मीडिया की सहभागिता

रश्मि वर्मा। विज्ञान हमारे जीवन के हर पहलू से जुड़ा है। आज विज्ञान ने न केवल मानव जीवन को सरल व सुगम बनाया है अपितु भविष्य के अगत सत्य को खोजने का साहस भी दिया है। प्रकृति के रहस्यों को समझने के लिए जहां विज्ञान एक साधन बनता है वहीं ...

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क्या है सोशल मीडिया की सामाजिकता?

शालिनी जोशी। यहां लोगों का, मस्तिष्क, मस्तिष्क से संचार करता है काला गोरे से नहीं, यहां कोई रंगभेद नहीं आदमी औरत से नहीं, यहां कोई लिंगभेद नहीं युवा बुज़ुर्ग से नहीं, यहां कोई उम्र सीमा नहीं छोटा लंबे से नहीं, ख़ूबसूरत साधारण से नहीं, यहां कोई रूप नहीं यहां सिर्फ़ ...

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राजनीति के मीडियाकरण का दौर: सरकारी योजनाओं पर आलोचनात्मक क्यों नहीं है मीडिया?

सीमा भारती। इन दिनों टेलीविज़न पर प्रधानमंत्री के स्वच्छता मिशन से सम्बद्ध एक विज्ञापन दिखाया जा रहा है। इस विज्ञापन में “जहां सोच वहां शौचालय” के टैग लाइन के साथ शौचालय बनवाओ और इस्तेमाल करो की बात कही जाती है। संदेश देने वाली अभिनेत्री विद्या बालन है, जिसकी छवि एक ...

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संचार मॉडल: अरस्तू का सिद्धांत

डॉ. कुमार राज्यवर्धन। संचार की प्रक्रिया का अध्ययन एक विज्ञान है। यह प्रक्रिया जटिल है। विभिन्न विद्वानों ने विभिन्न तरीके से इस प्रक्रिया का वर्णन किया है। संचार की प्रक्रिया को बताने वाला चित्र मॉडल कहलाता है। इन मॉडलों से हमें संचार की गतिशील और सक्रिय प्रक्रिया समझने में आसानी ...

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संचार की सत्ता और संस्कृति

शिवप्रसाद जोशी। अंतरराष्ट्रीय संचार की मनोवृत्तियों की स्पष्ट झलक देखने और इसे समझने के लिए हाल के वर्षों का सबसे सटीक उदाहरण है वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति उगो चावेज़ का निधन। चावेज़ की मौत से जुड़ी ख़बरों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया और समाचार एजेंसियों के रुख़ का पता चलता है। इससे उस ...

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मीडिया विकास से विकास तक

डॉ. राजेश कुमार। ऐसी आम धारणा है कि विकास का सीधा असर व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र के विकास पर होता है। इसे m 4 D (Media for Development) या C 4 D (Communication for Development) के रूप में कई शोध लेखों में परिभाषित किया गया है (मेलकोट एवं स्टीव, 2001)। ...

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न्‍यूज और उसके आवश्‍यक तत्‍व

शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन। इंसान आज चांद से होता हुआ मंगल पर कदम रखने की तैयारी कर रहा है और उसकी खोजी आंखे बिग बैंग (महाविस्‍फोट) में धरती के जन्‍म का रहस्‍य तलाश रही है। दरअसल इंसान को समय के पार पहुंचाया है, उसकी जिज्ञासा ने। सब कुछ जानने की ...

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