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Tag Archives: फेसबुक

24 फ्रेम : संयोजन के मूल सिद्धान्त

आकांक्षा शर्मा। वीडियो और फिल्म मेकिंग नई उंचाईयों तक पहुँच चुका है। तकनीक में प्रतिदिन इज़ाफ़ा हो रहा है और हर रोज़ बेहतर कैमरे ईजाद किए जा रहे हैं। परन्तु यह समझना बहुत जरुरी है कि इसकी शुरुआत कहां से और कैसे हुई। फोटोग्राफी के ईजाद होने के तक़रीबन सात ...

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जनसंचार: आखिर विकल्प क्या हैं?

देवाशीष प्रसून। पूंजी संकेन्द्रण की अंधी दौड़ में मीडिया की पक्षधरता आर्थिक और राजनीतिक लाभ हासिल करने में है। कभी-कभार वह जनपक्षीय अंतर्वस्तु का भी संचरण करता है, परंतु जनहित इनका उद्देश्य न होकर ऐसा करना केवल आमलोगों के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाये रखने हेतु एक अनिवार्य अभ्यास है। मीडिया ...

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वेब मीडिया: चुनौतियां एवं संभावनाए

सुनील श्रीवास्तव। यह समय संचार क्रान्ति का है। वेब मीडिया का कैनवास निरन्तर बड़ा होता जा रहा है‚ इसके आयाम भी बदले हैं। वेब मीडिया ने पारम्परिक संचार माध्यमों को पीछे छोड़ उस पर अपना अधिकार पूर्णतयः भले ही न जमा लिया हो‚ लेकिन अपनी जमीन भविष्य के लिए पुख्ता ...

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…सवाल ये कि हम पत्रकार बनें ही क्यों?

महेंद्र नारायण सिंह यादव। अगर आप पत्रकारिता कर रहे हैं या पत्रकारिता के क्षेत्र में आना चाहते हैं तो एक सवाल का सामना आपको कहीं न कहीं ज़रूर करना पड़ा होगा या पड़ सकता है कि आप पत्रकार क्यों बनना चाहते हैं। आखिर आप अपने सामने मौजूद तमाम आकर्षक पेशों ...

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ब्लॉगिंग : बांटिये अपनी पसंद लोगों में साथ

अशोक पान्डे। इन्टरनेट पर अपने अनुभव बाकी लोगों के साथ बांटने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक तरह की व्यक्तिगत डिजिटल डायरी के लिए वैब्लॉग शब्द का प्रयोग सबसे पहले 17 दिसम्बर 1997 को जोर्न बार्जर द्वारा किया गया था। बार्जर रोबोट विस्डम नाम की अपनी एक वैबसाइट पर ...

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पत्रकारिता के विविध आयाम

सुभाष धूलिया | अपने रोजमर्रा के जीवन की एक नितांत सामान्य स्थिति की कल्पना कीजिए। दो लोग आसपास रहते हैं और लगभग रोज मिलते हैं। कभी बाजार में, कभी राह चलते और कभी एक-दूसरे के घर पर। उनकी भेंट के पहले कुछ मिनट की बातचीत पर ध्यान दीजिए। हर दिन ...

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पीत पत्रकारिता : दांव पर पत्रकारीय सिद्धांतों की साख

राजेश कुमार। पत्रकारिता अभिव्यक्ति का एक माध्यम है। जिसके जरिए समाज को सूचित, शिक्षित और मनोरंजित किया जाता है। पत्रकारिता के माध्यम से आने वाले किसी भी संदेश का समाज पर व्यापक असर पड़ता है, जिसके जरिए मानवीय व्यवहार को निर्देशित और नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में एक ...

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खोजी पत्रकारिता : कैसे, क्यों और विभिन्न आयाम

डॉ . सचिन बत्रा। खोजी पत्रकारिता को अन्वेषणात्मक पत्रकारिता भी कहा जाता है। सच तो यह है कि हर प्रकार की पत्रकारिता में समाचार बनाने के लिए किसी न किसी रूप में खोज की जाती है यानि कुछ नया ढूंढने का प्रयास किया जाता है फिर भी खोजी पत्रकारिता को ...

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सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव और चुनावी राजनीति

शालिनी जोशी। चुनाव 2014 नये मीडिया और जनसंचार और पत्रकारिता के छात्रों और शोधकर्ताओं और पेशेवरों के लिए एक टर्निंग प्वायंट की तरह है, एक ऐसा पड़ाव जहां मीडिया के नये पैमानों को परखने का एक बेहतर मौक़ा मिल जाता है। इस बहाने ये भी पता चलता है कि नया ...

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बिज़नेस चैनल का एक दिन और पत्रकारिता

नीरज कुमार। कोई बिज़नेस चैनल देखिए। पहली बार में शायद ही आपके पल्ले पड़े कि क्या बोला जा रहा है, क्यों बोला जा रहा है। जो आंकड़े या चार्ट दिखाए रहे हैं, उनके मायने क्या हैं। ऐसा आपके साथ तब भी हो सकता है, जब आप अर्थव्यवस्था या बिज़नेस की ...

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हिन्दी सिनेमा की भाषा के विभिन्न आयाम

सुशील यती। हिंदी ‘पॉपुलर’ सिनेमा मुख्य तौर पर ‘नरेटीव’ सिनेमा है, जिसमे कहानी महत्वपूर्ण होती है। दूसरे शब्दों में कहे तो विभिन्न ‘प्रॉडक्शन’ तकनीक, कैरेक्टर (किरदार), और कहानी के विभिन्न तत्व मिलकर एक कथानक (नरेटीव) का निर्माण करते है, जिसे सिनेमा की भाषा मे ‘नरेटीव’ कहा जाता है। फिल्म कथानक ...

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क्या ख़ास है वेब दुनिया में?

शिवप्रसाद जोशी और शालिनी जोशी |  वेब पत्रकारिता कोई कम्प्यूटर पर अख़बार नहीं है. न ही ये ब्राउज़र से संचालित कोई प्रसारण केंद्र है. ये पारंपरिक मीडिया से कई मानों में भिन्न हैः अपनी क्षमता, लचीलेपन, तात्कालिकता, स्थायित्व और पारस्परिकता से. क्षमताः अख़बार का एक रिपोर्टर अपनी स्टोरी को पांच ...

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