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Tag Archives: फेसबुक

पब्लिक रिलेशन और मीडिया: वैश्विक अनुभव और भारत

दिलीप मंडल।  पब्लिक रिलेशन वैसे तो पुरानी विधा है लेकिन आधुनिक कॉरपोरेट पब्लिक रिलेशन की शुरुआत 20वीं सदी के पहले दशक से हुई। पब्लिक रिलेशन का इतिहास लिखने वाले कई लोग आईवी ली को पब्लिक रिलेशन का जनक मानते हैं। कुछ इतिहास लेखक यह श्रेय एडवर्ड बर्नेस को देते हैं। ...

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मोबाइल कम्युनिकेशन : शिष्टाचार सीखना भी है जरूरी

डॉ. देवव्रत सिंह। हाल ही में दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने भारत के सभी मोबाइल प्रदाता कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने ग्राहकों को मोबाइल शिष्टाचार का पाठ पढायें। सार्वजनिक जीवन में प्रत्येक व्यक्ति अब ये महसूस करने लगा है कि मोबाइल सुविधा बनने के साथ-साथ असुविधाजनक भी साबित ...

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…तो क्या आप भी विज्ञान लेखक बनना चाहते हैं?

देवेंद्र मेवाड़ी। पहले बताएंगे कि आप विज्ञान लेखक ही क्यों बनना चाहते हैं? लेखन का क्षेत्र बहुत विशाल है। आप तमाम माध्यमों के लिए विविध प्रकार का लेखन कर सकते हैं। पत्रकार, लेखक, कवि, नाटककार, पटकथाकार कुछ भी बन सकते हैं। फिर, विज्ञान लेखक ही क्यों? जवाब में अगर आप ...

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जनसंपर्क: कैसे करें छवि का निर्माण?

रश्मि वर्मा। संचार प्रत्येक सामाजिक प्राणी की मूलभूत आवश्‍यकता है, जिसके जरिए वह परस्पर भावों, विचारों, जानकारियों और ज्ञान का आदान-प्रदान करता है। एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य के बीच संपर्क सेतू का काम करता है संचार और जनसंपर्क इसी संचार प्रक्रिया को निरंतर बनाए रखने की परिष्कृत कला है। ...

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पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप

गोविन्द सिंह | लेखन: स्वरूप एवं अवधारणा लेखन का संबंध मानव सभ्यता से जुड़ा है। जब आदमी के मन में अपने आप को अभिव्यक्त करने की ललक जगी होगी, तभी से लेखन की शुरुआत मानी जा सकती है। सवाल यह पैदा होता है कि हम क्यों लिखते हैं? कुछ लोग ...

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खेल पत्रकार कैसे बने ?

नीरज झा | खेल के प्रति जूनून चाहिए खेल आज की तारीख में पत्रकारिता का एक अहम अंग  है. पिछले 15 साल के अपने अनुभव में हमने इसमे काफ़ी बदलाव होतें देखा है. पहले जमाने में ये मुख्य पत्रकारिता का अंश नही माना जाता था, लेकिन समय के साथ इसने अपनी ...

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फ्रेंच न्यू वेव सिनेमा के सामाजिक-राजनीतिक आधार

भूपेन सिंह। फ्रांस सिनेमा की जन्म भूमि रही है। अठारह सौ पिचानबे में लुमिये बंधुओं ने पेरिस के एक कैफे में पहली बार फिल्म दिखाकर एक नया इतिहास बनाया था। उसके बाद ये कला पूरी दुनिया में फैल गई। सिनेमा के क़रीब सवा सौ साल के इतिहास में अनगिनत प्रयोग ...

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विज्ञान पत्रकारिता : चुनौतियां और कार्यक्षेत्र

महेंद्र नारायण सिंह यादव।  सामान्य धारणा यह है कि पत्रकारों को बुनियादी जानकारी तकरीबन हर विषय की होनी चाहिए, जो कि सही भी है। हालाँकि कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जिनके लिए विषय विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ती ही है। विज्ञान पत्रकारिता के साथ भी ऐसा ही है। विज्ञान पत्रकारिता के ...

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