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उग्रवाद की रिपोर्टिंग में अटूट लगन, अनुशासन जरूरी

इरा झा। उग्रवाद प्रभावित इलाकों में रिपोर्टिंग के लिए संयम, कल्‍पनाशीलता, धैर्य, जी-तोड़ मेहनत और अटूट लगन की आवश्‍यकता होती है। इनमें सामान्‍य खबरों की तरह कुछ भी और कभी भी नहीं लिखा जा सकता। यह काम बेहद जोखिम भरा है, लिहाजा इस वास्‍ते सावधानी और तथ्‍यों तथा स्रोतों की ...

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कॉरपोरेट रिपोर्टिंग : कंपनी जो बताए वह विज्ञापन, जो छुपाए वह है खबर

शशि झा। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्‍तंभ कहा जाता रहा है। पर विडंबना यह है कि प्रिंट से लेकर इलैक्‍ट्रानिक तक कमोबेश इनके सभी अहम समूहों के मालिक बड़े पूंजीपति, उद्योगपति और बड़े बिजनेसमैन रहे हैं। कोढ़ मे खाज यह है कि पिछले कुछ वर्षों में चिट फंड, रियल ...

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रीजनल रिपोर्टिंग : गंभीरता का ध्‍यान हमेशा रखें

महेश शर्मा। देश की करीब सवा सौ करोड़ आबादी के लिए दो जून की रोटी जुटाने वाले ग्रामीण किसान की लाइफ स्‍टाइल आजादी के इतने वर्ष बाद भी हमारी मीडिया की विषय वस्‍तु नहीं बन सकी है। वास्‍तविकता यह है कि मीडिया से गांव दूर होते जा रहे हैं। परिणाम ...

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‘डाउन टू अर्थ वीआईपी’ : देवकीनंदन पांडे

उमेश जोशी। देवकीनंदन पांडे समाचार प्रसारण जगत का एक ऐसा नाम है जो कई दशक तक हर किसी की जुबान पर था। चाहे वो कितना ही बड़ा नेता हो या अभिनेता, जनसाधारण की तो बिसात ही क्‍या। 1990 तक किसी भी भारतीय ने दुनिया की बड़ी घटना का कोई समाचार ...

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नव पत्रकारों के लिए विशेष

भगवती प्रसाद डोभाल। पत्रकारिता का पेशा अपनाने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देने की आवश्‍यकता है। कुछ वर्षों पूर्व पत्रकारिता के षिक्षण संस्थान बहुत कम थे। या कहें कि इतने बड़े देश और उसकी आवादी के हिसाब से पत्रकारिता शिक्षण संस्थान ना के बराबर थे। सहत्तर के दशक में ...

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रोमांच है आर्थिक पत्रकारिता

नीरज कुमार। हम विकास की राजनीति करते हैं। राजनीतिक पार्टियों में यह जुमला इन दिनों आम है। मई 2014 में लोकसभा चुनाव में विकास के मुद्दे के ईर्द-गिर्द लड़ागया। विकास का संबंध ऐसी अर्थव्यवस्था से है, जिसमें समाज के हर वर्ग को आर्थिक रूप से सशक्त होने का मौक़ा मिले। ...

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स्टिंग ऑपरेशन: घात लगाकर सुबूत जुटाना

डॉ. सचिन बत्रा। स्टिंग ऑपरेशन को घात पत्रकारिता या डंक पत्रकारिता भी कहा गया है। दरअसल घात पत्रकारिता खोजी पत्रकारिता की कोख से ही निकली है लेकिन इसमें दस्तावेज से अधिक दृश्य या फोटो का विशेष महत्व होता है क्योंकि घात पत्रकारिता में दृश्यों को सुबूत की तरह इस्तेमाल किया ...

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सावधान रहिए साइबर हमलावरों से

मुकुल श्रीवास्तव | कैस्परस्की की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार ग्रैबिट नामके एक वाइरस अटैक ने छोटी और मझोली व्यवसायिक कंपनियों के दस हजार से ज्यादा फाइलें चुरा लीं इनमें से ज्यादातर कम्पनियाँ थाईलेंड ,भारत और अमेरिका में स्थित हैं जो केमिकल ,नैनो टेक्नोलोजी ,शिक्षा ,कृषि ,मीडिया और निर्माण के ...

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सुदृढ़ हिंदी के साथ जरूरी है अच्छा इंग्लिश ज्ञान

मुकुल व्यास | एक जमाना था जब हिंदी के अखबारों को प्रमुख ख़बरों के लिए इंग्लिश संवाद एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता था। शुरू-शुरू में अस्तित्व में आईं हिंदी संवाद एजेंसिया खबरों की विविधता और विस्तृतता के मामले में इंग्लिश संवाद एजेंसियों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाती थीं। धीरे-धीरे स्थितियां ...

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फोटोग्राफी में ऐपर्चर की भूमिका

अमित कुमार & पूनम गौड़ | ऐपर्चर लेंस में स्थित वह दरवाजा / छिद्र है जिससे होकर प्रकाश की किरणें कैमरे के अन्दर प्रवेश करती हैं. इस दरवाजे / छिद्र के आकार को फोटोग्राफर अपनी आवश्यकता के अनुसार परिवर्तित कर सकता है. ऐपर्चर फोटोग्राफी में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ...

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मीडिया, मिशन और मुनाफे की जिद

धनंजय चोपड़ा। समय बदला, समाज बदला, सोच बदली और इन सबके साथ पत्रकारिता के सरोकार भी बदले। मिशन को खूंटी पर टांग कर पत्रकारिता के अधिकांश अलम्बरदार पहले मार्केट और फिर मुनाफे की दौड़ और आगे निकल जाने की होड़ में शामिल हो गये। मार्केट, मनी, मसल्स और मुनाफे के ...

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जन सम्‍पर्क के सिद्धांत, क्या ये अवैज्ञानिक है?

जयश्री एन. जेठवानी, नरेन्‍द्र नाथ सरकार | क्‍या जन-सम्‍पर्क बिना किसी वैज्ञानिक सिद्धान्‍त पर आधारित तकनीक है? इसके आलोचक निश्चित रूप से हां कहेगें, लेकिन इस क्षेत्र से जुड़े पेशेवर और शिक्षाविद् इससे कतई सहमत नहीं होगें। 1920 के दशक में जब जन-सम्‍पर्क की अवधारणा शुरूआती स्‍तर पर थी तो एडवर्ड ...

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