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बाजार होड़ में फंसी विकास पत्रकारिता

अन्‍नू आनन्‍द। कोई भी रिपोर्ट/स्‍टोरी बेहतर और प्रभावी कैसे हो सकती है? अच्‍छी और प्रभावी स्‍टोरी की परिभाषा क्‍या है? समाचार कक्षों में बेहतर स्‍टोरी कौन सी होती है? अजीब बात यह है कि न्‍यूज रूम में इन मुददों पर कभी बहस नहीं होती? लेकिन फिर भी ‘रूचिकर और असरदार ...

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मीडिया और बाज़ारीकरण

प्रभात चन्द्र झा। आज हर जगह बाजार की घुसपैठ हो चुकी है चाहे वह मीडिया हो राजनीति या कुछ और। ऐसे में यह मीडिया चिंतकों और नीति निर्माताओं पर निर्भर करता है कि वे इसकी हद तय करें। जिससे एक सामंजस्य मीडिया और विज्ञापन, दोनों के बीच बना रहे और ...

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बाजारी ताकतों का पत्रकारिता पर प्रभाव

अन्नू आनंद। बाजारी ताकतों का पत्रकारिता पर प्रभाव निरंतर बढ़ा है। प्रिंट माध्यम हो या इलेक्ट्रॉनिक अब विषय-वस्तु (कंटेंट) का निर्धारण भी प्रायः मुनाफे को ध्यान में रखकर किया जाता है। कभीसंपादकीय मसलों पर विज्ञापन या मार्केटिंग विभाग का हस्तक्षेप बेहद बड़ी बात मानी जाती थी।प्रबंधन विभाग संपादकीय विषयों पर ...

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