Home / Tag Archives: Web Journalism (page 3)

Tag Archives: Web Journalism

…तो, क्या आप भी विज्ञान लेखक बनना चाहते हैं?

देवेंद्र मेवाड़ी। संपादकीयः अगर आप समाचारपत्र में काम करते हैं तो संपादक आपसे विज्ञान के किसी ज्वलंत या सामाजिक मुद्दे पर तत्काल संपादकीय लिखने की अपेक्षा कर सकते हैं। संपादकीय ऐसे मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी है। इससे समाचारपत्र द्वारा उस वैज्ञानिक विषय या घटना को दिए गए महत्व का भी ...

Read More »

कम होती लड़कियां और मीडिया रिपोर्टिंग

अन्नू आनंद। पिछले करीब पांच दशकों से लड़कियों के घटते अनुपात के मसले पर कवरेज का सिलसिला जारी है। 80 के दशक में अमनियोसेंटसिस का इस्तेमाल लिंग निर्धारण के लिए शुरू हुआ तो अखबारों में इस तकनीक के दुरूपयोग संबंधी खबरें आने लगी। इससे पहले देश के कुछ विशेष हिस्सों ...

Read More »

संचार की बुलेट थ्योरी : अतीत एवं वर्तमान का पुनरावलोकन

डॉ॰ राम प्रवेश राय। जन संचार के सिद्धांतों को लेकर अक्सर ये बहस चलती रहती है कि ये पुराने सिद्धांत व्यवहार मे महत्वहीन साबित होते है और पत्रकारिता शिक्षण मे इन सिद्धांतों पर अधिक ज़ोर नहीं देना चाहिए। ऐसा ही एक सिद्धांत है बुलेट या हाइपोडर्मिक निडल थ्योरी इसको एक ...

Read More »

नेट न्यूट्रेलिटी पर हंगामा क्यों?

भूपेन सिंह। हाल के दिनों में नेट न्यूट्रेलिटी को लेकर काफी हंगामा रहा है। नेट न्यूट्रैलिटी की मांग सड़क से लेकर संसद तक उठी है। दिल्ली, चैन्नई और बेंगलौर में नेट न्यूट्रैलिटी लागू करने के लिए प्रदर्शन हुए हैं तो संसद में भी इस मामले में सवाल-जवाब हुए हैं। मुनाफा ...

Read More »

नेपाल त्रासदी में भारतीय मीडिया

आशीष कुमार ‘अंशु’। भारतीय मीडिया को लेकर नेपाल से आ रही खबरों से यह जाहिर था कि मीडिया में जो कुछ आ रहा है, उसे देखकर नेपाल के लोग भारतीय मीडिया के प्रति आक्रोश में हैं। क्या नेपाल के लोगों का यह गुस्सा वास्तव में भारतीय मीडिया से था, या ...

Read More »

हिंदी पत्रकारिता की सदाबहार गलतियां

डॉ. महर उद्दीन खां। पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए अन्य भाषाओं के शब्दों के प्रयोग को अनुचित नहीं कहा जा सकता मगर उन का सही प्रयोग किया जाना चाहिए। देखने में आता है कि जाने अनजाने या अज्ञानता वष कई उर्दू और अंग्रेजी शब्दों ...

Read More »

सोशल मीडिया : खबरों की चौपाल

धनंजय चोपड़ा। माना जा रहा है कि वर्ष 2040 में प्रिंट न्यूज पेपर दुनिया से विदा हो जायेगा। दुनिया का कोई भी कागजी अखबार तब तक नहीं बचेगा। सब कुछ डिजिटल हो चुका होगा। बीसवीं सदी के मध्य में संचार शास्त्री मार्शल मैक्लुहान ने घोषणा की थी कि संचार माध्यम ...

Read More »

पत्रकारिता की विसंगतियों के केंद्र में है उसका कारोबार

प्रमोद जोशी। मार्शल मैकलुहान के अनुसार पत्रकारिता पहला औद्योगिक उत्पाद है। यानी बाजार में बेचा जाने वाला और बड़े स्तर पर तैयार होने वाला माल। पाठकों का एक बड़ा बाजार है, जिन्हें जानकारी की जरूरत है। यह जानकारी उनके आसपास की हो सकती है और वैश्विक भी। इसमें सामान्य राजनीतिक, ...

Read More »

कोर्ट रिपोर्टिंग : बेहद सतर्क रहने की जरूरत

अनूप भटनागर। न्‍यायपालिका और इसकी कार्यवाही से जुड़ी छोटी बड़ी सभी सभी खबरों में नेताओं, नौकरशाहों और कार्पोरेट जगत के लागों की ही नहीं बल्कि आम जनता की भी हमेशा से ही गहरी दिलचस्‍पी रही है। महांत्‍मा गांधी की हत्‍या से लेकर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय द्वारा इन्दिरा गांधी का चुनाव ...

Read More »

क्राइम रिपोर्टिंग : 24 x 7 x 365 दिन : चाक चौबंद

इंद्र वशिष्ठ। अपराध की खबर सिर्फ किसी वारदात की सूचना भर नहीं होती है अपराध की खबर लोगों को सतर्क और जागरूक करती है। अपराधी वारदात के कौन से तरीके अपना कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं इसकी जानकारी अपराध के समाचारों से मिलती है। लोग यदि अपराध ...

Read More »

उग्रवाद की रिपोर्टिंग में अटूट लगन, अनुशासन जरूरी

इरा झा। उग्रवाद प्रभावित इलाकों में रिपोर्टिंग के लिए संयम, कल्‍पनाशीलता, धैर्य, जी-तोड़ मेहनत और अटूट लगन की आवश्‍यकता होती है। इनमें सामान्‍य खबरों की तरह कुछ भी और कभी भी नहीं लिखा जा सकता। यह काम बेहद जोखिम भरा है, लिहाजा इस वास्‍ते सावधानी और तथ्‍यों तथा स्रोतों की ...

Read More »

कॉरपोरेट रिपोर्टिंग : कंपनी जो बताए वह विज्ञापन, जो छुपाए वह है खबर

शशि झा। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्‍तंभ कहा जाता रहा है। पर विडंबना यह है कि प्रिंट से लेकर इलैक्‍ट्रानिक तक कमोबेश इनके सभी अहम समूहों के मालिक बड़े पूंजीपति, उद्योगपति और बड़े बिजनेसमैन रहे हैं। कोढ़ मे खाज यह है कि पिछले कुछ वर्षों में चिट फंड, रियल ...

Read More »