Home / विशेष आलेख

विशेष आलेख

मीडिया अध्ययन के यक्ष प्रश्न

media-studies

डॉ. देवव्रत सिंह। दुनिया भर में अमेरिका और यूरोप में मीडिया शिक्षण की दो अलग-अलग धाराएं विद्यमान रही हैं। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की धाराएं भी बाद में इन दोनों में ही मिल गयीं। अमेरिकी परंपरा के अनुसार मीडिया शिक्षण में क्राफ्ट पर जोर रहा है। जिसमें मीडिया प्रॉडक्शन और पत्रकारिता ...

Read More »

‘बड़ी खबर’ कितनी बड़ी?

media-news

कुमार कौस्तुभ | मीडिया, खासकर समाचारों की दुनिया की शब्दावली में ‘बड़ी खबर’ जाना-पहचाना टर्म है। आमतौर पर इसे ‘हेडलाइन’ भी माना जाता है। लेकिन, ‘हेडलाइन’ और ‘बड़ी खबर’  की टर्मिनोलॉजी में कुछ बुनियादी फर्क है जिसे ‘बड़ी खबर’ पर चर्चा करने से पहले साफ कर देना जरूरी है। टीवी ...

Read More »

पहले शिक्षा में तो लाइए हिन्दी

hindi

गोविन्द सिंह | अनेक बार ऐसा लगता है कि शिक्षा की दुनिया का इस देश से, इस राष्ट्र के लक्ष्यों से कोई लेना-देना नहीं है. शिक्षा नीति के करता-धरता चाहते ही नहीं कि अंग्रेज़ी की बजाय हिन्दी को स्कूलों-कालेजों में पढ़ाया जाना चाहिए. इस देश का शिक्षाविद, अपना शोध पत्र ...

Read More »

भारत में मीडिया स्वामित्व: हालात और चुनौतियां

media

दिलीप ख़ान | मीडिया के पत्रकारिता और उद्योग के पक्ष को अलग–अलग कर नहीं देखने के चलते मिशन, सरोकार और भावुकता जैसे शब्दों को टीवी और प्रिंट के इस साम्राज्य में जब कोई तलाशता है तो उसे असफ़लता हासिल होती है। मीडिया कंपनियां शेयर बाज़ार में ठीक उसी तरह सूचीबद्ध ...

Read More »

खेल, तमाशा और ‘चीयरलीडर्स’

IPL

सुशील यति | विस्मय भरे चकाचौंध और आश्चर्य-मिश्रित प्रस्तुतीकरण के साथ आईपीएल के दसवें संस्करण का समापन हुआ, आईपीएल अब सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि अपनी उत्सवधर्मिता और भव्यता के कारण दर्शकों के लिए खेल से कहीं बढ़कर है। दूसरे शब्दों में कहें तो आईपीएल टेलीविजन का एक ऐसा उत्सव जहाँ ...

Read More »

ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म की ओर

close up of conference meeting microphones and businessman

मनोज कुमार | ‘ठोंक दो’ पत्रकारिता का ध्येय वाक्य रहा है और आज मीडिया के दौर में ‘काम लगा दो’ ध्येय वाक्य बन चुका है। ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म का यह बदला हुआ स्वरूप हम देख रहे हैं। कदाचित पत्रकारिता से परे हटकर हम प्रोफेशन की तरफ आगे बढ़ ...

Read More »

वर्किंग जर्नलिस्टर ऐक्ट  के दायरे में  कब आयेंगे टीवी पत्रकार ?

journalist

उदय चंद्र सिंह | देश में उदारीकरण का दौर शुरु होने के साथ हीं  तमाम उद्योग धंधों की तरह खबरों का बाजार भी खूब चमका । टेलीविजन न्यूज चैनलों की तो जैसे बाढ़ सी आ गई है ।  हर कोई यही कहता फिर रहा है कि टीवी मीडिया बहुत ‘ताकतवर’ ...

Read More »

विज्ञापन अब मांग पैदा करते हैं

deadline

प्रो.डॉ.सचिन बत्रा | अब तक यह माना जाता था कि विज्ञापन किसी उत्पाद या सेवा की जानकारी देने सहित प्रचार के लिए बनाए जाते हैं। लेकिन आज के दौर में विज्ञापन का निर्माण और चयन मांग पैदा करने के पैमाने पर किया जाता है। इसमें तरह—तरह की युक्तियां प्रचलित हैं। जैसे ...

Read More »

मीडिया और लोकतंत्र : एक दूसरे से पूरक या विरोधी

democracy

राजेश कुमार।  यह शोध पत्र मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर मीडिया और विभिन्न देशों की राजनीतिक‚ सामाजिक‚ आर्थिक और सांस्कृतिक व्यवस्था के साथ उसके अंतरसंबंधों पर प्रकाश डालता है। विभिन्न समयकाल में विकसित होने वाली राजनीतिक व्यवस्थाओं ने मीडिया को किस हद तक प्रभावित किया? इन परिस्थितियों में मीडिया ...

Read More »

पेड न्यूज़ और निर्भीक पत्रकारिता का दौर

Paid-news

डॉ॰ राम प्रवेश राय। हर वर्ष 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। इस संदर्भ मे आयोजित अनेक गोष्ठियों और विचार विमर्श में पत्रकारिता के गिरते मूल्यों पर घोर चिंता भी व्यक्त की जाती है। पिछले वर्ष भी अनेक स्थानो पर गोष्ठियाँ आयोजित की गई ...

Read More »

संसद में ख़बरें कैसे घूमती हैं?

Parliament-of-India-21

ओम प्रकाश दास… साठवें दशक में टाईम्स आफ इंडिया समूह के हिन्दी अखबार नवभारत टाईम्स के लिए एक अलग ब्यूरो का गठन किया गया। ब्यूरो बनाने के पीछे टाईम्स ग्रुप के अध्यॿ शाहू शांतिलाल जैन का तर्क था कि संसद और विभिन्न मंत्रालयों की अलग से और विशिष्ट रिपोर्टिंग के लिए ब्यूरो ...

Read More »

चुनाव-सर्वेक्षणों की होड़ में पिचकती पत्रकारिता

opinion-poll

उर्मिलेश | राजनीतिक दलों या नेताओं के जीतने-हारने या उनकी सीटों के पूर्वानुमान लगाने वाले ओपिनियन-पोल राजनीति और राजनेताओं के लिए कितने फायदेमंद या नुकसानदेह हैं, इस पर विवाद हो सकता है। लेकिन एक पत्रकार के रूप में मैं अपने अनुभव की रोशनी में बेहिचक कह सकता हूं कि चुनाव-अधिसूचना ...

Read More »