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विशेष आलेख

अतुल माहेश्वरी: विशाल व्यक्तित्व को सातवीं पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि

स्वर्गीय अतुल माहेश्वरी

आज अतुल माहेश्वरी की सातवीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन, साल 2011 को वह हम सबको अचानक छोड़कर चले गए थे। यह आलेख उनकी यादों को समर्पित करते हुए, 2011 में लिखा गया था। उनकी याद में 2011 में अनुराग बत्रा, चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ, एक्सचेंज4मीडिया समूह द्वारा लिखा गया ...

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कूप-जल नहीं, भाखा बहता नीर

language

अकबर रिज़वी | भाषा सिर्फ हिन्दी, अँग्रेज़ी, उर्दू आदि ही नहीं होती, बल्कि हाव-भाव भी एक भाषा ही है। भाषा का कोई स्थाई मानक नहीं होता। ख़ास-तौर से जनभाषा न तो विशुद्ध साहित्यिक हो सकती है और न ही व्याकरण के कठोर नियमों से बांधी जा सकती है। जन-साधारण में ...

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क्या आप जानते हैं ड्रोन 16वीं शताब्दी से हमारे बीच मौजूद हैं?

drawn

ड्रोन एक ऐसा यांत्रिक पक्षी है जो पॉयलट के इशारे पर आसमान में उड़ाया जाता है और उसकी मशीनी आंखों को आसमान में तैनात कर एरियल यानि ऊंचाई से वांछित दृश्यों व तसवीरों को रिकार्ड किया जा सकता है. दिलचस्प बात यह है कि बचपन के दौर में हम सेना ...

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जिंदगी के कुछ सबक को पहले ही पढ़ाए जाएं

classroom

उमेश चतुर्वेदी… वो किताबों में दर्ज था ही नहीं, सिखाया जो सबक जिंदगी ने…. मिशनरी भाव लेकर तमाम इतर प्रोफेशनल को छोड़ कर समाज बदलने की चाहत लेकर जिन्होंने पत्रकारीय कर्म को अख्तियार किया है, उन्हें पत्रकारीय जिंदगी में पग–पग पर जिस तरह के अनुभवों से दो–चार होना पड़ता है, ...

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व्‍यावसायिकता के विरुद्ध

news collection

मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि वर्तमान भारतीय पत्रकारिता सामाजिक दायित्‍व से शून्‍य है। प्रकाशित सामग्री में चटखारे और चापलूसी की ही प्रमुखता होती है। यह बात खास तौर से उन पत्र-पत्रिकाओं पर लागू होती है जिनके पीछे बड़ी-बड़ी थैलियां हैं। छोटी पत्रिकाएं अभी भी जहां-तहां कुछ ...

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मीडिया अध्ययन के यक्ष प्रश्न

media-studies

डॉ. देवव्रत सिंह। दुनिया भर में अमेरिका और यूरोप में मीडिया शिक्षण की दो अलग-अलग धाराएं विद्यमान रही हैं। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की धाराएं भी बाद में इन दोनों में ही मिल गयीं। अमेरिकी परंपरा के अनुसार मीडिया शिक्षण में क्राफ्ट पर जोर रहा है। जिसमें मीडिया प्रॉडक्शन और पत्रकारिता ...

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‘बड़ी खबर’ कितनी बड़ी?

media-news

कुमार कौस्तुभ | मीडिया, खासकर समाचारों की दुनिया की शब्दावली में ‘बड़ी खबर’ जाना-पहचाना टर्म है। आमतौर पर इसे ‘हेडलाइन’ भी माना जाता है। लेकिन, ‘हेडलाइन’ और ‘बड़ी खबर’  की टर्मिनोलॉजी में कुछ बुनियादी फर्क है जिसे ‘बड़ी खबर’ पर चर्चा करने से पहले साफ कर देना जरूरी है। टीवी ...

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पहले शिक्षा में तो लाइए हिन्दी

hindi

गोविन्द सिंह | अनेक बार ऐसा लगता है कि शिक्षा की दुनिया का इस देश से, इस राष्ट्र के लक्ष्यों से कोई लेना-देना नहीं है. शिक्षा नीति के करता-धरता चाहते ही नहीं कि अंग्रेज़ी की बजाय हिन्दी को स्कूलों-कालेजों में पढ़ाया जाना चाहिए. इस देश का शिक्षाविद, अपना शोध पत्र ...

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भारत में मीडिया स्वामित्व: हालात और चुनौतियां

media

दिलीप ख़ान | मीडिया के पत्रकारिता और उद्योग के पक्ष को अलग–अलग कर नहीं देखने के चलते मिशन, सरोकार और भावुकता जैसे शब्दों को टीवी और प्रिंट के इस साम्राज्य में जब कोई तलाशता है तो उसे असफ़लता हासिल होती है। मीडिया कंपनियां शेयर बाज़ार में ठीक उसी तरह सूचीबद्ध ...

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खेल, तमाशा और ‘चीयरलीडर्स’

IPL

सुशील यति | विस्मय भरे चकाचौंध और आश्चर्य-मिश्रित प्रस्तुतीकरण के साथ आईपीएल के दसवें संस्करण का समापन हुआ, आईपीएल अब सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि अपनी उत्सवधर्मिता और भव्यता के कारण दर्शकों के लिए खेल से कहीं बढ़कर है। दूसरे शब्दों में कहें तो आईपीएल टेलीविजन का एक ऐसा उत्सव जहाँ ...

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ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म की ओर

close up of conference meeting microphones and businessman

मनोज कुमार | ‘ठोंक दो’ पत्रकारिता का ध्येय वाक्य रहा है और आज मीडिया के दौर में ‘काम लगा दो’ ध्येय वाक्य बन चुका है। ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म का यह बदला हुआ स्वरूप हम देख रहे हैं। कदाचित पत्रकारिता से परे हटकर हम प्रोफेशन की तरफ आगे बढ़ ...

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वर्किंग जर्नलिस्टर ऐक्ट  के दायरे में  कब आयेंगे टीवी पत्रकार ?

journalist

उदय चंद्र सिंह | देश में उदारीकरण का दौर शुरु होने के साथ हीं  तमाम उद्योग धंधों की तरह खबरों का बाजार भी खूब चमका । टेलीविजन न्यूज चैनलों की तो जैसे बाढ़ सी आ गई है ।  हर कोई यही कहता फिर रहा है कि टीवी मीडिया बहुत ‘ताकतवर’ ...

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