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विशेष आलेख

अख़बारों से ग़ायब होता साहित्य

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फ़िरदौस ख़ान। साहित्य समाज का आईना होता है। जिस समाज में जो घटता है, वही उस समाज के साहित्य में दिखलाई देता है। साहित्य के ज़रिये ही लोगों को समाज की उस सच्चाई का पता चलता है, जिसका अनुभव उसे ख़ुद द नहीं हुआ है। साथ ही उस समाज की ...

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प्रभावी पत्रकारिता के लिए प्रिंटेड सामग्री अभी भी काफी प्रासंगिक

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राजदीप सरदेसाई समाचार4मी‍डिया ब्यूरो इन दिनों टीवी पर परोसी जा रही न्यू्ज और असली न्यू ज के बीच बहुत बड़ा अंतर है। न्यूतज के नाम पर कई चैनल कुछ भी दिखा रहे हैं। अधिकांश चैनल आपको शोरशराबा, एंटरटेनमेंट और ब्रेकिंग न्यूयज परोस रहे हैं। क्या वे घटना का संदर्भ, उसका ...

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Rethinking international TV flows research in the age of Netflix

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Ramon Lobato (RMIT University)   ramon.lobato@rmit.edu.au   Forthcoming in Television and New Media   April 2017   ABSTRACT This article considers how established methodologies for researching television distribution can be adapted for subscription video-on-demand (SVOD) services. Specifically, I identify a number of critical questions – some old, some new – ...

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मीडिया ने अपनी पत्रकारीय जिम्मेदारी खो दी है

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संतोष भारतीय प्रधान संपादक, चौथी दुनिया वे कैसे संपादक हैं, जो सामने आई स्क्रिप्ट में से सत्य नहीं तलाश सकते या ये नहीं तलाश सकते कि इसमें कहां मिर्च-मसाला मिला हुआ है। आप भारतीय जनता को, भारत के दर्शक को वो दे रहे हैं, जो नहीं देना चाहिए। ये सिर्फ ...

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एक सेलिब्रिटी की मौत पर TRP की दौड़ में लगे चैनलों ने गिराया पत्रकारिता का स्तर

श्रीदेवी

  सुधीर चौधरी   इस बार श्रीदेवी को लेकर इतनी आलोचना हो गई थी कि एक बारगी सबको लग रहा था कि कहीं सोशल मीडिया की आलोचना टीआरपी ना खा जाए। लेकिन बीते गुरुवार को सुबह जैसे ही टीआरपी आई, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के दिग्गज हैरान रह गए। इतना बड़ा उलटफेर पिछले ...

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INTRODUCTION TO COMMUNICATION RESEARCH

Communication-communication

Prof. Devesh Kishore Makhanlal Chaturvedi University of journalism, Bhopal, Research Department, Emeritus “If we knew what it was we were doing, it would not be called research, would it?” – Albert Einstein LEARNING OBJECTIVES After having studied this chapter you should be able to : Define research and explain its ...

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हिन्दी पत्रकारिता में अनुवाद धर्म

हिन्दी पत्रकारिता

प्रियदर्शन ‘फेबुलस फोर’ को हिन्दीध में क्या लिखेंगे? ‘यूजर फ्रेंडली’ के लिए क्यों शब्दफ इस्तेकमाल करना चाहिए? क्या ‘पोलिटिकली करेक्ट ‘ के लिए कोई कायदे का अनुवाद नहीं है? ऐसे कई सवालों से इन दिनों हिंदी पत्रकारिता रोज जूझ रही है। अक्सरर उसे बिल्कु ल सटीक अनुवाद नहीं मिलता और ...

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पूंजी की पत्रकारिता

मीडिया

प्रियदर्शन हिन्दी पत्रकारिता की दुनिया इन दिनों हलचलों से भरी है। जो कभी छोटे और मझोले अखबार कहलाते थे, उनके कई-कई संस्क रण दिखाई पड़ रहे हैं। वे अपने राज्योंख और जिलों की सीमाएं लांघ रहे हैं और दूर-दराज के इलाकों में फैल-पसर रहे हैं। कई जगहों पर वे राष्ट्री ...

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चैनलों की शेरचाल या भेड़चाल

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प्रियदर्शन एक जंगल है, एक इंसान है और कई शेर हैं। शेर इन्सान के साथ खेल रहे हैं। इतने लाड़ से कि यह शख्से उनके बाजुओं, पंजों और पांवों के बीच मुश्किल से दिखाई पड़ रहा है। शाम चार बजे के आसपास एक टीवी चैनल में टिमटिमाता है यह दृश्यर, ...

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विभाजित दुनिया, विखंडित मीडिया

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समकालीन मीडिया परिदृश्य विभाजित दुनिया, विखंडित मीडिया सुभाष धूलिया समकालीन मीडिया परिदृश्य अपने आप में अनोखा और बेमिसाल है। जनसंचार के क्षेत्र में जो भी परिवर्तन आए और जो आने जा रहे है उनको लेकर कोई भी पूर्व आकलन न तो किया जा सका था और ना ही किया जा ...

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“मैं न्यूज़ एंकर नहीं रहा, न्यूज़ क्यूरेटर बन गया हूं”

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रवीश कुमार अख़बार पढ़ लेने से अख़बार पढ़ना नहीं आ जाता है। मैं आपके विवेक पर सवाल नहीं कर रहा। ख़ुद का अनुभव ऐसा रहा है। कई साल तक अख़बार पढ़ने के बाद समझा कि विचारों से पहले सूचनाओं की विविधता ज़रूरी है। सूचनाओं की विविधता आपको ज़िम्मेदार बनाती हैं। ...

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