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टेलीविज़न पत्रकारिता

कैसे नाम पड़ा ‘आज तक’?

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क़मर वहीद नक़वी | ‘आज तक’ का नाम कैसे पड़ा ‘आज तक?’ बड़ी दिलचस्प कहानी है. बात मई 1995 की है. उन दिनों मैं ‘नवभारत टाइम्स,’ जयपुर का उप-स्थानीय सम्पादक था. पदनाम ज़रूर उप-स्थानीय सम्पादक था, लेकिन 1993 के आख़िर से मैं सम्पादक के तौर पर ही अख़बार का काम ...

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आइडिएशन : मैं न्यूज कहां तलाशूं?

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आलोक वर्मा। ऐसा माना जाता है कि बच्चों और नौजवानों पर जितना असर उनकी आसपास की घटनाओं, स्कूल कालेजों या धार्मिक बातों का होता है, इससे भी कहीं ज्यादा असर उन पर टेलीविजन का होता है। इसलिए अगर आप टेलीविजन की दुनिया में आते हैं तो यूं समझ लीजिए कि ...

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टेलीविज़न जर्नलिज्म: रिपोर्टिंग के प्रकार

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शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन | टेलीविजन पर दर्शकों को सभी खबरें एक समान ही दिखती हैं, लेकिन रिपोर्टर के लिए ये अलग मायने रखती है। एक रिपोर्टर हर खबर को कवर नहीं करता। न्‍यूज कवर करने के लिए रिपोर्टर के क्षेत्र (विभाग) जिसे तकनीकी भाषा में ‘बीट’ कहा जाता है, ...

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टीवी जर्नलिज्म : जरूरत से ज्यादा तथ्य या सूचनाएं मत भरिए

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आलोक वर्मा। एक अच्छी स्क्रिप्ट वही है जो तस्वीरों के साथ तालमेल बनाकर रखे। आपको ये बात तो पता ही होगी कि मानव मस्तिष्क का दांया हिस्सा तस्वीरों को रचता और गढ़ता है जबकि मस्तिष्क का बायां हिस्सा भाषा को संभालता है- दोनों मस्तिष्कों का सही संतुलन कायम रहना एक ...

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Modes of Documentary Film

MODES OF DOCUMENTARIES What is a documentary? Webster’s dictionary defines documentary as “consisting of documents: written down.” Wikipedia defines a documentary as “a nonfictional motion picture intended to document some aspects of reality, primarily for the purposes of instruction or maintaining a historical record.” It also opens into the history ...

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What is Documentary?

What is Documentary MODES OF DOCUMENTARIES-FDocumentary is to document with evidence something that has actually happened by using actuality footage or reconstructions. The essential element of a good documentary is simply, the story. The audience must have an intellectual and emotional tie to the film Basic elements: literary design, visual ...

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विजुअल मीडिया: गुणवत्‍ता से समझौता कभी न करें

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मनोरंजन भारती | मैनें उन गिने चुने लोगों में से जिसने अपने कैरियर की शुरूआत टीवी से की। हां, आईआईएससी में पढ़ने के दौरान कई अखबारों के लिए फ्री लांसिंग जरूर की। लेकिन संस्‍थान से निकलते ही विनोद दुआ के परख कार्यक्रम में नौकरी मिल गई। यह कार्यक्रम दूरदर्शन पर ...

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टेलीविज़न पत्रकारिता: ख़बर कई आंखों और हाथों से गुजरते हुए पहुंचती है टीवी स्क्रीन तक

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नीरज कुमार। वरिष्ठ टीवी पत्रकार रवीश कुमार बताते हैं कि जब उन्होंने एनडीटीवी ज्वाइंन किया तो चैनल के स्टूडियो में आकर उन्हें लगा कि वो जैसे नासा में आ गए हैं… रवीश कुमार के अनुभव का जिक्र उन युवाओं के लिए हैं, जो टीवी पत्रकार बनना चाहते हैं। लेकिन, न्यूज ...

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टीवी न्यूज का पर्दा: खबर लिखना किसी बढ़ई का कुर्सी या एक मेज बनाने जैसा

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आलोक वर्मा। खबर को अगर आम लोगों के बीच की आम भावनाओं में डालकर आप लिख सकें तो आपकी खबर का असर बढ़ जाएगा। देखिए खबरों में भी कहानियां ही होती हैं- घर वापसी की खबर, जीत की खबर, हार की खबर, मुश्किलों की खबर- ये सब खबरें कहीं न ...

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जानिए क्या होती हैं टीवी न्यूज़ हेडलाइंस?

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संदीप कुमार टीवी न्यूज का फॉर्मेट, प्रिंट मीडिया के मुकाबले बिल्कुल अलग होता है। यहां शब्दों, कॉलम, पेज में बात नहीं होती बल्कि फ्रेम्स, सेकंड्स, मिनट्स का खेल होता है। प्रिंट में कहा जाता है कि इस खबर को दो कॉलम में ले लो, सिंगल कॉलम में रख लो, तीन ...

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चैनलों की शेरचाल या भेड़चाल

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प्रियदर्शन एक जंगल है, एक इंसान है और कई शेर हैं। शेर इन्सान के साथ खेल रहे हैं। इतने लाड़ से कि यह शख्से उनके बाजुओं, पंजों और पांवों के बीच मुश्किल से दिखाई पड़ रहा है। शाम चार बजे के आसपास एक टीवी चैनल में टिमटिमाता है यह दृश्यर, ...

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