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टेलीविज़न पत्रकारिता

टेलीविज़न प्रोग्राम: परिकल्पना, शोध और कुछ जरूरी मुद्दे

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कुमार कौस्तुभ… साल 2013 में भारत के हिंदी न्यूज़ चैनल एबीपी न्य़ूज़ पर प्रसारित कार्यक्रम प्रधानमंत्री की बेहद तारीफ हुई। भारत की स्वाधीनता के बाद के राजनीतिक-एतिहासिक परिदृश्य पर बनाया गया ये कार्यक्रम कई वजहों से काबिले-तारीफ भी रहा और काबिले-गौर भी। मशहूर फिल्मकार शेखर कपूर की एंकरिंग ने देश ...

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टीवी रिपोर्टिंग सबसे तेज, लेकिन कठिन और चुनौती भरा काम

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शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन | पत्रकारिता में टीवी रिपोर्टिंग आज सबसे तेज, लेकिन कठिन और चुनौती भरा काम है। अखबार या संचार के दूसरे माध्‍यमों की तरह टीवी रिपोर्टिंग आसान नहीं। टेलीविजन के रिपोर्टर को अपनी एक रिपोर्ट फाइल करने के लिए लम्‍बी मशक्‍कत करनी पड़ती है। रिपोर्टिंग के लिए ...

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लोकतन्‍त्र में मीडिया के खतरे

फोटो साभार: openmedia.ca

पुण्‍य प्रसून वाजपेयी | लोकतन्‍त्र का चौथा खम्‍भा अगर बिक रहा है तो उसे खरीद कौन रहा है? और चौथे खम्‍भे को खरीदे बगैर क्‍या सत्‍ता तक नहीं पहुँचा जा सकता है? या फिर सत्‍ता तक पहुँचने के रास्‍ते में मीडिया की भूमिका इतनी महत्‍वपूर्ण हो चुकी है कि बगैर ...

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टेलीविज़न पत्रकारिता: ख़बर कई आंखों और हाथों से गुजरते हुए पहुंचती है टीवी स्क्रीन तक

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नीरज कुमार। वरिष्ठ टीवी पत्रकार रवीश कुमार बताते हैं कि जब उन्होंने एनडीटीवी ज्वाइंन किया तो चैनल के स्टूडियो में आकर उन्हें लगा कि वो जैसे नासा में आ गए हैं… रवीश कुमार के अनुभव का जिक्र उन युवाओं के लिए हैं, जो टीवी पत्रकार बनना चाहते हैं। लेकिन, न्यूज ...

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टीवी न्यूज का पर्दा: खबर लिखना किसी बढ़ई का कुर्सी या एक मेज बनाने जैसा

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आलोक वर्मा। खबर को अगर आम लोगों के बीच की आम भावनाओं में डालकर आप लिख सकें तो आपकी खबर का असर बढ़ जाएगा। देखिए खबरों में भी कहानियां ही होती हैं- घर वापसी की खबर, जीत की खबर, हार की खबर, मुश्किलों की खबर- ये सब खबरें कहीं न ...

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रेडियो समाचार प्रस्तुति : संकलन से लेकर वाचन तक

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महेंद्र नारायण सिंह यादव। आज के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के युग में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से सामान्य तात्पर्य टीवी चैनल ही हो गया है, लेकिन वास्तव में रेडियो भी इसका अभिन्न प्रकार है। सच तो यह है कि टीवी चैनलों का युग शुरू होने से पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का मतलब रेडियो ही ...

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जानिए क्या होती हैं टीवी न्यूज़ हेडलाइंस?

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संदीप कुमार टीवी न्यूज का फॉर्मेट, प्रिंट मीडिया के मुकाबले बिल्कुल अलग होता है। यहां शब्दों, कॉलम, पेज में बात नहीं होती बल्कि फ्रेम्स, सेकंड्स, मिनट्स का खेल होता है। प्रिंट में कहा जाता है कि इस खबर को दो कॉलम में ले लो, सिंगल कॉलम में रख लो, तीन ...

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ब्रेकिंग न्यूज के बहाने…

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उदय चंद्र सिंह | टीवी की दुनिया में खूब अजब-गजब होता है। कभी नोएडा को बंदर खा जाता हैतो कभी तेल लगाने के मुद्दे पर हैदराबाद में  सैकड़ों किसान गिरफ्तारी देते हैं । गजब तो तब हो गया जब एक न्यूज चैनल की  ब्रेकिंग न्यूज की पट्टी पर-  “हीथ्रो हवाई अड्डे पर विमान से ...

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विजुअल मीडिया: गुणवत्‍ता से समझौता कभी न करें

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मनोरंजन भारती | मैनें उन गिने चुने लोगों में से जिसने अपने कैरियर की शुरूआत टीवी से की। हां, आईआईएससी में पढ़ने के दौरान कई अखबारों के लिए फ्री लांसिंग जरूर की। लेकिन संस्‍थान से निकलते ही विनोद दुआ के परख कार्यक्रम में नौकरी मिल गई। यह कार्यक्रम दूरदर्शन पर ...

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आइडिएशन : मैं न्यूज कहां तलाशूं?

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आलोक वर्मा। ऐसा माना जाता है कि बच्चों और नौजवानों पर जितना असर उनकी आसपास की घटनाओं, स्कूल कालेजों या धार्मिक बातों का होता है, इससे भी कहीं ज्यादा असर उन पर टेलीविजन का होता है। इसलिए अगर आप टेलीविजन की दुनिया में आते हैं तो यूं समझ लीजिए कि ...

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टीवी जर्नलिज्म : जरूरत से ज्यादा तथ्य या सूचनाएं मत भरिए

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आलोक वर्मा। एक अच्छी स्क्रिप्ट वही है जो तस्वीरों के साथ तालमेल बनाकर रखे। आपको ये बात तो पता ही होगी कि मानव मस्तिष्क का दांया हिस्सा तस्वीरों को रचता और गढ़ता है जबकि मस्तिष्क का बायां हिस्सा भाषा को संभालता है- दोनों मस्तिष्कों का सही संतुलन कायम रहना एक ...

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टेलीविज़न प्रोडक्शन: कल्पनाओं को हक़ीकत में बदलने का रास्ता

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ओमप्रकाश दास। टेलीविज़न प्रोडक्शन की पटकथा यानी स्क्रिप्ट ही वह हिस्सा है जो विचारों और किसी कहे जाने वाली कहानी को एक ठोस रूप देता है। लेकिन प्रोडक्शन के लिहाज़ से पटकथा में आधारभूत अंतर उसके विषय को लेकर होता है। उदाहरण के लिए किसी काल्पनिक कहानी की स्थिति में ...

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