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प्रो. हर्ष रंजन

प्रो. हर्ष रंजन
प्रो. हर्ष रंजन

प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता और जनसंचार विभाग, शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा।

ज़माने की भीड़ से कुछ अलग करना है और अलग तरीके से करना है इसी सनक ने हर्ष रंजन को पत्रकार बना दिया। अस्सी के दशक के आखिरी सालों में रसायन शास्त्र से स्नातकोत्तर करने के बाद कॉलेज के बाकी संगी साथी जब सिविल सर्विसेज़ और दूसरी प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी में जुटे थे तब हर्ष रंजन पर आकाशवाणी में उद्घोषक बनने की धुन सवार थी। इसी धुन ने उन्हें आकाशवाणी और दूरदर्शन में समाचार वाचक बना दिया। समाचार वाचक बनने के बाद हर्ष को तुरंत ही महसूस होने लगा कि अगर इस दिशा में आगे बढ़ना है तो पहले पत्रकार बनना होगा। दूरदर्शन से पहचान तो मिल ही चुकी थी इसलिये समाचार एजेंसी यूएनआई से जुड़ने में ज़्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी।

डेस्क पर काम करने से जी भरा तो फिर रिपोर्टिंग की और रुख कर लिया। टीवी तब नया नया आ ही रहा था। कुछ अलग करने का जज़्बा ही था कि हर्ष रंजन जल्द ही प्रिंट से उब गये और उन्हें लगा कि बेहतर होगा टीवी के साथ काम करना। फिर 1994 में हर्ष ने अपनी पारी टीवी न्यूज़ एजेंसी एएनआई के साथ शुरू की। बिहार में ब्यूरो चीफ बनाये गये। टीवी के लोग तब कम थे इसीलिये पहचान जल्दी मिल गई। फिर साथ दिया देश के पहले सर्वाधिक चर्चित चारा घोटाले ने। चारा घोटाले पर उस समय सबसे ज़्यादा टीवी न्यूज़ रिपोर्टिंग की एएनआई ने। कई बार तो पटना के अखबार भी हर्ष रंजन की रिपोर्ट का हवाला देकर खबरें छापने लगे। तो यह जलवा था शुरुआती दौर की टीवी रिपोर्टिंग का।

मगर कुछ अलग करने की चाहत हर्ष को दिल्ली ले आई। 1997 में तब के टीवीआई से जुड़े तो एंकर बनकर और चैनेल के बंद होने तक वहीं रहे। फिर साथ मिला आजतक का। पहले डेस्क फिर कोलकाता में ब्यूरो प्रमुख, फिर एसाईन्मेंट डेस्क पर बड़ी ज़िम्मेदारी और फिर आजतक के अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण के संपादकीय प्रभारी। इन सब के बीच में कुछ अलग करने की चाहत ही थी कि हर्ष रंजन ने आजतक मीडिया इंस्टीच्यूट की भी ज़िम्मेदारी लगभग छह वर्षों तक संभाली और तब के न्यूज़ डॉयरेक्टर क़मर वहीद नक़वी के नेतृत्व में 300 से अधिक पत्रकारों की ऐसी पौध तैयार की जो आज देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानो में प्रमुख ज़िम्मेदारियां निभा रहे हैं।

हर्ष रंजन ने बीच के कुछ साल सहारा समय , इंडिया टीवी और लाईव इंडिया के एडिटर-डिजिटल के तौर पर भी बिताये।

कुछ नया करने की तमन्ना ही है कि अब हर्ष पूर्ण रूप से पठन-पाठन के क्षेत्र में आ गये हैं। वर्तमान में शारदा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में फ्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं।

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