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प्रो. पुष्पेश पंत

प्रो. पुष्पेश पंत
प्रो. पुष्पेश पंत

पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कूटनीतिक अध्ययन, सेंटर फार इंटरनेशनल पौलिटिक्स,आर्गनाइजेशन एण्ड डिसआर्मामेंट, स्कूल आफ इंटरनेशनल स्टडीज,जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली.

प्रो. पुष्पेश पंत को दिल्ली विश्वविद्यालय एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अध्यापन का 32 वर्ष का अनुभव है। इन्होंने 25 शोधार्थियों को पी.एच.डी., और 75 छात्रों को एम. फिल. डिग्री के लिए निर्देशित किया है। प्रो. पंत ने जेएनयू के कोर्ट के साथ-साथ कार्यकारी अधिकारी और शैक्षिक परिषदों में सेवा प्रदान की हैं। प्रो. पंत कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल की कार्यकारिणी के सदस्य एवं संस्कृति विभाग, भारत सरकार एवं राष्ट्रीय टेक्नोलोजी मिशन की स्टीअरिंग कमेटी, विज्ञान एवं तकनीकी विभाग, भारत सरकार के सलाहकार भी रहे। प्रो. पंत ने वर्ष 1971 से 1980 तक जे.एन.यू. के अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन स्कूल में आई.एफ.एस. परिवीक्षार्थी प्रशिक्षण के लिए पाठ्यक्रम निदेशक एवं संयुक्त पाठ्यक्रम निदेशक के रूप में कार्य किया। 2001 में आई.एफ.एस. के लिए भारतीय विदेश नीति पर आधारित पाठ्यक्रम की रूपरेखा बनाई। इस पर पहला कार्यक्रम आयोजित कर महत्वाकांक्षी योजना चलायी। इंडियन आकादमी आफ इंटरनेशनल ला एण्ड डिप्लोमैसी, इलेक्ट्रानिक मीडिया सेंटर, लखनऊ विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रवक्ता भी रहे। साथ ही इंस्टिट्यूटफॉर डिफेन्स स्टडीज एण्ड ऐनालिसिस, नई दिल्ली के सदस्य एवं इंडियन काउसिंल आफ वर्ल्ड अफेयर्स नई दिल्ली के भी सदस्य रहे।

प्रो. पंत माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल और नेशनल डिफेन्स कालेज आफ इंडिया के सलाहकार व कमेटी ऑन यूथ टूरिज्म, मिनिस्ट्री आफ टूरिज्म एवं एवीआरसी रुड़की विश्वविद्यालय के सदस्य रहे। प्रोफेसर पंत को ट्रैवल एवं टूरिज्म पर दर्जन भर पुस्तकें प्रकाशित करने का श्रेय जाता है। भोजन एवं यात्रा पर इन्होंने विशेष फोकस किया। इतना ही नहीं, टेलीविजन कार्यक्रमों के लिए भोजन एवं यात्रा पर लेखन एवं एंकरिंग का कार्य किया है। इसके अलावा व्यापक रूप से मीडिया से जुडकर सैकड़ों रेडियो व टेलीविजन के कार्यक्रम दिये हैं।

वर्तमान में प्रो. पंत उत्तराखंड के दूरस्थ्य ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को ध्यान में रखते हुए विज्ञान एवं तकनीकी के अनुप्रयोग के साथ शिक्षा प्रदान करने में जुटे है। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में जानकारी ई-धार कार्यक्रम की परिकल्पना की और इस महत्वाकांक्षी योजना को विज्ञान एवं तकनीकी विभाग की सहायता से पूर्ण किया।

प्रो. पंत ने औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा के अवसर प्रदान करने का भी कार्य किया। वर्तमान में भीमताल, उत्तराखंड के बिरला इंस्टिट्यूट आफ साइंटिफिक रिसर्च के जनशिक्षण संस्थान से जुड़े हुए हैं। प्रो. पंत के शोध पत्र कई नामचीन जर्नलों में प्रकाशित होते रहे हैं। इसके अलावा टाइम्स ऑफ़ इंडिया, इकोनोमिक टाइम्स, हिन्दुस्तान टाइम्स, ट्रिब्यून, एशियन एज, पायनियर, डेक्कन क्रोनिकल, नव भारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर, दिनमान और रविवार जैसे प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित कॉलम और समसामायिक लेख प्रकाशित होते रहे हैं।

प्रो. पंत पांच दशकों से लेखन कार्य में लगे हुए हैं. उन्होने राजनीति और कूटनीति पर लगभग 50 पुस्तकें लिखी हैं।

One comment

  1. विनोद सावंत

    शानदार जबरदस्त जिंदाबाद☺☺☺☺

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