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प्रो. संजीव भानावत

प्रो. संजीव भानावत
प्रो. संजीव भानावत

प्रो. संजीव भानावत राजस्थान विश्वविद्यालय के जन संचार केन्द्र में पत्रकारिता के प्रोफेसर, अध्यक्ष तथा जैन अध्ययन केन्द्र के मानद् निदेशक हैं। गत तीन दशकों से पत्रकारिता शिक्षण-प्रशिक्षण से जुड़े डॉ. भानावत ने अपने समर्पित एवं एकाकी प्रयासों से विश्वविद्यालय में पत्रकारिता का विभाग स्थापित किया जिसमें आज पत्रकारिता एवं जन संचार में दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठयक्रम के अध्यापन तथा शोध अनुसंधान की व्यवस्था है। इस विभाग ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

प्रो. भानावत ने पत्रकारिता विषय से जुड़ी लगभग 30 पुस्तकों का लेखन /संपादन किया है। इनमें पत्रकारिता का इतिहास एवं जन संचार माध्यम, प्रेस कानून और पत्रकारिता, समाचार माध्यमों का संगठन एवं प्रबन्ध, समाचार लेखन के सिद्धान्त और तकनीक, संपादन कला, मीडिया एण्ड रूरल डेवलपमेंट, प्रभावी जनसम्पर्क, मीडिया सीन इन इंडिया-इमरजिंग फेसिट्स, ए कम्पेन्डियम ऑफ कॉड ऑफ कन्डक्ट फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स आदि प्रमुख हैं।

 राजस्थान साहित्य अकादमी के सुमनेष जोषी प्रथम कृति तथा उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ के बाबूराव विष्णु पराडकार पत्रकारिता पुरस्कार, न्यूजपेपर्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया,दिल्ली के मीडिया गुरू तथा पब्लिक रिलेशंस कौंसिल ऑफ इंडिया के हॉल ऑफ फेम, जैन विचार मंच कोलकाता की ओर से गणेश ललवानी सम्मान, भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ के गणेश शंकर विद्यार्थी अवार्ड आदि पुरस्कारों सहित अनेक सामाजिक, शैक्षणिक तथा प्रोफेशनल संस्थाओं से पुरस्कृत हो चुके हैं।

जनवरी, 1997 से प्रो. भानावत एक मीडिया त्रैमासिकी कम्यूनिकेशन टुडेका संपादन कर रहे हैं। जनसंचार केन्द्र की ओर से आपने मीडिया टुडेनाम से एक वार्षिक जर्नल का भी वर्ष 2012 में प्रकाशन प्रारंभ किया है। राजस्थान विश्वविद्यालय के़ त्रैमासिक न्यूज लेटर ग्लिम्पसेसका भी आपने संपादन किया है। मूल्यानुगत मीडिया मासिक, ट्‍रिनिटि जर्नल ऑफ मैनेजमेन्ट, आई टी एण्ड मीडिया, तथा एमिटी जर्नल ऑफ मीडिया एण्ड कम्यूनिकेशन स्टडीज, राजस्थान विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान शोध केन्द्र के वार्षिक जर्नल सोशल साइंस एक्सप्लोररतथा संचार एजुकेशन एंड रिसर्च फांउडेशन लखनऊ के द्विभाषी त्रैमासिक जर्नल संचार बुलेटिनके सलाहकार संपादक/सम्पादक मण्डल के सदस्य के रूप में आप सम्बद्ध हैं।

प्रो. भानावत ने राष्ट्रीय अन्तरराष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों में न सिर्फ भागीदारी की है वरन् गत 25 वर्षों में आपने अनेक अन्तरराष्ट्रीय एजेन्सियों के साथ मिलकर मीडिया से जुड़े विविध विषयों पर महत्त्वपूर्ण संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं का आयोजन कर इस क्षेत्र में एक नयी वैचारिक चेतना को शुरू करने का प्रयत्न किया है। आकाशवाणी तथा दूरदर्शन से आप लगभग चार दशक से जुडे़ है। दूरदर्शन के राष्ट्रीय कार्यक्रम में भी कार्यक्रम प्रसारित हुए हैं। उन्हें लोकसभा एवं विधानसभा के चुनावों के दौरान राजनैतिक प्रसारणों की संमीक्षा के लिए आकाशवाणी महानिदेशालय की ओर से समय-समय पर विशेषज्ञ मनोनीत किये गये है। प्रो. भानावत पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इंडिया के जयपुर स्कन्ध के अध्यक्ष रह चुके हैं तथा वर्तमान में वे इसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। प्रो. भानावत विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक तथा प्रोफेशनल संगठनों से जुड़े हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. भानावत का महत्त्वपूर्ण योगदान है – अपने माता-पिता डॉ. शान्ता भानावत तथा डॉ. नरेन्द्र भानावत की स्मृति में एक उच्च स्तरीय शोध संस्थान की स्थापना। उनके इस संस्थान में करीब 13 हजार सन्दर्भ ग्रन्थ उपलब्ध हैं जो हिन्दी राजस्थानी तथा जैन साहित्य सहित पत्रकारिता सम्बन्धी विषयों पर शोध कार्य करने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्त्वपूर्ण संस्थान है।

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