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Tag Archives: भाषा

टीवी जर्नलिज्म : जरूरत से ज्यादा तथ्य या सूचनाएं मत भरिए

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आलोक वर्मा। एक अच्छी स्क्रिप्ट वही है जो तस्वीरों के साथ तालमेल बनाकर रखे। आपको ये बात तो पता ही होगी कि मानव मस्तिष्क का दांया हिस्सा तस्वीरों को रचता और गढ़ता है जबकि मस्तिष्क का बायां हिस्सा भाषा को संभालता है- दोनों मस्तिष्कों का सही संतुलन कायम रहना एक ...

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भाषाई पत्रकारिता: “अंग्रेजी इस देश में सोचने-समझने की भाषा तो हो सकती है लेकिन महसूस करने की नहीं”

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सुरेश नौटियाल। कई साल पहले, ब्रिटिश उच्चायोग के प्रेस एवं संपर्क विभाग ने नई दिल्ली में “भाषाई पत्रकारिता: वर्तमान स्वरूप और संभावनाएं“ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया था। जनसत्ता के सलाहकार संपादक प्रभाष जोशी ने इस गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा था कि मैंने अपनी जिंदगी के नौ ...

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समय के साथ बदली हिंदी पत्रकारिता की भाषा

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संजय कुमार। हालांकि, इलैक्टोनिक मीडिया में आम बोलचाल की भाषा को अपनाया जाता है। इसके पीछे तर्क साफ है कि लोगों को तुंरत दिखाया/सुनाया जाता है यहाँ अखबार की तरह आराम से खबर को पढ़ने का मौका नहीं मिलता है। इसलिए रेडियो और टी.वी. की भाषा सहज, सरल और बोलचाल ...

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संस्मरण : पत्रकारिता में नए शब्द-विन्यास और भाषा का योगदान

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सुरेश नौटियाल। किसी भी भाषा को जीवंत बनाए रखने के लिये उसमें नए-नए प्रयोग होते रहने चाहिए। उसमें नये-नये शब्द जुड़ते रहने चाहिये। यदि आप हिंदी साहित्य को देखें तो पाएंगे कि इसे उर्दू, भोजपुरी, मैथिली, राजस्थानी, गढवाली, कुआउंनी, जैसी सुदूरांचल भाषाओं और मराठी, बंगला, पंजाबी जैसी अनेक भगिनी भाषाओं ...

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भाषा की बधिया वक्‍त के सामने बैठ जाती है

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कुमार मुकुल। धूमिल ने लिखा है – भाषा की बधिया वक्‍त के सामने बैठ जाती है। इधर हिन्‍दी के लेखक, कवि और पत्रकार जिस तरह भाषा को बरत रहे हैं उसे देखकर उसकी बधिया बैठती नजर आती है। अपने एक वरिष्‍ट और प्रिय कवि के यहां भी जब एक कविता ...

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ख़बरिया चैनलों की भाषा

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अतुल सिन्हा। करीब डेढ़ दशक पहले जब टेलीविज़न न्यूज़ चैनल्स की शुरुआत हुई तो इसकी भाषा को लेकर काफी बहस मुबाहिसे हुए … ज़ी न्यूज़ पहला न्यूज़ चैनल था और यहां जो बुलेटिन बनते थे उसमें हिन्दी के साथ साथ अंग्रेज़ी भी शामिल होती थी जिसे बोलचाल की भाषा में ...

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हिन्दी सिनेमा की भाषा के विभिन्न आयाम

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सुशील यती। हिंदी ‘पॉपुलर’ सिनेमा मुख्य तौर पर ‘नरेटीव’ सिनेमा है, जिसमे कहानी महत्वपूर्ण होती है। दूसरे शब्दों में कहे तो विभिन्न ‘प्रॉडक्शन’ तकनीक, कैरेक्टर (किरदार), और कहानी के विभिन्न तत्व मिलकर एक कथानक (नरेटीव) का निर्माण करते है, जिसे सिनेमा की भाषा मे ‘नरेटीव’ कहा जाता है। फिल्म कथानक ...

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