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Tag Archives: मीडिया

मीडिया अध्ययन के यक्ष प्रश्न

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डॉ. देवव्रत सिंह। दुनिया भर में अमेरिका और यूरोप में मीडिया शिक्षण की दो अलग-अलग धाराएं विद्यमान रही हैं। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की धाराएं भी बाद में इन दोनों में ही मिल गयीं। अमेरिकी परंपरा के अनुसार मीडिया शिक्षण में क्राफ्ट पर जोर रहा है। जिसमें मीडिया प्रॉडक्शन और पत्रकारिता ...

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समकालीन हिन्‍दी मीडिया की चुनौतियां

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प्रियदर्शन। हिन्‍दी और भाषाई मीडिया के लिए यह विडंबना दोहरी है। जो शासक और नीति-नियंता भारत है, वह अंग्रेजी बोलता है। इस अंग्रेजी बोलने वाले समाज के लिए साधनों की कमी नहीं है। वह इस देश की राजनीति चलाता है, वह इस देश में संस्‍कृति और साहित्‍य के मूल्‍य तय ...

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संचार के दायरे को तोड़ता सोशल मीडिया

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विनीत उत्पल। सोशल मीडिया एक तरह से दुनिया के विभिन्न कोनों में बैठे उन लोगों से संवाद है जिनके पास इंटरनेट की सुविधा है। इसके जरिए ऐसा औजार पूरी दुनिया के लोगों के हाथ लगा है, जिसके जरिए वे न सिर्फ अपनी बातों को दुनिया के सामने रखते हैं, बल्कि ...

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परंपराओं से टकराती वेब मीडिया

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ओमप्रकाश दास। “यह कहा जा सकता है कि भारत में वेब पत्रकारिता ने एक नई मीडिया संस्कृति को जन्म दिया है। अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी पत्रकारिता को भी एक नई गति मिली है। अधिक से अधिक लोगों तक इंटरनेट की पहुंच हो जाने से यह स्पष्ट है कि वेब पत्रकारिता ...

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वास्‍तविक खतरे के आभासी औजार

twitter

अभिषेक श्रीवास्‍तव। ”मेरे ख्‍याल से हमारे लिए ट्विटर की कामयाबी इसमें है, जब लोग इसके बारे में बात करना बन्‍द कर दें, जब हम ऐसी परिचर्चाएं करना बन्‍द करें और लोग इसका इस्‍तेमाल सिर्फ एक उपयोगितावादी औजार के रूप में करने लगें, जैसे वे बिजली का उपयोग करते हैं। जब ...

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भूमण्‍डलीकरण, पूंजी और मीडिया

globlization

अकबर रिज़वी। मुख्‍यधारा का मीडिया दरअसल पिछले दो-ढाई दशकों में पॉप मीडिया के रूप में ढल गया है। इसे पॉप म्‍यूजिक और फास्‍ट फूड की तरह ही देखा जाना चाहिए। यह उसी नव-पूँजीवाद की कल्‍चर इंडस्‍ट्री में निर्मित मीडिया है, जिसका उद्देश्‍य लोगों को सूचना देना, शिक्षित करना या स्‍वस्‍थ ...

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महिला विकास और सशक्तिकरण एवं जनमाध्यम

Media-and-Women-Empowerment

निभा सिन्हा। समकालीन संदर्भ में जनसंचार के विभिन्न माध्यमों में विज्ञापनों ने महिलाओं को उपभोग की वस्तु के रूप में लगातार प्रस्तुत कर नकारात्मकता पैदा करने का काम किया है। विज्ञापनों को देखे तो उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए महिलाओं के शरीर का उपयोग किया जा रहा है आजादी ...

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आदिवासी क्षेत्र की समस्याएं और मीडिया

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स्वर्णताभ कुमार। हजारों वर्षों से जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले आदिवासियों को हमेशा से दबाया और कुचला जाता रहा है जिससे उनकी जिन्दगी अभावग्रस्त ही रही है। इनका खुले मैदान के निवासियों और तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले लोगों से न के बराबर ही संपर्क रहा है। केंद्र ...

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मीडिया के बदलते आयाम

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आलोक वर्मा। आज पूरी दुनिया में शायद एक थी ऐसी जगह ढूंढ पाना मुश्किल होगा जहां मीडिया और संचार के तमाम माध्यम अपनी पैठ न चुके हों। हम कहीं भी जाएं, किसी से भी मिल-मीडिया और संचार के माध्यम हमे अपने आस-पास नजर आ ही जाते हैं। मीडिया के कई ...

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राजनीति के मीडियाकरण का दौर: सरकारी योजनाओं पर आलोचनात्मक क्यों नहीं है मीडिया?

Media-Government

सीमा भारती। इन दिनों टेलीविज़न पर प्रधानमंत्री के स्वच्छता मिशन से सम्बद्ध एक विज्ञापन दिखाया जा रहा है। इस विज्ञापन में “जहां सोच वहां शौचालय” के टैग लाइन के साथ शौचालय बनवाओ और इस्तेमाल करो की बात कही जाती है। संदेश देने वाली अभिनेत्री विद्या बालन है, जिसकी छवि एक ...

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अखबार की भाषा : कैसे चुस्त बनाएं?

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कुमार मुकुल। बाजार के दबाव में आज मीडिया की भाषा किस हद तक नकली हो गयी है इसे अगर देखना हो तो हम आज केअखबार उठा कर देख सकते हैं। उदाहरण के लिए कल तक भाषा के मायने में एक मानदंड के रूप में जाने जाने वाले एक अख़बार ही ...

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