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Tag Archives: सोशल मीडिया

पत्रकारों का भविष्य और भविष्य की पत्रकारिता

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दिलीप मंडल।… सूचनाओं और समाचार का प्राथमिक स्रोत सोशल मीडिया बनता जा रहा है। फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन जैसे माध्यम अब बड़ी संख्या में लोगों के लिए वह जरिया बन चुके हैं, जहां उन्हें देश, दुनिया या पड़ोस में होने वाली हलचल की पहली जानकारी मिलती है। ऐसे लोग कई बार ...

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संचार के दायरे को तोड़ता सोशल मीडिया

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विनीत उत्पल। सोशल मीडिया एक तरह से दुनिया के विभिन्न कोनों में बैठे उन लोगों से संवाद है जिनके पास इंटरनेट की सुविधा है। इसके जरिए ऐसा औजार पूरी दुनिया के लोगों के हाथ लगा है, जिसके जरिए वे न सिर्फ अपनी बातों को दुनिया के सामने रखते हैं, बल्कि ...

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सोशल मीडिया: लिखिए अवश्य पर जोखिम समझते हुए, न्यायालय से तो मिली आजादी

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अटल तिवारी। उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बरकरार रखने वाला एक ऐतिहासिक फैसला दिया है। अपने इस फैसले के जरिए न्यायालय ने साइबर कानून की धारा 66 (ए) निरस्त कर दी है, जो सोशल मीडिया पर कथित अपमानजनक सामग्री डालने पर पुलिस को किसी भी शख्स ...

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सोशल मीडिया एवं हिन्दी विमर्श

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–डॉ॰रामप्रवेश राय जिस प्रकार हमारी फिल्मों/सिनेमा मे स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार ‘एंटेरटेनमेंट’ का तड़का लगता है कुछ उसी प्रकार हिन्दी के बारे मे बात–चीत करते समय हिन्दी–अंग्रेज़ी की प्रतिस्पर्धा का भाव आ जाता है। ऐसा शायद इसलिए भी होता है कि अंग्रेज़ी और यूरोपीय भाषाएँ आधुनिकता के द्योतक के ...

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सोशल मीडिया : स्वरूप और संभावनाएं

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डॉ. सुशील उपाध्याय। मीडिया को मोटे तौर पर तीन हिस्सों में बांट सकते हैं-श्रव्य, दृश्य-श्रव्य और पठ्य। लेकिन, तकनीकी तौर पर इसे दो हिस्सों में ही बांटना चाहिए। वो है- लिखित मीडिया और दृश्यमान मीडिया मनुष्य के रूप में हमारी सबसे बड़ी खूबी है-पांच इंद्रियों के माध्यम से संचार करना। ...

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ट्विटर पर जरा संभलकर

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मधुरेन्द्र सिन्हा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्वीटर इन दिनों खूब चर्चा में है। सुपरस्टार सलमान खान को अदालत ने सजा क्या सुनाई, इस पर तो जैसे भूचाल आ गया। हजारों लोग ट्वीटर पर आकर अपने-अपने विचार व्यक्त करने लगे। इतनी बड़ी बात पर विचारों में टकराव होना स्वाभाविक है लेकिन इस ...

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सोशल मीडिया : खबरों की चौपाल

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धनंजय चोपड़ा। माना जा रहा है कि वर्ष 2040 में प्रिंट न्यूज पेपर दुनिया से विदा हो जायेगा। दुनिया का कोई भी कागजी अखबार तब तक नहीं बचेगा। सब कुछ डिजिटल हो चुका होगा। बीसवीं सदी के मध्य में संचार शास्त्री मार्शल मैक्लुहान ने घोषणा की थी कि संचार माध्यम ...

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क्या ख़ास है वेब दुनिया में?

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शिवप्रसाद जोशी और शालिनी जोशी |  वेब पत्रकारिता कोई कम्प्यूटर पर अख़बार नहीं है. न ही ये ब्राउज़र से संचालित कोई प्रसारण केंद्र है. ये पारंपरिक मीडिया से कई मानों में भिन्न हैः अपनी क्षमता, लचीलेपन, तात्कालिकता, स्थायित्व और पारस्परिकता से. क्षमताः अख़बार का एक रिपोर्टर अपनी स्टोरी को पांच ...

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यहाँ जानिए दुनियाभर में ई- न्यूज़पेपर के विकास की कहानी

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डॉ. कीर्ति सिंह | प्रिंट पत्रकारिता सभी प्रकार की पत्रकारिताओं की जननी है। ऑनलाइन होने के मुकाम तक पहुंचने के लिए इसे सालों का सफर तय करना पड़ा। स्वरूप, प्रस्तुतिकरण, विषय वस्तु में निरंतर बदलाव करके और नई-नई तकनीकों के साथ सामंजस्य स्थापित कर प्रिंट पत्रकारिता सर्वाधिक परिवर्तन के दौर ...

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तो इसे कहते हैं TRP?

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डॉ. देव  व्रत  सिंह |  भारतीय मीडिया में पिछले एक दशक के दौरान टेलीविजन के संदर्भ में यदि किसी एक शब्दावली का सबसे अधिक प्रयोग हुआ है तो वो है टीआरपी यानी टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट। बार-बार टेलीविजन निर्माता टीआरपी का बहाना बनाकर या तो किसी कार्यक्रम को बंद कर देते ...

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मीडिया  का व्यापारीकरण: पाठक-दर्शक बने सिर्फ उपभोक्ता

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कपिल शर्मा | बात साल 2007 में दिल्ली के दरियागंज के सर्वोदय राजकीय विधालय में सेक्स रैकेट चलाने के झूठे स्ट्रींग ऑपरेशन से प्रेसमीडिया ट्रायल की शिकार महिला शिक्षिका की हो या 2011-12 में नीरा राडिया टेप के खुलासों के बाद बड़े प्रेस मीडिया घरानों की विश्वसनीयता पर खड़े हुए ...

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इंटरनेट पर समाचार पारम्परिक शैली से कैसे अलग हैं?

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शालिनी जोशी | वेब समाचार आखिर पारंपरिक मीडिया के समाचारों से कैसे अलग है. इसमें ऐसा क्या विशिष्ट है जो इसे टीवी, रेडियो या अख़बार की ख़बर से आगे का बनाता है, उसे और व्यापक बना देता है. कहने को तो वेब समाचार वैसा ही है जैसा पारंपरिक मीडिया का ...

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