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Tag Archives: Alok Verma

आइडिएशन : मैं न्यूज कहां तलाशूं?

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आलोक वर्मा। ऐसा माना जाता है कि बच्चों और नौजवानों पर जितना असर उनकी आसपास की घटनाओं, स्कूल कालेजों या धार्मिक बातों का होता है, इससे भी कहीं ज्यादा असर उन पर टेलीविजन का होता है। इसलिए अगर आप टेलीविजन की दुनिया में आते हैं तो यूं समझ लीजिए कि ...

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टीवी जर्नलिज्म : जरूरत से ज्यादा तथ्य या सूचनाएं मत भरिए

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आलोक वर्मा। एक अच्छी स्क्रिप्ट वही है जो तस्वीरों के साथ तालमेल बनाकर रखे। आपको ये बात तो पता ही होगी कि मानव मस्तिष्क का दांया हिस्सा तस्वीरों को रचता और गढ़ता है जबकि मस्तिष्क का बायां हिस्सा भाषा को संभालता है- दोनों मस्तिष्कों का सही संतुलन कायम रहना एक ...

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डेडलाइन को ध्यान में रखकर लिखना

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आलोक वर्मा | काम के साथ-साथ ही लिखते जाइए जब डेडलाइन सर पर हो तो टुकड़ो में लिखना सीखिए। जैसे-जैसे काम होता जाए आप स्टोरी लिखते जाएं। मान लीजिए कि आपने किसी से फोन पर अपनी स्टोरी के सिलसिले में कुछ पूछा है और दूसरी तरफ से थोड़ा समय लिया ...

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मैं मुख्य समाचारों को कैसे पेश करूं- हेडलाइंस

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आलोक वर्मा |  लीड लिखना: लीड की हिंदी मत बनाइए, इसे लीड कहकर ही समझिए क्योंकि इसी शब्द का हर जगह इस्तेमाल होता है। लीड लिखने का मतलब है स्टोरी को शुरू करना…आप कैसे शुरू करें!! कई कापी एडीटर्स का ये मानना है कि अगर आपकी स्टोरी शूरू में ही धड़ाम ...

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टीवी न्यूज का पर्दा: खबर लिखना किसी बढ़ई का कुर्सी या एक मेज बनाने जैसा

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आलोक वर्मा। खबर को अगर आम लोगों के बीच की आम भावनाओं में डालकर आप लिख सकें तो आपकी खबर का असर बढ़ जाएगा। देखिए खबरों में भी कहानियां ही होती हैं- घर वापसी की खबर, जीत की खबर, हार की खबर, मुश्किलों की खबर- ये सब खबरें कहीं न ...

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मीडिया के बदलते आयाम

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आलोक वर्मा। आज पूरी दुनिया में शायद एक थी ऐसी जगह ढूंढ पाना मुश्किल होगा जहां मीडिया और संचार के तमाम माध्यम अपनी पैठ न चुके हों। हम कहीं भी जाएं, किसी से भी मिल-मीडिया और संचार के माध्यम हमे अपने आस-पास नजर आ ही जाते हैं। मीडिया के कई ...

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