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Tag Archives: Dr. Devvrat Singh

मीडिया अध्ययन के यक्ष प्रश्न

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डॉ. देवव्रत सिंह। दुनिया भर में अमेरिका और यूरोप में मीडिया शिक्षण की दो अलग-अलग धाराएं विद्यमान रही हैं। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की धाराएं भी बाद में इन दोनों में ही मिल गयीं। अमेरिकी परंपरा के अनुसार मीडिया शिक्षण में क्राफ्ट पर जोर रहा है। जिसमें मीडिया प्रॉडक्शन और पत्रकारिता ...

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एफ.एम. क्रांति से हुआ रेडियो का पुनर्जन्म

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डॉ. देवव्रत सिंह। रेडियो शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द रेडियस से हुई है। रेडियस का अर्थ है एक संकीर्ण किरण या प्रकाश स्तंभ जो आकाश में इलैक्ट्रो मैग्नेटिक तरंगों द्वारा फैलती है। ये विद्युत चुंबकीय तरंगे संकेतों के रूप में सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ...

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अपने गिरेबान में भी झांकें टेलीविजन चैनल

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डॉ. देवव्रत सिंह। कई चैनलों में पत्रकारों को महीनों तक नाइट डयूटी पर रखा जाता है। इसी फार्मूले के मुताबिक कुछ लोगों को अच्छा वेतन दिया जाता है और बाकी अधिकांश स्टाफ को न्यूनतम वेतन पर रखा जाता है। वेतन 5000 रूपये से दो लाख तक हो सकता है। युवा ...

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डिजिटल घोड़े पर सवार भारतीय सिनेमा : कारोबार के सारे समीकरण बदले

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डॉ. देवव्रत सिंह। आजकल फिल्म निर्माता फिल्म के अंदर भी अनेक उत्पाद के विज्ञापन करने लगे हैं। ये विज्ञापन कहानी के साथ इस प्रकार गुंथे हुए होते हैं कि कई बार दर्शकों को ये अहसास तक नहीं होता कि उन्होंने विज्ञापन देखा है। अगर निर्माता पांच ब्रांडों को अपनी फिल्म ...

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परंपरागत संचार – अस्तित्व के लिए संघर्षरत

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डॉ. देवव्रत सिंह। संचार किसी भी समाज की आधारभूत आवश्यकता है। ये भी कहा जा सकता है कि संचार समाज के निर्माण की पहली शर्त है। सदियों से अलग-अलग समाजों ने संचार के लिए विशिष्ट माध्यमों को विकसित किया है। आदिम समाजों में सामूहिक नृत्य-गायन और भोजन करना संचार का ...

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मोबाइल कम्युनिकेशन : शिष्टाचार सीखना भी है जरूरी

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डॉ. देवव्रत सिंह। हाल ही में दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने भारत के सभी मोबाइल प्रदाता कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने ग्राहकों को मोबाइल शिष्टाचार का पाठ पढायें। सार्वजनिक जीवन में प्रत्येक व्यक्ति अब ये महसूस करने लगा है कि मोबाइल सुविधा बनने के साथ-साथ असुविधाजनक भी साबित ...

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