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Where Does News Come From?

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An idea is an angle about a subject that you believe will interest the readers of your newspaper. Without new ideas the editorial pages would be pretty dull. But where do ideas come from? And how do you find them? When you are lucky, an idea can sometimes find you. ...

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संवेदनशीलता चाहिए पत्रकारिता में !

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सुरेश नौटियाल। समाचार लिखते समय ऑब्जेक्टिव होना अत्यंत कठिन होता है, चूंकि पत्रकार की निजी आस्था और प्रतिबद्धता कहीं न कहीं अपना असर दिखाती हैं। इसी सब्जेक्टिविटी के कारण एक ही समाचार को दस संवाददाता दस प्रकार से लिखते हैं। पर, उद्देश्य और नीयत खबर को सही प्रकार और सार्वजनिक ...

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पत्रकारिता मिशन नहीं प्रोफेशन है

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मधुरेन्द्र सिन्हा। टेक्नोलॉजी ने दुनिया की तस्वीर बदल दी है। ऐसे में पत्रकारिता भला कैसे अछूती रहती। यह टेक्नोलॉजी का ही कमाल है कि दुनिया के किसी भी कोने की घटना की खबर पलक झपकते ही सारे विश्व में फैल जाती है। दरअसल पत्रकारिता संवाद का दूसरा नाम ही तो ...

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नए दौर की पत्रकारिता?

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अतुल सिन्हा। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि देश में साहित्य, संस्कृति, विकास से जुड़ी खबरें या लोगों में सकारात्मक सोच भरने वाले कंटेट नहीं दिखाए जा सकते? कौन सा ऐसा दबाव है जो मीडिया को नेताओं के इर्द गिर्द घूमने या फिर रेटिंग के नाम पर जबरन ‘कुछ भी’ ...

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Evolution of PR in India and its present status

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Professor Jaishri Jethwaney | The globalization of the Indian economy in the 1990s gave its rightful place to PR in India. The emergence of multi-national corporations on the scene in the early 1990s, the opportunities of foreign direct investment increased especially with the deregulation of industries. The market became suddenly ...

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वीरेन दा का जाना : आएंगे उजले दिन, ज़रूर आएंगे…

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अतुल सिन्हा। वीरेन डंगवाल उन पत्रकारों में कभी नहीं रहे जो सत्ता और सियासत के इर्द गिर्द अपनी पत्रकारिता को किसी ख़ास ‘मकसद’ से करते हैं। आजकल तो वैसे भी संस्थागत पत्रकारिता के अपने मायने हैं। पहले भी थे, लेकिन अब विशुद्ध रूप से व्यावसायिक हितों से जुड़े हैं। पत्रकार ...

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संस्मरण : पत्रकारिता में नए शब्द-विन्यास और भाषा का योगदान

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सुरेश नौटियाल। किसी भी भाषा को जीवंत बनाए रखने के लिये उसमें नए-नए प्रयोग होते रहने चाहिए। उसमें नये-नये शब्द जुड़ते रहने चाहिये। यदि आप हिंदी साहित्य को देखें तो पाएंगे कि इसे उर्दू, भोजपुरी, मैथिली, राजस्थानी, गढवाली, कुआउंनी, जैसी सुदूरांचल भाषाओं और मराठी, बंगला, पंजाबी जैसी अनेक भगिनी भाषाओं ...

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बाजारी ताकतों का पत्रकारिता पर प्रभाव

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अन्नू आनंद। बाजारी ताकतों का पत्रकारिता पर प्रभाव निरंतर बढ़ा है। प्रिंट माध्यम हो या इलेक्ट्रॉनिक अब विषय-वस्तु (कंटेंट) का निर्धारण भी प्रायः मुनाफे को ध्यान में रखकर किया जाता है। कभीसंपादकीय मसलों पर विज्ञापन या मार्केटिंग विभाग का हस्तक्षेप बेहद बड़ी बात मानी जाती थी।प्रबंधन विभाग संपादकीय विषयों पर ...

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ताक में पत्रकारिता, तकनीकी का दौर

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मनोज कुमार। साल 1826, माह मई की 30 तारीख को ‘उदंत मार्तंड’ समाचार पत्र के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता का श्रीगणेश हुआ था। पराधीन भारत को स्वराज्य दिलाने की गुरुत्तर जवाबदारी तब पत्रकारिता के कांधे पर थी। कहना न होगा कि हिन्दी पत्रकारिता ने न केवल अपनी जवाबदारी पूरी ...

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आदिवासी क्षेत्र की समस्याएं और मीडिया

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स्वर्णताभ कुमार। हजारों वर्षों से जंगलों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले आदिवासियों को हमेशा से दबाया और कुचला जाता रहा है जिससे उनकी जिन्दगी अभावग्रस्त ही रही है। इनका खुले मैदान के निवासियों और तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले लोगों से न के बराबर ही संपर्क रहा है। केंद्र ...

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पत्रकारिता की विसंगतियों के केंद्र में है उसका कारोबार

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प्रमोद जोशी। मार्शल मैकलुहान के अनुसार पत्रकारिता पहला औद्योगिक उत्पाद है। यानी बाजार में बेचा जाने वाला और बड़े स्तर पर तैयार होने वाला माल। पाठकों का एक बड़ा बाजार है, जिन्हें जानकारी की जरूरत है। यह जानकारी उनके आसपास की हो सकती है और वैश्विक भी। इसमें सामान्य राजनीतिक, ...

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नव पत्रकारों के लिए विशेष

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भगवती प्रसाद डोभाल। पत्रकारिता का पेशा अपनाने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देने की आवश्‍यकता है। कुछ वर्षों पूर्व पत्रकारिता के षिक्षण संस्थान बहुत कम थे। या कहें कि इतने बड़े देश और उसकी आवादी के हिसाब से पत्रकारिता शिक्षण संस्थान ना के बराबर थे। सहत्तर के दशक में ...

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