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Tag Archives: Mainstream Literature

सस्ता साहित्य और मुख्यधारा साहित्य

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अनिल यादव। मिलिट्री डेयरी फार्म, सूबेदारगंज, इलाहाबाद। लौकी की लतरों से ढके एस्बेस्टस शीट की ढलानदार छतों वाले उन एक जैसे स्लेटी, काई से भूरे मकानों का शायद कोई अलग नंबर नहीं था। हर ओर ऊंची पारा और लैंटाना घास थी। कंटीले तारों से घिरे खेत थे जिनके आगे बैरहना ...

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लुगदी या लोकप्रिय : मुख्यधारा के मुहाने पर

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स्वतंत्र मिश्र लुगदी कहकर जिस साहित्य को अब तक खारिज किया जाता रहा, उसे मुख्यधारा में तवज्जो मिलने लगी है। वर्दी वाला गुंडा, पतझड़ का सावन, सूरजमुखी, प्सासी नदी, प्यासे रास्ते, झील के उस पार, शर्मीली, चिंगारी, पाले खां, चेंबूर का दादा, लाल निशान, नरक का जल्लाद, पिशाच का प्यार, ...

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