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Tag Archives: Pramod Joshi

राजनीतिक-आर्थिक शक्ति और भाषा

Indian-Languages

प्रमोद जोशी। करीब डेढ़ हजार साल पहले यूरोप में उत्तरी और पश्चिम जर्मनी के एंग्लो सैक्सन कबीले और कुछ रोमन फौजियों ने इंग्लैंड और पूर्वी स्कॉटलैंड के आसपास रिहाइश शुरू की तो संवाद की कुछ अनगढ़ और गँवारू बोलियाँ विकसित हुईं। इनमें एक अंग्रेजी भी थी, जो ग्रीक और लैटिन ...

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ग्लोबल सीढ़ी पर चढ़ती हिन्दी

hindi-global

प्रमोद जोशी | दुनिया के तकरीबन 150 विश्वविद्यालयों और सैकड़ों केन्द्रों में हिन्दी का अध्ययन, अध्यापन हो रहा है। विदेशों से 25 से अधिक पत्र-पत्रिकाएं हिन्दी में प्रकाशित हो रही हैं। बीबीसी, जर्मनी के डॉयचे वेले, जापान के एनएचके वर्ल्ड, चीन के रेडियो इंटरनेशनल, रूसी रेडियो और ईरानी रेडियो की हिन्दी सेवाओं ...

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पत्रकारिता की विसंगतियों के केंद्र में है उसका कारोबार

Business-Model

प्रमोद जोशी। मार्शल मैकलुहान के अनुसार पत्रकारिता पहला औद्योगिक उत्पाद है। यानी बाजार में बेचा जाने वाला और बड़े स्तर पर तैयार होने वाला माल। पाठकों का एक बड़ा बाजार है, जिन्हें जानकारी की जरूरत है। यह जानकारी उनके आसपास की हो सकती है और वैश्विक भी। इसमें सामान्य राजनीतिक, ...

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