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Tag Archives: Public Relation

समाचार लेखन : कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे?

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सुभाष धूलिया। परंपरागत रूप से बताया जाता है कि समाचार उस समय ही पूर्ण कहा जा सकता है जब वह कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे सभी प्रश्नों या इनके उत्तर को लेकर लोगों की जिज्ञासा को संतुष्ट करता हो। हिंदी में इन्हें छह ककार ( Five W and ...

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साक्षात्कार लेना भी एक कला है…

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महेंद्र नारायण सिंह यादव। पत्रकारिता में साक्षात्कार लेना सबसे महत्वपूर्ण और सर्वाधिक इस्तेमाल में आने वाला कार्य है। साक्षात्कार औपचारिक हो सकता है, जो साक्षात्कार के रूप में सीधे ही प्रकाशित या प्रसारित किया जाता है, और अनौपचारिक भी हो सकता है, जिसके जरिए मिलने वाली जानकारी को पत्रकार अपनी ...

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चुनाव-सर्वेक्षणों की होड़ में पिचकती पत्रकारिता

opinion-poll

उर्मिलेश | राजनीतिक दलों या नेताओं के जीतने-हारने या उनकी सीटों के पूर्वानुमान लगाने वाले ओपिनियन-पोल राजनीति और राजनेताओं के लिए कितने फायदेमंद या नुकसानदेह हैं, इस पर विवाद हो सकता है। लेकिन एक पत्रकार के रूप में मैं अपने अनुभव की रोशनी में बेहिचक कह सकता हूं कि चुनाव-अधिसूचना ...

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दुनिया एक, स्वर अनेक : संचार और समाज, ऐतिहासिक आयाम

International-Communication

Many Voices One World, also known as the MacBride report, was a UNESCO publication of 1980 but still relevant to understand contemporary communication issues. The publication is a classic in the study of communication. The commission was chaired by Irish Nobel laureate Seán MacBride. Among the problems the report identified were concentration of the media, ...

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विजुअल मीडिया: गुणवत्‍ता से समझौता कभी न करें

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मनोरंजन भारती | मैनें उन गिने चुने लोगों में से जिसने अपने कैरियर की शुरूआत टीवी से की। हां, आईआईएससी में पढ़ने के दौरान कई अखबारों के लिए फ्री लांसिंग जरूर की। लेकिन संस्‍थान से निकलते ही विनोद दुआ के परख कार्यक्रम में नौकरी मिल गई। यह कार्यक्रम दूरदर्शन पर ...

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कैसे नाम पड़ा ‘आज तक’?

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क़मर वहीद नक़वी | ‘आज तक’ का नाम कैसे पड़ा ‘आज तक?’ बड़ी दिलचस्प कहानी है. बात मई 1995 की है. उन दिनों मैं ‘नवभारत टाइम्स,’ जयपुर का उप-स्थानीय सम्पादक था. पदनाम ज़रूर उप-स्थानीय सम्पादक था, लेकिन 1993 के आख़िर से मैं सम्पादक के तौर पर ही अख़बार का काम ...

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नया मीडिया : नुकसान और निहितार्थ

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शिवप्रसाद जोशी। न्यू यॉर्कर में 1993 में एक कार्टून प्रकाशित हुआ था जिसमें एक कुत्ता कम्प्यूटर के सामने बैठा है और साथ बैठे अपने सहयोगी को समझाते हुए कह रहा है, “इंटरनेट में, कोई नहीं जानता कि तुम कुत्ते हो।” (जेन बी सिंगर, ऑनलाइन जर्नलिज़्म ऐंड एथिक्स, अध्याय एथिक्स एंड ...

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वेब जर्नलिज्‍म : नए जमाने के मीडिया को ऐसे समझें

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विजय के. झा।  प्रिंट और ब्रॉडकास्‍ट के बाद अब जमाना न्‍यू मीडिया का है। जवानी की ओर बढ़ रहे इस मीडिया ने नौजवानों को अपनी ओर खूब खींचा है। न्‍यू मीडिया यानी क्‍या परिभाषा के लिहाज से देखें तो न्‍यू मीडिया में वेबसाइट, ऑडियो-वीडियो स्‍ट्रीमिंग, चैट रूम, ऑनलाइन कम्‍युनिटीज के ...

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फोटोग्राफी : प्रोफेशनल कैमरों की कार्यप्रणाली

photojournalist

अमित कुमार।  फोटोग्राफ (छायाचित्र) वर्षों से पत्रकारिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहे हैं। समाचार पत्रों से लेकर ऑनलाइन न्यूज़ वेबसाइटों तक में छायाचित्रों (फोटोग्राफों) का प्रयोग न केवल प्रमुखता से किया जाता है बल्कि फोटोग्राफों के बिना इन माध्यमों की कल्पना भी मुश्किल है। हम सभी इस बात से अवगत हैं ...

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टीवी रिपोर्टिंग सबसे तेज, लेकिन कठिन और चुनौती भरा काम

CNN News room

शैलेश और डॉ. ब्रजमोहन | पत्रकारिता में टीवी रिपोर्टिंग आज सबसे तेज, लेकिन कठिन और चुनौती भरा काम है। अखबार या संचार के दूसरे माध्‍यमों की तरह टीवी रिपोर्टिंग आसान नहीं। टेलीविजन के रिपोर्टर को अपनी एक रिपोर्ट फाइल करने के लिए लम्‍बी मशक्‍कत करनी पड़ती है। रिपोर्टिंग के लिए ...

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सोशल मीडिया की बढ़ती पैठ और स्त्री विमर्श

Women-Power-Social-Media

पारुल जैन। सोशल मीडिया जैसे की नाम से ही ज़ाहिर है, एक ऐसा चैनल जो सोशल होने में मदद करे। मनुष्य जन्म से ही सामाजिक प्राणी है। वो समाज में रहता है और लोगों से संपर्क बनाना चाहता है। अगर हम एक परिवार की बात करें तो घर के पुरुष ...

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Public Relations: Digital Age is Setting In

PR

Prof. Jaishri Jethwaney | Internet and its access & reach across the world have been the most defining technological breakthroughs that the world has witnessed in the last few decades. In fact internet has changed the way we see and interpret our world. It has got us in touch with ...

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