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Tag Archives: Public Relation

ब्लॉगिंग : बांटिये अपनी पसंद लोगों में साथ

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अशोक पान्डे। इन्टरनेट पर अपने अनुभव बाकी लोगों के साथ बांटने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक तरह की व्यक्तिगत डिजिटल डायरी के लिए वैब्लॉग शब्द का प्रयोग सबसे पहले 17 दिसम्बर 1997 को जोर्न बार्जर द्वारा किया गया था। बार्जर रोबोट विस्डम नाम की अपनी एक वैबसाइट पर ...

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पत्रकारिता के विविध आयाम

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सुभाष धूलिया | अपने रोजमर्रा के जीवन की एक नितांत सामान्य स्थिति की कल्पना कीजिए। दो लोग आसपास रहते हैं और लगभग रोज मिलते हैं। कभी बाजार में, कभी राह चलते और कभी एक-दूसरे के घर पर। उनकी भेंट के पहले कुछ मिनट की बातचीत पर ध्यान दीजिए। हर दिन ...

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पीत पत्रकारिता : दांव पर पत्रकारीय सिद्धांतों की साख

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राजेश कुमार। पत्रकारिता अभिव्यक्ति का एक माध्यम है। जिसके जरिए समाज को सूचित, शिक्षित और मनोरंजित किया जाता है। पत्रकारिता के माध्यम से आने वाले किसी भी संदेश का समाज पर व्यापक असर पड़ता है, जिसके जरिए मानवीय व्यवहार को निर्देशित और नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में एक ...

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खोजी पत्रकारिता : कैसे, क्यों और विभिन्न आयाम

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डॉ . सचिन बत्रा। खोजी पत्रकारिता को अन्वेषणात्मक पत्रकारिता भी कहा जाता है। सच तो यह है कि हर प्रकार की पत्रकारिता में समाचार बनाने के लिए किसी न किसी रूप में खोज की जाती है यानि कुछ नया ढूंढने का प्रयास किया जाता है फिर भी खोजी पत्रकारिता को ...

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सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव और चुनावी राजनीति

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शालिनी जोशी। चुनाव 2014 नये मीडिया और जनसंचार और पत्रकारिता के छात्रों और शोधकर्ताओं और पेशेवरों के लिए एक टर्निंग प्वायंट की तरह है, एक ऐसा पड़ाव जहां मीडिया के नये पैमानों को परखने का एक बेहतर मौक़ा मिल जाता है। इस बहाने ये भी पता चलता है कि नया ...

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बिज़नेस चैनल का एक दिन और पत्रकारिता

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नीरज कुमार। कोई बिज़नेस चैनल देखिए। पहली बार में शायद ही आपके पल्ले पड़े कि क्या बोला जा रहा है, क्यों बोला जा रहा है। जो आंकड़े या चार्ट दिखाए रहे हैं, उनके मायने क्या हैं। ऐसा आपके साथ तब भी हो सकता है, जब आप अर्थव्यवस्था या बिज़नेस की ...

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हिन्दी सिनेमा की भाषा के विभिन्न आयाम

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सुशील यती। हिंदी ‘पॉपुलर’ सिनेमा मुख्य तौर पर ‘नरेटीव’ सिनेमा है, जिसमे कहानी महत्वपूर्ण होती है। दूसरे शब्दों में कहे तो विभिन्न ‘प्रॉडक्शन’ तकनीक, कैरेक्टर (किरदार), और कहानी के विभिन्न तत्व मिलकर एक कथानक (नरेटीव) का निर्माण करते है, जिसे सिनेमा की भाषा मे ‘नरेटीव’ कहा जाता है। फिल्म कथानक ...

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क्या ख़ास है वेब दुनिया में?

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शिवप्रसाद जोशी और शालिनी जोशी |  वेब पत्रकारिता कोई कम्प्यूटर पर अख़बार नहीं है. न ही ये ब्राउज़र से संचालित कोई प्रसारण केंद्र है. ये पारंपरिक मीडिया से कई मानों में भिन्न हैः अपनी क्षमता, लचीलेपन, तात्कालिकता, स्थायित्व और पारस्परिकता से. क्षमताः अख़बार का एक रिपोर्टर अपनी स्टोरी को पांच ...

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यहाँ जानिए दुनियाभर में ई- न्यूज़पेपर के विकास की कहानी

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डॉ. कीर्ति सिंह | प्रिंट पत्रकारिता सभी प्रकार की पत्रकारिताओं की जननी है। ऑनलाइन होने के मुकाम तक पहुंचने के लिए इसे सालों का सफर तय करना पड़ा। स्वरूप, प्रस्तुतिकरण, विषय वस्तु में निरंतर बदलाव करके और नई-नई तकनीकों के साथ सामंजस्य स्थापित कर प्रिंट पत्रकारिता सर्वाधिक परिवर्तन के दौर ...

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तो इसे कहते हैं TRP?

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डॉ. देव  व्रत  सिंह |  भारतीय मीडिया में पिछले एक दशक के दौरान टेलीविजन के संदर्भ में यदि किसी एक शब्दावली का सबसे अधिक प्रयोग हुआ है तो वो है टीआरपी यानी टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट। बार-बार टेलीविजन निर्माता टीआरपी का बहाना बनाकर या तो किसी कार्यक्रम को बंद कर देते ...

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मीडिया  का व्यापारीकरण: पाठक-दर्शक बने सिर्फ उपभोक्ता

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कपिल शर्मा | बात साल 2007 में दिल्ली के दरियागंज के सर्वोदय राजकीय विधालय में सेक्स रैकेट चलाने के झूठे स्ट्रींग ऑपरेशन से प्रेसमीडिया ट्रायल की शिकार महिला शिक्षिका की हो या 2011-12 में नीरा राडिया टेप के खुलासों के बाद बड़े प्रेस मीडिया घरानों की विश्वसनीयता पर खड़े हुए ...

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इंटरनेट पर समाचार पारम्परिक शैली से कैसे अलग हैं?

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शालिनी जोशी | वेब समाचार आखिर पारंपरिक मीडिया के समाचारों से कैसे अलग है. इसमें ऐसा क्या विशिष्ट है जो इसे टीवी, रेडियो या अख़बार की ख़बर से आगे का बनाता है, उसे और व्यापक बना देता है. कहने को तो वेब समाचार वैसा ही है जैसा पारंपरिक मीडिया का ...

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