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पब्लिक रिलेशन और मीडिया: कल, आज और कल

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दिलीप मंडल 
 पब्लिक रिलेशन वैसे तो पुरानी विधा है लेकिन आधुनिक कॉरपोरेट पब्लिक रिलेशन की शुरुआत 20वीं सदी के पहले दशक से हुई। पब्लिक रिलेशन का इतिहास लिखने वाले कई लोग आईवी ली को पब्लिक रिलेशन का जनक मानते हैं। कुछ इतिहास लेखक यह श्रेय एडवर्ड बर्नेस को देते ...

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जन संपर्क : भारत में मीडिया परिदृश्‍य

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जयश्री एन. जेठवानी और नरेन्‍द्र नाथ सरकार। मीडिया के नये परिदृश्‍य में जन-संपर्क को व्‍यवहार में लाने वालों के लिए न केवल संवाद में कुशल बल्कि अच्‍छा रणनीतिकार और समय प्रबंधक भी होना चाहिए। नयी सदी में गति ही सब कुछ होगी। किसी ने ठीक ही कहा है बीसवीं सदी ...

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जन संपर्क और प्रबंधन अध्याय 3

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जयश्री एन. जेठवानी और नरेन्द्र नाथ सरकार। कार्य निर्बाध गति से चलता रहे, इसके लिए किसी भी संस्थान के अंदर अलग विशेष विभागों की आवश्‍यकता होती है। विभिन्‍न विभागों की भूमिका और कार्यों के आधार पर उनके काम को लाइन या स्टाफ के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। अभियांत्रिकी, ...

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जन सरोकारों को समझने की विधा जन सम्‍पर्क की परिभाषा

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जयश्री एन. जेठवानी और नरेन्‍द्र नाथ सरकार। अब जब हम एक नयी सदी में प्रवेश कर गये हैं प्रबंधन के क्षेत्र में सबसे ज्‍यादा मांग रखने वाले विषयों में से एक जन-संपर्क का भी दायरा बढ़ा है। भारत में नब्‍बे का दशक जन-संपर्क से जुड़े लोगों के लिए काफी लाभकारी ...

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जनसंपर्क का भविष्य व चुनौतियां

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देवाशीष प्रसून। इंटरनेट और मोबाइल जैसे नए माध्यमों को प्रादुर्भाव और इसके इस्तेमाल में हुई बढ़ोतरी के बाद जनसंपर्क का भविष्य भी ज़्यादा से ज़्यादा तकनीकोन्नमुख हो गया है। हमेशा से ज़रूरत यह रही है कि इस माध्यम के द्वारा जनसंपर्क के लिए भेजे जाने वाले लाखों ई-मेल संदेशों में ...

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जन सम्‍पर्क के सिद्धांत, क्या ये अवैज्ञानिक है?

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जयश्री एन. जेठवानी, नरेन्‍द्र नाथ सरकार | क्‍या जन-सम्‍पर्क बिना किसी वैज्ञानिक सिद्धान्‍त पर आधारित तकनीक है? इसके आलोचक निश्चित रूप से हां कहेगें, लेकिन इस क्षेत्र से जुड़े पेशेवर और शिक्षाविद् इससे कतई सहमत नहीं होगें। 1920 के दशक में जब जन-सम्‍पर्क की अवधारणा शुरूआती स्‍तर पर थी तो एडवर्ड ...

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