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Tag Archives: social media

समाचार लेखन : कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे?

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सुभाष धूलिया। परंपरागत रूप से बताया जाता है कि समाचार उस समय ही पूर्ण कहा जा सकता है जब वह कौन, क्या, कब, कहां, क्यों और कैसे सभी प्रश्नों या इनके उत्तर को लेकर लोगों की जिज्ञासा को संतुष्ट करता हो। हिंदी में इन्हें छह ककार ( Five W and ...

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साक्षात्कार लेना भी एक कला है…

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महेंद्र नारायण सिंह यादव। पत्रकारिता में साक्षात्कार लेना सबसे महत्वपूर्ण और सर्वाधिक इस्तेमाल में आने वाला कार्य है। साक्षात्कार औपचारिक हो सकता है, जो साक्षात्कार के रूप में सीधे ही प्रकाशित या प्रसारित किया जाता है, और अनौपचारिक भी हो सकता है, जिसके जरिए मिलने वाली जानकारी को पत्रकार अपनी ...

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चुनाव-सर्वेक्षणों की होड़ में पिचकती पत्रकारिता

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उर्मिलेश | राजनीतिक दलों या नेताओं के जीतने-हारने या उनकी सीटों के पूर्वानुमान लगाने वाले ओपिनियन-पोल राजनीति और राजनेताओं के लिए कितने फायदेमंद या नुकसानदेह हैं, इस पर विवाद हो सकता है। लेकिन एक पत्रकार के रूप में मैं अपने अनुभव की रोशनी में बेहिचक कह सकता हूं कि चुनाव-अधिसूचना ...

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पत्रकारों का भविष्य और भविष्य की पत्रकारिता

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दिलीप मंडल।… सूचनाओं और समाचार का प्राथमिक स्रोत सोशल मीडिया बनता जा रहा है। फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन जैसे माध्यम अब बड़ी संख्या में लोगों के लिए वह जरिया बन चुके हैं, जहां उन्हें देश, दुनिया या पड़ोस में होने वाली हलचल की पहली जानकारी मिलती है। ऐसे लोग कई बार ...

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कैसे नाम पड़ा ‘आज तक’?

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क़मर वहीद नक़वी | ‘आज तक’ का नाम कैसे पड़ा ‘आज तक?’ बड़ी दिलचस्प कहानी है. बात मई 1995 की है. उन दिनों मैं ‘नवभारत टाइम्स,’ जयपुर का उप-स्थानीय सम्पादक था. पदनाम ज़रूर उप-स्थानीय सम्पादक था, लेकिन 1993 के आख़िर से मैं सम्पादक के तौर पर ही अख़बार का काम ...

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नया मीडिया : नुकसान और निहितार्थ

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शिवप्रसाद जोशी। न्यू यॉर्कर में 1993 में एक कार्टून प्रकाशित हुआ था जिसमें एक कुत्ता कम्प्यूटर के सामने बैठा है और साथ बैठे अपने सहयोगी को समझाते हुए कह रहा है, “इंटरनेट में, कोई नहीं जानता कि तुम कुत्ते हो।” (जेन बी सिंगर, ऑनलाइन जर्नलिज़्म ऐंड एथिक्स, अध्याय एथिक्स एंड ...

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न्यूज़ ब्रेक करता है सोशल मीडिया

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विनीत उत्पल | किसी भी घटना की पहली रिपोर्ट जो पुलिस दर्ज करती है, वह एफआईआर यानी फस्र्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट कहलाती है। इस रिपोर्ट में किसी भी घटना की बारीक जानकारी होती है, जो प्रभावित व्यक्ति दर्ज कराता है। उसी तरह वर्तमान समय में सोशल मीडिया तमाम मुख्यधारा की मीडिया ...

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संचार के दायरे को तोड़ता सोशल मीडिया

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विनीत उत्पल। सोशल मीडिया एक तरह से दुनिया के विभिन्न कोनों में बैठे उन लोगों से संवाद है जिनके पास इंटरनेट की सुविधा है। इसके जरिए ऐसा औजार पूरी दुनिया के लोगों के हाथ लगा है, जिसके जरिए वे न सिर्फ अपनी बातों को दुनिया के सामने रखते हैं, बल्कि ...

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सोशल मीडिया: लिखिए अवश्य पर जोखिम समझते हुए, न्यायालय से तो मिली आजादी

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अटल तिवारी। उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बरकरार रखने वाला एक ऐतिहासिक फैसला दिया है। अपने इस फैसले के जरिए न्यायालय ने साइबर कानून की धारा 66 (ए) निरस्त कर दी है, जो सोशल मीडिया पर कथित अपमानजनक सामग्री डालने पर पुलिस को किसी भी शख्स ...

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फोटोग्राफी : प्रोफेशनल कैमरों की कार्यप्रणाली

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अमित कुमार।  फोटोग्राफ (छायाचित्र) वर्षों से पत्रकारिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहे हैं। समाचार पत्रों से लेकर ऑनलाइन न्यूज़ वेबसाइटों तक में छायाचित्रों (फोटोग्राफों) का प्रयोग न केवल प्रमुखता से किया जाता है बल्कि फोटोग्राफों के बिना इन माध्यमों की कल्पना भी मुश्किल है। हम सभी इस बात से अवगत हैं ...

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सोशल मीडिया की बढ़ती पैठ और स्त्री विमर्श

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पारुल जैन। सोशल मीडिया जैसे की नाम से ही ज़ाहिर है, एक ऐसा चैनल जो सोशल होने में मदद करे। मनुष्य जन्म से ही सामाजिक प्राणी है। वो समाज में रहता है और लोगों से संपर्क बनाना चाहता है। अगर हम एक परिवार की बात करें तो घर के पुरुष ...

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सोशल मीडिया एवं हिन्दी विमर्श

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–डॉ॰रामप्रवेश राय जिस प्रकार हमारी फिल्मों/सिनेमा मे स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार ‘एंटेरटेनमेंट’ का तड़का लगता है कुछ उसी प्रकार हिन्दी के बारे मे बात–चीत करते समय हिन्दी–अंग्रेज़ी की प्रतिस्पर्धा का भाव आ जाता है। ऐसा शायद इसलिए भी होता है कि अंग्रेज़ी और यूरोपीय भाषाएँ आधुनिकता के द्योतक के ...

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