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Tag Archives: TV News

कंप्यूटरों के आने से हुआ अखबारों का कायाकल्प

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मुकुल व्यास। एक समय था जब हिंदी के अखबार बहुत ही साधारण ढंग से निकलते थे। उनमें खबरों के स्थान निर्धारण और पृष्ठों की सजावट में प्लानिंग का अभाव साफ दिखाई देता था। भारी भरकम लाइनों मशीनों पर खबरें कम्पोज होती थीं और खबरों के स्लग हाथ से पेज पर ...

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संचार की हत्या है निष्पक्षता की अनदेखी

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पाणिनि आनंद। भारत में पत्रकारिता के लिए पिछले दो दशक साधन, तकनीक और प्रसार की दृष्टि से बहुत उत्पादक रहे हैं। टीवी ने तेज़ी से अपने पांव पसारे हैं। रेडियो कई और रूपों में सामने आया है। प्रिंट के कागज़ और प्रेसों, प्रकाशकों तक की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। ...

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मीडिया लेखन के बदलते स्वरूप: मैगज़ीन के लिए कैसे लिखें?

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भाषा सिंह। पत्रकारिता की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। सोशल मीडिया, वेब, मोबाइल ऐप्स में खबरें सरपट दौड़ती हुई नजर आती हैं। पल-पल की खबर देने के दावों से बाजार अटे पड़े हैं। जैसे ही खबर मिले, वैसे ही इसे जनता-जनार्दन तक पहुंचाने का जबर्दस्त क्रेज है। ऐसे ...

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बदलते दौर के साथ सोशल मीडिया का सामाजिक दायरा

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विजय प्रताप। तकनीकी विकास के हर दौर में मीडिया का सत्ता और सरकार से अहम रिश्ता रहा है। भारत में अंग्रेजों के शासनकाल के समय प्रिंट मीडिया यानी प्रेस की भूमिका का जिक्र हो या अंग्रेजों के जाने के बाद दूरदर्शन और आकाशवाणी के जरिये सरकारी योजनाओं व नीतियों का ...

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अंतरराष्ट्रीय संचार में समकालीन प्रवृत्तियां और भविष्य की आहटें

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शिवप्रसाद जोशी। शीत युद्ध में वर्चस्व और विचार की लड़ाई सबसे ऊपर थी। 1990 के दशक से संसाधनों पर कब्ज़े की लड़ाई का दौर शुरू होता है। जब दशक की शुरुआत में अमेरिका ने इराक़ पर हमला बोल दिया। रासायनिक हथियारों को नष्ट करने की आड़ में हुए इस हमले ...

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टीवी विज्ञापनों में महिलाएं : आजादी या उपभोक्तावाद

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दीक्षा चमोला दीक्षित। महिलाओं की भूमिका हर क्षेत्र में तेज़ी से बदल रही है. राजनीति से लेकर शिक्षा, कंप्यूटर से लेकर कॉर्पोरेट जगत में महिलाएं अपना लोहा मनवा रही हैं। पर क्या महिलाओं की स्थिति हमारे समाज में सुधर पाई है? क्या मीडिया में उसके प्रस्तुतिकरण में कोई परिवर्तन आया ...

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दैनिक अखबार के डेस्क पर रहें हमेशा सतर्क, वरना…

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मुकुल व्यास। करीब 30 साल पहले अपने अखबार के मुख्य डेस्क पर रात्रि शिफ्ट में काम करते हुए मेरे सामने एक न्यूज फ्लैश आया, जिसे पढ़कर मैं चौंक गया। यह फ्लैश उत्तराखंड के एक प्रमुख तीर्थ स्थल पर रेल दुर्घटना के बारे में था, जहां कोई रेल लाइन नहीं है। ...

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पब्लिक रिलेशन और मीडिया: वैश्विक अनुभव और भारत

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दिलीप मंडल।  पब्लिक रिलेशन वैसे तो पुरानी विधा है लेकिन आधुनिक कॉरपोरेट पब्लिक रिलेशन की शुरुआत 20वीं सदी के पहले दशक से हुई। पब्लिक रिलेशन का इतिहास लिखने वाले कई लोग आईवी ली को पब्लिक रिलेशन का जनक मानते हैं। कुछ इतिहास लेखक यह श्रेय एडवर्ड बर्नेस को देते हैं। ...

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मोबाइल कम्युनिकेशन : शिष्टाचार सीखना भी है जरूरी

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डॉ. देवव्रत सिंह। हाल ही में दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने भारत के सभी मोबाइल प्रदाता कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने ग्राहकों को मोबाइल शिष्टाचार का पाठ पढायें। सार्वजनिक जीवन में प्रत्येक व्यक्ति अब ये महसूस करने लगा है कि मोबाइल सुविधा बनने के साथ-साथ असुविधाजनक भी साबित ...

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…तो क्या आप भी विज्ञान लेखक बनना चाहते हैं?

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देवेंद्र मेवाड़ी। पहले बताएंगे कि आप विज्ञान लेखक ही क्यों बनना चाहते हैं? लेखन का क्षेत्र बहुत विशाल है। आप तमाम माध्यमों के लिए विविध प्रकार का लेखन कर सकते हैं। पत्रकार, लेखक, कवि, नाटककार, पटकथाकार कुछ भी बन सकते हैं। फिर, विज्ञान लेखक ही क्यों? जवाब में अगर आप ...

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जनसंपर्क: कैसे करें छवि का निर्माण?

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रश्मि वर्मा। संचार प्रत्येक सामाजिक प्राणी की मूलभूत आवश्‍यकता है, जिसके जरिए वह परस्पर भावों, विचारों, जानकारियों और ज्ञान का आदान-प्रदान करता है। एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य के बीच संपर्क सेतू का काम करता है संचार और जनसंपर्क इसी संचार प्रक्रिया को निरंतर बनाए रखने की परिष्कृत कला है। ...

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पत्रकारीय लेखन के विभिन्न रूप

हिन्दी पत्रकारिता

गोविन्द सिंह | लेखन: स्वरूप एवं अवधारणा लेखन का संबंध मानव सभ्यता से जुड़ा है। जब आदमी के मन में अपने आप को अभिव्यक्त करने की ललक जगी होगी, तभी से लेखन की शुरुआत मानी जा सकती है। सवाल यह पैदा होता है कि हम क्यों लिखते हैं? कुछ लोग ...

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