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जनसंपर्क का भविष्य व चुनौतियां

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देवाशीष प्रसून। इंटरनेट और मोबाइल जैसे नए माध्यमों को प्रादुर्भाव और इसके इस्तेमाल में हुई बढ़ोतरी के बाद जनसंपर्क का भविष्य भी ज़्यादा से ज़्यादा तकनीकोन्नमुख हो गया है। हमेशा से ज़रूरत यह रही है कि इस माध्यम के द्वारा जनसंपर्क के लिए भेजे जाने वाले लाखों ई-मेल संदेशों में ...

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ट्विटर पर जरा संभलकर

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मधुरेन्द्र सिन्हा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्वीटर इन दिनों खूब चर्चा में है। सुपरस्टार सलमान खान को अदालत ने सजा क्या सुनाई, इस पर तो जैसे भूचाल आ गया। हजारों लोग ट्वीटर पर आकर अपने-अपने विचार व्यक्त करने लगे। इतनी बड़ी बात पर विचारों में टकराव होना स्वाभाविक है लेकिन इस ...

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मीडिया के बदलते आयाम

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आलोक वर्मा। आज पूरी दुनिया में शायद एक थी ऐसी जगह ढूंढ पाना मुश्किल होगा जहां मीडिया और संचार के तमाम माध्यम अपनी पैठ न चुके हों। हम कहीं भी जाएं, किसी से भी मिल-मीडिया और संचार के माध्यम हमे अपने आस-पास नजर आ ही जाते हैं। मीडिया के कई ...

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…तो, क्या आप भी विज्ञान लेखक बनना चाहते हैं?

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देवेंद्र मेवाड़ी। संपादकीयः अगर आप समाचारपत्र में काम करते हैं तो संपादक आपसे विज्ञान के किसी ज्वलंत या सामाजिक मुद्दे पर तत्काल संपादकीय लिखने की अपेक्षा कर सकते हैं। संपादकीय ऐसे मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी है। इससे समाचारपत्र द्वारा उस वैज्ञानिक विषय या घटना को दिए गए महत्व का भी ...

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कम होती लड़कियां और मीडिया रिपोर्टिंग

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अन्नू आनंद। पिछले करीब पांच दशकों से लड़कियों के घटते अनुपात के मसले पर कवरेज का सिलसिला जारी है। 80 के दशक में अमनियोसेंटसिस का इस्तेमाल लिंग निर्धारण के लिए शुरू हुआ तो अखबारों में इस तकनीक के दुरूपयोग संबंधी खबरें आने लगी। इससे पहले देश के कुछ विशेष हिस्सों ...

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संचार की बुलेट थ्योरी : अतीत एवं वर्तमान का पुनरावलोकन

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डॉ॰ राम प्रवेश राय। जन संचार के सिद्धांतों को लेकर अक्सर ये बहस चलती रहती है कि ये पुराने सिद्धांत व्यवहार मे महत्वहीन साबित होते है और पत्रकारिता शिक्षण मे इन सिद्धांतों पर अधिक ज़ोर नहीं देना चाहिए। ऐसा ही एक सिद्धांत है बुलेट या हाइपोडर्मिक निडल थ्योरी इसको एक ...

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नेट न्यूट्रेलिटी पर हंगामा क्यों?

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भूपेन सिंह। हाल के दिनों में नेट न्यूट्रेलिटी को लेकर काफी हंगामा रहा है। नेट न्यूट्रैलिटी की मांग सड़क से लेकर संसद तक उठी है। दिल्ली, चैन्नई और बेंगलौर में नेट न्यूट्रैलिटी लागू करने के लिए प्रदर्शन हुए हैं तो संसद में भी इस मामले में सवाल-जवाब हुए हैं। मुनाफा ...

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नेपाल त्रासदी में भारतीय मीडिया

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आशीष कुमार ‘अंशु’। भारतीय मीडिया को लेकर नेपाल से आ रही खबरों से यह जाहिर था कि मीडिया में जो कुछ आ रहा है, उसे देखकर नेपाल के लोग भारतीय मीडिया के प्रति आक्रोश में हैं। क्या नेपाल के लोगों का यह गुस्सा वास्तव में भारतीय मीडिया से था, या ...

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हिंदी पत्रकारिता की सदाबहार गलतियां

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डॉ. महर उद्दीन खां। पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए अन्य भाषाओं के शब्दों के प्रयोग को अनुचित नहीं कहा जा सकता मगर उन का सही प्रयोग किया जाना चाहिए। देखने में आता है कि जाने अनजाने या अज्ञानता वष कई उर्दू और अंग्रेजी शब्दों ...

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सोशल मीडिया : खबरों की चौपाल

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धनंजय चोपड़ा। माना जा रहा है कि वर्ष 2040 में प्रिंट न्यूज पेपर दुनिया से विदा हो जायेगा। दुनिया का कोई भी कागजी अखबार तब तक नहीं बचेगा। सब कुछ डिजिटल हो चुका होगा। बीसवीं सदी के मध्य में संचार शास्त्री मार्शल मैक्लुहान ने घोषणा की थी कि संचार माध्यम ...

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पत्रकारिता की विसंगतियों के केंद्र में है उसका कारोबार

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प्रमोद जोशी। मार्शल मैकलुहान के अनुसार पत्रकारिता पहला औद्योगिक उत्पाद है। यानी बाजार में बेचा जाने वाला और बड़े स्तर पर तैयार होने वाला माल। पाठकों का एक बड़ा बाजार है, जिन्हें जानकारी की जरूरत है। यह जानकारी उनके आसपास की हो सकती है और वैश्विक भी। इसमें सामान्य राजनीतिक, ...

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कोर्ट रिपोर्टिंग : बेहद सतर्क रहने की जरूरत

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अनूप भटनागर। न्‍यायपालिका और इसकी कार्यवाही से जुड़ी छोटी बड़ी सभी सभी खबरों में नेताओं, नौकरशाहों और कार्पोरेट जगत के लागों की ही नहीं बल्कि आम जनता की भी हमेशा से ही गहरी दिलचस्‍पी रही है। महांत्‍मा गांधी की हत्‍या से लेकर इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय द्वारा इन्दिरा गांधी का चुनाव ...

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